SEBI की जांच में क्या आरोप सामने आए थे?
- संबंधित पक्ष लेन-देन (RPTs):अडानी एंटरप्राइजेज पर आरोप था कि उसने FY2012-13 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में अपनी सहायक कंपनी अडानी एस्टेट्स और संबंधित संस्था वाकोडर इन्वेस्टमेंट्स के बीच हुए लेन-देन का विवरण लागू अकाउंटिंग मानकों के तहत प्रस्तुत नहीं किया था।
- वैध पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट के बिना ऑडिट:अडानी समूह की इन 5 कंपनियों के विभिन्न वर्षों की वित्तीय समीक्षा और ऑडिट रिपोर्ट ऐसी ऑडिट फर्मों (जैसे धर्मेश पारिख एंड कंपनी और शाह धंधारिया एंड कंपनी) द्वारा हस्ताक्षरित की गई थीं, जिनके पास उस समय वैध ‘पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट’ (Peer Review Certificate) नहीं था।
सेटलमेंट का कानूनी अर्थ और SEBI की शर्त
- बिना दोष स्वीकार किए समझौता (Without Admitting or Denying Guilt):कंपनियों ने SEBI (Settlement Proceedings) Regulations, 2018 के तहत समझौता आवेदन दायर किया था। इसका अर्थ है कि कंपनियों ने आरोपों को न तो स्वीकार किया है और न ही खारिज किया है।
- SEBI की पुनर्विचार शर्त:अदालती आदेश (22 सितंबर 2026) में अधिकारी जय सेबेस्टियन ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में यह पाया जाता है कि समझौते के दौरान दी गई कोई जानकारी गलत थी, या कंपनी ने अपनी शर्तों का उल्लंघन किया है, तो SEBI इस मामले की जांच दोबारा शुरू कर सकती है।
मुंबई: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India – SEBI) ने अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में उठाए गए कॉरपोरेट गवर्नेंस और डिस्क्लोज़र उल्लंघनों की जांच से उपजी न्यायनिर्णयन कार्यवाहियों (Adjudication Proceedings) को अडाणी समूह की पांच प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों के साथ कुल ₹1.508 करोड़ के संचयी भुगतान पर आधिकारिक रूप से निपटा (Settle) दिया है।
सेबी के न्यायनिर्णयन अधिकारी (Adjudicating Officer) जय सेबेस्टियन द्वारा 22 सितंबर 2026 को पारित निपटान आदेश के अनुसार, कंपनियों ने सेबी (निपटान कार्यवाही) विनियम, 2018 (SEBI Settlement Regulations, 2018) के तहत तथ्यों के निष्कर्षों या कानूनी परिणामों को “न तो स्वीकार करते हुए और न ही इनकार करते हुए” (Without admitting or denying the findings of fact and conclusions of law) यह समझौता किया है।
निपटान के तहत शामिल 5 कंपनियां और देय राशि का विवरण
सेबी की उच्चाधिकार प्राप्त सलाहकार समिति (High Powered Advisory Committee – HPAC) की सिफारिशों और पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल (Panel of Whole Time Members) की मंज़ूरी के बाद निर्धारित निपटान राशि का विवरण इस प्रकार है:
| कंपनी का नाम | विनियामक स्थिति / पूर्व नाम | चुकाई गई निपटान राशि |
| अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) | समूह की प्रमुख फ्लैगशिप इकाई | ₹76.05 लाख |
| अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) | नवीकरणीय ऊर्जा इकाई | ₹45.50 लाख |
| अडाणी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) | सिटी गैस वितरण इकाई | ₹9.75 लाख |
| एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड | पूर्व नाम: अडाणी विल्मर लिमिटेड (AWL) | ₹9.75 लाख |
| अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड | पूर्व नाम: अडाणी ट्रांसमिशन लिमिटेड (ATL) | ₹9.75 लाख |
| कुल संचयी निपटान राशि | — | ₹1.508 करोड़ |
(नोट: सेबी की प्रारंभिक जांच में समूह की सात सूचीबद्ध कंपनियां शामिल थीं, जिनमें अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड और अडाणी पावर लिमिटेड भी शामिल थीं, परंतु न्यायनिर्णयन नोटिस इन पांच कंपनियों को जारी किए गए थे)।
सेबी द्वारा जांचे गए कथित विनियामक उल्लंघन एवं आरोप
सेबी ने 15 फरवरी 2024 को जारी कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) में पूर्ववर्ती इक्विटी लिस्टिंग एग्रीमेंट, सेबी (सूचीबद्धता बाध्यताएं और प्रकटीकरण आवश्यकताएं) विनियम, 2015 (LODR Regulations) और प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (SCRA) के उल्लंघन का आरोप लगाया था:
1. संबंधित पक्ष लेनदेन (Related-Party Transactions – RPTs) का खुलासा न करना:
- अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) के मामले में सेबी ने आरोप लगाया कि वित्तीय वर्ष 2012-13 (FY13) की वार्षिक रिपोर्ट में कंपनी की सहायक इकाई ‘अडाणी एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘वाकोदर इनवेस्टमेंट लिमिटेड’ (जिसे AEL का संबंधित पक्ष बताया गया) के बीच हुए वित्तीय लेनदेन का खुलासा लागू लेखांकन मानकों (Accounting Standards) के तहत नहीं किया गया था।
2. बिना वैध ‘पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट’ (Peer Review Certificate) के ऑडिट व समीक्षा रिपोर्टों पर हस्ताक्षर:
सेबी के लिस्टिंग नियमों के अनुसार, सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय विवरणों की लेखापरीक्षा करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों के पास भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI) का वैध पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। सेबी ने पाया कि कई रिपोर्टों पर उन अवधियों में हस्ताक्षर किए गए जब संबंधित फर्मों के पास वैध सर्टिफिकेट नहीं था:
- अडाणी एंटरप्राइजेज: मार्च 2015 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट और जून 2015 की सीमित समीक्षा रिपोर्ट पर धर्मेश पारिख एंड कंपनी एलएलपी द्वारा; तथा जून 2017, सितंबर 2017 और दिसंबर 2021 की सीमित समीक्षा रिपोर्टों पर शाह धंधारिया एंड कंपनी एलएलपी द्वारा बिना वैध सर्टिफिकेट के हस्ताक्षर किए गए।
- अडाणी टोटल गैस एवं एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस: दिसंबर 2021 तिमाही की सीमित समीक्षा रिपोर्ट पर शाह धंधारिया एंड कंपनी एलएलपी द्वारा हस्ताक्षर किए जाने का आरोप।
- अडाणी ग्रीन एनर्जी: वित्त वर्ष 2018-19 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट तथा सितंबर 2018, दिसंबर 2018 और जून 2019 की तिमाहियों की समीक्षा रिपोर्टों पर धर्मेश पारिख एंड कंपनी एलएलपी द्वारा हस्ताक्षर।
- अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस: जून 2015 की तिमाही समीक्षा रिपोर्ट पर धर्मेश पारिख एंड कंपनी एलएलपी द्वारा हस्ताक्षर।
निपटान प्रक्रिया की समयरेखा (Settlement Timeline)
- कारण बताओ नोटिस: सेबी के न्यायनिर्णयन अधिकारी द्वारा 15 फरवरी 2024 को नोटिस जारी।
- संशोधित निपटान प्रस्ताव: कंपनियों ने सेबी की आंतरिक समिति (Internal Committee) के साथ बैठकों के बाद 29 मई 2026 को संशोधित निपटान शर्तें प्रस्तुत कीं।
- HPAC की सिफारिश: सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली ‘उच्चाधिकार प्राप्त सलाहकार समिति’ (HPAC) ने 29 जून 2026 को ₹1.508 करोड़ की शर्तों की सिफारिश की।
- पूर्णकालिक सदस्यों की स्वीकृति: सेबी के पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल ने 13 अगस्त 2026 को सिफारिशों को स्वीकार किया और 20 अगस्त को मांग पत्र जारी किया।
- भुगतान एवं निस्तारण: कंपनियों ने 5 सितंबर 2026 को राशि प्रेषित किए जाने की पुष्टि की, जिसके सत्यापन के उपरांत 22 सितंबर 2026 को न्यायनिर्णयन अधिकारी जय सेबेस्टियन ने कार्यवाहियों के औपचारिक निस्तारण का आदेश पारित किया।
आदेश की प्रमुख विधिक शर्तें और सेबी का सुरक्षित अधिकार
- पुनर्बहाली का अधिकार (Right to Restore Proceedings): सेबी के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि निपटान के दौरान कंपनियों द्वारा दिया गया कोई भी बयान या हलफनामा बाद में असत्य पाया जाता है, या निपटान की किसी शर्त/वचनबद्धता (Undertaking) का उल्लंघन होता है, तो नियामक को इस मामले को दोबारा खोलने और नए सिरे से प्रवर्तन कार्रवाई (Enforcement Action) शुरू करने का पूर्ण अधिकार सुरक्षित रहेगा।
- सीमित दायरा: यह निपटान आदेश केवल लिस्टिंग समझौते, प्रकटीकरण (LODR) और ऑडिट फॉर्म के तकनीकी अनुपालन तक सीमित है; यह हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगाए गए अन्य बड़े आरोपों पर कोई सामान्य या कंबल क्लीनचिट नहीं है।
विधिक विवरण
- प्राधिकारी: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) – न्यायनिर्णयन अधिकारी जय सेबेस्टियन
- संबंधित पक्ष: अडाणी एंटरप्राइजेज लि., अडाणी टोटल गैस लि., एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लि., अडाणी ग्रीन एनर्जी लि. एवं अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लि.
- प्रासंगिक कानून एवं विनियम:
- सेबी (निपटान कार्यवाही) विनियम, 2018 (SEBI Settlement Proceedings Regulations, 2018) का विनियम 23 सहपठित विनियम 28
- सेबी (सूचीबद्धता बाध्यताएं और प्रकटीकरण आवश्यकताएं) विनियम, 2015 (SEBI LODR Regulations, 2015) का विनियमन 23 (RPTs), विनियमन 33 (वित्तीय परिणाम) एवं विनियमन 48
- प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (SEBI Act, 1992) की धारा 15A(b), 15HB एवं धारा 15JB (निपटान अधिकार)
- प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (SCRA) की धारा 21A सहपठित धारा 23E
- आदेश तिथि: 22 सितंबर 2026
Hindenburg Vs Adani Group:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| नियामक | भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) |
| कंपनी समूह | अडानी समूह (Adani Group) |
| कुल सेटलमेंट राशि | ₹1.508 करोड़ (बिना दोष स्वीकार या अस्वीकार किए) |
| मुख्य आरोप | संबंधित पक्षों के लेन-देन का गैर-प्रकटीकरण और बिना वैध पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट वाले ऑडिटर्स द्वारा रिपोर्ट साइन करना |
| अंतिम आदेश तिथि | 22 सितंबर 2026 |

