Tuesday, September 29, 2026
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Land Row Mystery: 1993 में जिस महिला की मृत्यु हो चुकी थी, वह 2012 के बंटवारे और 2016 की डीड में जीवित और तस्वीर के साथ कैसे दर्ज हो गई?

अदालत का रुख और आदेश

गुरुग्राम की अतिरिक्त जिला जज डॉ. गगन गीत कौर (ADJ Gagan Geet Kaur) ने ग्रामीणों (अत्तार सिंह और श्याम सुंदर) द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए बेहद सख्त रुख अपनाया:

  1. अस्वच्छ हाथों से आने का आरोप: कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता “साफ हाथों से अदालत में नहीं आए हैं” (Not approached the court with clean hands)। जिस महिला की मृत्यु 1993 में हो चुकी थी, उसके नाम पर 2016 में फर्जी तरीके से फोटो लगाकर डीड निष्पादित की गई और खुद याचिकाकर्ता उसमें गवाह बने।
  2. FIR के निर्देश: अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) को तुरंत FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने के आदेश दिए हैं ताकि सच सामने आ सके।
  3. राजस्व अधिकारियों पर सवाल: कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि राजस्व विभाग के अधिकारियों (Revenue Authorities) ने बिना किसी सत्यापन के 2016 की रिलीज़ डीड और 2012 के बंटवारे के कागजात कैसे दर्ज कर लिए।

गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम जिले के मानेसर (ग्राम सीही) स्थित 50 कनाल 9 मरला (लगभग 6 एकड़ से अधिक) बहुमूल्य कृषि भूमि के स्वामित्व, राजस्व बंटवारे और रिलीज डीड में संदिग्ध जालसाजी के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।

अदालत ने पाया कि वादकारी स्वच्छ हाथों से अदालत में उपस्थित नहीं हुए हैं और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्य गंभीर आपराधिक कूटकरण (Forgery and Fraud) की ओर इशारा करते हैं। वास्तविक सच्चाई को सामने लाने के उद्देश्य से अदालत ने विवादित रिलीज डीड, विभाजन के कागजात और आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त, गुरुग्राम (Commissioner of Police, Gurugram) को भेजते हुए तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर विस्तृत जांच का आदेश दिया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश गगन गीत कौर की अदालत ने वर्ष 1993 में मृत बताई गई एक महिला (घीसो) के नाम पर वर्ष 2012 में राजस्व विभाजन होने और 2016 के पंजीकृत विलेख में उसकी जीवित तस्वीर चस्पा होने को अत्यंत गंभीर और संदेहास्पद मानते हुए अपीलकर्ताओं की अपील खारिज कर दी।

अदालत के समक्ष मुख्य विधिक उलझन: ‘तीन वर्षों की विसंगति’ (1993, 2012 और 2016)

न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान एक केंद्रीय प्रश्न उठाया: “घीसो की मृत्यु वास्तव में कब हुई?”

  • 1993 में मृत्यु का दावा:
    • अपीलकर्ताओं (अतर सिंह और श्याम सुंदर) की ओर से अदालत में आधिकारिक रूप से कहा गया कि सह-खातेदार महिला घीसो की मृत्यु वर्ष 1993 में ही हो गई थी।
    • अदालत में उपस्थित अपीलकर्ता श्याम सुंदर ने भी स्वयं यही बयान दर्ज कराया।
  • 2012 का विभाजन (सनद तकसीम):
    • नेमिता कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 20 सितंबर 2012 को सहायक कलेक्टर (प्रथम श्रेणी), मानेसर के समक्ष 20 कनाल 2 मरला के विभाजन की अर्जी दी गई।
    • 29 नवंबर 2012 को जारी ‘सनद तकसीम’ (Sanad Takseem) में घीसो को मृत दिखाकर उसके विधिक प्रतिनिधियों के माध्यम से दर्शाया गया, किंतु प्रतिनिधियों के नाम जोड़ने के बजाय उसका अपना ही नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रखा गया।
  • 2016 की रिलीज डीड (तस्वीर सहित उपस्थिति):
    • 25 मई 2016 को निष्पादित रिलीज डीड के तहत सरूपी, मिसरी और घीसो द्वारा अपना हिस्सा अपीलकर्ताओं के पक्ष में छोड़ने की बात दर्ज की गई।
    • इस डीड पर घीसो की बाकायदा जीवित तस्वीर (Photograph) अन्य दो महिलाओं के साथ लगी हुई थी।
    • अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर माना कि अपीलकर्ता श्याम सुंदर स्वयं इस 2016 की डीड का साक्ष्यांकन करने वाला गवाह (Attesting Witness) था।

न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि 1993 में मृत व्यक्ति 2012 की कार्यवाही में पक्षकार कैसे बन सकती है और 2016 में उसकी तस्वीर के साथ पंजीकृत दस्तावेज कैसे निष्पादित हो सकता है? राजस्व अधिकारियों द्वारा बिना किसी सत्यापन के इस दस्तावेज को पंजीकृत किया जाना भी व्यवस्थागत लापरवाही को दर्शाता है।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं जमीन का विवाद

  • विवादित संपत्ति: मानेसर तहसील के ग्राम सीही (Sihi) में स्थित 50 कनाल 9 मरला (सवा छह एकड़ से अधिक) कृषि भूमि।
  • निजी कंपनियों का लेन-देन:
    • मुंबई की कंपनी नेमिता कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (Nemita Commercial Pvt Ltd) ने संयुक्त जोत में से भूमि खरीदी और 2012 में 20 कनाल 2 मरला के विभाजन हेतु आवेदन किया, जिसका 29 नवंबर 2012 को बंटवारा हुआ।
    • बाद में नेमिता ने 18 दिसंबर 2020 को 11 कनाल 10 मरला जमीन पंजीकृत विक्रय विलेख (Sale Deed) के जरिए नई दिल्ली की कंपनी पी.जी. प्रोपमार्ट प्राइवेट लिमिटेड (P.G. Propmart Pvt Ltd) को बेच दी।
  • दीवानी वाद और अपील का क्रम (2022 से 2026):
    • अतर सिंह और श्याम सुंदर आदि ने 2022 में दीवानी अदालत में वाद दायर कर पी.जी. प्रोपमार्ट को बेदखल करने से रोकने और उपायुक्त (DC) को कोई कार्रवाई न करने हेतु स्थायी निषेधाज्ञा (Injunction) मांगी।
    • 9 सितंबर 2022 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) ने अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी खारिज कर दी। इसके विरुद्ध वादियों ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की।

दोनों पक्षों के मुख्य विधिक तर्क

अपीलकर्ताओं (ग्रामीणों) की ओर से:

  • अधिवक्ता एच.एस. खटाना ने तर्क दिया कि 2012 का विभाजन आदेश एकपक्षीय (Ex-parte) था और उन्हें कोई समन तामील नहीं हुआ था।
  • पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1887 के तहत संयुक्त भूमि का आंशिक विभाजन (Partial Partition) कानूनन अनुमेय नहीं है।
  • उनका भौतिक कब्जा कभी समाप्त नहीं हुआ; 6 अप्रैल 2022 की स्थानीय आयुक्त (Local Commissioner) की रिपोर्ट और तस्वीरें दर्शाती हैं कि भूमि पर उनकी फसल खड़ी थी।

प्रतिवादी (कंपनी व प्रशासन) की ओर से

  • पी.जी. प्रोपमार्ट की ओर से अधिवक्ता अश्वनी राव ने दलील दी कि विभाजन 2012 का है और 2014-15 की जमाबंदी में नेमिता का कब्जा दर्ज था। कंपनी ने समुचित जांच के बाद 2020 में जमीन खरीदी थी।
  • उन्होंने 2016 की रिलीज डीड का हवाला देकर कहा कि अपीलकर्ता बंटवारे से भलीभांति अवगत थे और सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि का मुआवजा भी दोनों पक्षों ने प्राप्त किया था।
  • सरकारी प्लीडर जे.एस. जांगड़ा ने दलील दी कि हरियाणा विकास एवं शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा 15 के तहत दीवानी अदालत को इस मामले में सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

अदालत का अंतिम आदेश एवं आपराधिक जांच के निर्देश

  1. अपील खारिज: अतिरिक्त जिला न्यायाधीश गगन गीत कौर ने अपील को गुण-दोष पर खारिज कर दिया, क्योंकि वादी परस्पर विरोधी तथ्यों के सहारे अदालत पहुंचे थे और स्वच्छ हाथों से न्याय की मांग नहीं कर रहे थे।
  2. पुलिस कमिश्नर को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश:
    • अदालत ने 2016 की रिलीज डीड, 2012 के विभाजन दस्तावेज और अदालती आदेश की प्रति गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया।
    • पुलिस को दस्तावेजों की कूटसाजी, फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के आपराधिक पहलुओं की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाने हेतु एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने का स्पष्ट आदेश दिया गया है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: अतर सिंह व अन्य बनाम पी.जी. प्रोपमार्ट प्राइवेट लिमिटेड व अन्य [सिविल अपील – जिला एवं सत्र न्यायालय, गुरुग्राम]
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • अपीलकर्ताओं की ओर से: अधिवक्ता एच.एस. खटाना
    • प्रतिवादी (कंपनी) की ओर से: अधिवक्ता अश्वनी राव
    • नगर योजना विभाग व उपायुक्त की ओर से: सरकारी प्लीडर जे.एस. जांगड़ा
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
    • पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1887 की सुसंगत धाराएं (संयुक्त खाते का विभाजन व सनद तकसीम)
    • हरियाणा विकास एवं शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा 15 (सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार पर विधिक प्रतिबंध)
    • सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) का आदेश XXXIX नियम 1 व 2 (अस्थायी निषेधाज्ञा) एवं अपीलीय प्रावधान
    • भारतीय दंड संहिता, 1860 / भारतीय न्याय संहिता, 2023 (जालसाजी, फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी – Cheating & Forgery)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
    • एसपी चेंगल्वराया नायडू बनाम जगन्नाथ (1994, सुप्रीम कोर्ट) — ‘जो व्यक्ति अदालत में तथ्यों को छिपाकर या कपटपूर्ण तरीके से आता है, वह किसी न्यायिक राहत का हकदार नहीं है; कपट (Fraud) सभी न्यायिक कार्यवाहियों को शून्य बना देता है।’
    • के.डी. शर्मा बनाम सेल (SAIL) (सुप्रीम कोर्ट) — ‘न्यायालय के अपीलीय अथवा असाधारण क्षेत्राधिकार का सहारा लेने वाले प्रत्येक वादकारी का यह प्राथमिक दायित्व है कि वह निष्कपट और स्वच्छ हाथों (Clean Hands) से अदालत के समक्ष आए।’
  • पीठ: गगन गीत कौर, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ), गुरुग्राम
  • अंतिम निर्णय: अपील खारिज; गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को विलेखों में फर्जीवाड़े की जांच हेतु तत्काल एफआईआर दर्ज करने का निर्देश।

Land Row Mystery: मामले का मुख्य घटनाक्रम और विसंगतियां

वर्षदर्ज दस्तावेज / घटनाविवादित बिंदु
1993घीसो की मृत्युअपीलकर्ता (श्याम सुंदर) ने अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि उनकी दादी ‘घीसो’ का निधन 1993 में ही हो गया था।
2012सनद तकसीम (Partition Deed)मुंबई की कंपनी ‘नेमिता कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड’ ने जमीन के बंटवारे (Partition) के लिए आवेदन दिया। दस्तावेजों में मृत महिला को जीवित/पक्षकार की तरह दिखाया गया।
2016रिलीज़ डीड (Release Deed)सरूपी, मिसरी और घीसो द्वारा अपीलकर्ताओं के हक में जमीन ट्रांसफर करने का पंजीकृत विलेख। विलेख में मृत महिला घीसो की तस्वीर लगी है और श्याम सुंदर खुद इसके गवाह हैं।
2020तीसरे पक्ष को बिक्रीनेमिता कमर्शियल ने जमीन का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली की कंपनी ‘पी.जी. प्रोपमार्ट प्राइवेट लिमिटेड’ को बेच दिया।
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