मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?
- आदेश में 18 दिनों का विलंब:यह मामला ‘हाइनाइट फार्म्स प्राइवेट लिमिटेड’ (Hynite Farms Pvt Ltd) से जुड़ी इंसॉल्वेंसी (दीवाला) कार्यवाही से संबंधित था। NCLT ने 5 जून 2026 को खुली अदालत में समाधान योजना (Resolution Plan) को मंजूरी देने वाला आदेश सुनाया था। लेकिन 18 दिन बीत जाने के बाद भी इसे वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया था।
- वकील द्वारा भेजा गया ईमेल:समाधान पेशेवर का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट मृणाल हर्ष वर्धन ने कोर्ट मास्टर को एक ईमेल भेजा। ईमेल में उन्होंने विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नोएडा प्राधिकरण (NOIDA Authority) के साथ समन्वय स्थापित कर प्लान लागू करने के लिए इस आदेश की तत्काल आवश्यकता है, इसलिए इसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए।
- NCLT का रुख और प्रतिकूल टिप्पणी:NCLT ने वकील के इस ईमेल पर नाराजगी जताते हुए उनके आचरण के खिलाफ 5 जून और 6 जुलाई के अपने आदेशों में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज कर दीं। इस टिप्पणी से अपने पेशेवर सम्मान पर असर पड़ता देख वकील ने NCLAT का रुख किया।
NCLAT के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
1. “वकील की चिंता और उत्सुकता स्वाभाविक थी”:
NCLAT की पीठ ने ईमेल की समीक्षा करते हुए टिप्पणी की: “स्वाभाविक रूप से जब खुली अदालत में 05.06.2026 को सुनाया गया आदेश 18 दिनों तक अपलोड नहीं किया जा सका, तो हमें संबंधित बेंच के कोर्ट मास्टर को ईमेल भेजने के अपीलकर्ता के कार्य में कोई त्रुटि नजर नहीं आती। यह केवल उस आदेश को अपलोड करने का अनुरोध था जो खुली अदालत में सुनाया जा चुका था।”
2. भाषा की शिष्टता:
- NCLAT ने कहा कि वकील द्वारा भेजे गए ईमेल की भाषा काफी सौम्य और विनम्र थी। इसमें अदालत की अवमानना या किसी भी प्रकार के अनुचित आचरण का कोई संकेत नहीं था।
नई दिल्ली: कंपनी अधिनियम, 2013 एवं दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (IBC, 2016) के तहत राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण नियम, 2016 (NCLT Rules, 2016) के नियम 150 (खुली अदालत में आदेश सुनाने और तुरंत प्रमाणित प्रति/वेबसाइट अपलोड की बाध्यता), अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा अधीनस्थ न्यायाधिकरणों के आदेशों से प्रतिकूल न्यायिक टिप्पणियों को हटाना (Expunging of Adverse Remarks against Advocates), न्याय प्रशासन में वकीलों की गरिमा और स्वतंत्रता का संरक्षण, तथा सुप्रीम कोर्ट के समयबद्ध निर्देशों के अनुपालन में आदेश प्राप्त करने की पेशेवर व्याकुलता पर राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT, नई दिल्ली) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं वकीलों के सम्मान की रक्षा करने वाला फैसला सुनाया है।
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान और तकनीकी सदस्य नरेश सलेचा की पीठ ने रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता मृणाल हर्ष वर्धन द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए NCLT द्वारा 5 जून 2026 और 6 जुलाई 2026 के आदेशों में उनके आचरण के विरुद्ध की गई सभी प्रतिकूल टिप्पणियों (Adverse Remarks) को पूरी तरह विलोपित (Expunge) कर दिया।
NCLAT ने स्पष्ट व्यवस्था दी कि जब खुली अदालत में सुनाया गया आदेश 18 दिनों तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुआ, तो वकील द्वारा कोर्ट मास्टर को एक विनम्र ईमेल भेजकर आदेश अपलोड करने का अनुरोध करना कोई कदाचार या अनुचित कृत्य नहीं था, बल्कि यह स्वीकृत समाधान योजना (Approved Resolution Plan) को समय पर लागू करने के लिए वकील की स्वाभाविक और वैध पेशेवर उत्सुकता (Advocate’s Anxiety) थी।
अपीलीय अधिकरण (NCLAT) के मुख्य न्यायिक निष्कर्ष एवं विधिक व्यवस्था
1. ’18 दिन तक आदेश अपलोड न होने पर ईमेल भेजना त्रुटिहीन कृत्य’
NCLAT की पीठ ने NCLT के अनुचित रवैये को सुधारते हुए आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज किया: “स्वाभाविक रूप से जब 05.06.2026 को खुली अदालत में सुनाया गया आदेश 18 दिनों तक अपलोड नहीं किया जा सका, तो हमें अपीलकर्ता (अधिवक्ता) द्वारा संबंधित पीठ के कोर्ट मास्टर को ईमेल भेजने के कृत्य में कोई त्रुटि नहीं दिखती, जिसमें केवल उस आदेश को अपलोड करने का अनुरोध किया गया था जो 05.06.2026 को खुली अदालत में सुनाया गया था।”
2. भाषा की सौम्यता और पेशेवर दायित्व:
- NCLAT ने वकील द्वारा कोर्ट मास्टर को भेजे गए ईमेल की विषय-वस्तु और भाषा का स्वयं अवलोकन किया।
- अधिकरण ने पाया:“हमने ईमेल का गहराई से अवलोकन किया है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि उसकी भाषा काफी सौम्य (Language is quite soft) और शिष्ट थी।”
- अदालत ने माना कि यह ईमेल किसी न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने या अवमानना करने के लिए नहीं भेजा गया था, बल्कि इसका उद्देश्य नोएडा प्राधिकरण (NOIDA Authority) और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत स्वीकृत समाधान योजना को समय पर क्रियान्वित करने की अनिवार्यता को पूरा करना था।
3. बिना सुनवाई के प्रतिकूल टिप्पणी प्राकृतिक न्याय का हनन:
- NCLAT ने इस बात को गंभीरता से लिया कि NCLT ने अधिवक्ता के आचरण पर अपने न्यायिक आदेशों में गंभीर प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज कर दीं, जबकि ऐसा करने से पहले अधिवक्ता को अपना स्पष्टीकरण देने का कोई अवसर (Show Cause Notice) नहीं दिया गया था।
- यह सीधे तौर पर अधिवक्ता की पेशेवर प्रतिष्ठा (Professional Reputation) को धूमिल करने वाला था, जिसे न्याय हित में रिकॉर्ड से हटाया जाना अनिवार्य था।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम
| चरण / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के तर्क |
| मूल कॉर्पोरेट विवाद | हायनाइट फार्म्स प्राइवेट लिमिटेड (Hynite Farms Pvt. Ltd.) के विरुद्ध कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) विचाराधीन थी। NCLT बेंच ने 5 जून 2026 को खुली अदालत में रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी देने का आदेश पारित किया। |
| आदेश की अनुपलब्धता | खुली अदालत में फैसला सुनाए जाने के बाद भी आदेश की प्रति न तो पक्षों को दी गई और न ही 18 दिनों तक NCLT की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गई। |
| वकील द्वारा ईमेल भेजने का कारण | रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) के वकील मृणाल हर्ष वर्धन पर सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों के अनुपालन की बाध्यता थी जिसके तहत स्वीकृत योजना को लागू करने के लिए नोएडा प्राधिकरण (NOIDA Authority) के साथ तुरंत समन्वय करना था। आदेश की लिखित प्रति के बिना यह प्रक्रिया रुकी हुई थी। |
| NCLT का कड़ा रुख | NCLT की पीठ ने कोर्ट मास्टर को ईमेल भेजने को आपत्तिजनक माना और अपने न्यायिक आदेशों (5 जून व 6 जुलाई) में वकील के आचरण के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज कर दीं। |
| NCLAT में अपील का आधार | अधिवक्ता वर्धन ने NCLAT में दलील दी कि ईमेल पूरी तरह शालीन और औपचारिक था। किसी को धमकाया या अपमानित नहीं किया गया था। बिना सुनवाई के ऐसी टिप्पणियां उनके करियर और पेशेवर साख को अपूरणीय क्षति पहुंचाएंगी। प्रतिवादियों ने भी अपील का कोई विरोध नहीं किया। |
| NCLAT का अंतिम निर्णय | NCLAT ने वकील को दोषमुक्त माना; NCLT द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को आदेश से विलोपित (Expunged) किया। |
विधिक एवं प्रक्रियात्मक विश्लेषण: NCLT नियम 150 और वकीलों के अधिकार
- NCLT नियम 2016 का नियम 150 (आदेश की घोषणा और प्रति):
- नियम 150(1) के अनुसार, न्यायाधिकरण द्वारा किसी भी वाद या आवेदन पर सुनवाई समाप्त होने के बाद आदेश तुरंत या तीस दिनों के भीतर सुनाया जाना चाहिए।
- जैसे ही आदेश खुली अदालत में सुनाया जाता है, रजिस्ट्री का यह कर्तव्य है कि वह उसे तत्काल वेबसाइट पर अपलोड करे और पक्षों को निःशुल्क प्रति उपलब्ध कराए। जब अदालत स्वयं 18 दिनों तक आदेश अपलोड करने में विफल रही, तो वकील को सूचना मांगने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
- अधिवक्ताओं के विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणियों पर उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश:
- के.पी. तिवारी बनाम मध्य प्रदेश राज्य [1994 Supp (1) SCC 540] और नीरज गर्ग बनाम सरोज गर्ग [(2021) 9 SCC 738] में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि:
- उच्च और अधीनस्थ अदालतों को अपने निर्णयों में वकीलों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां करने में अत्यधिक संयम बरतना चाहिए।
- जब तक कोई वकील जानबूझकर अदालती कार्यवाही में बाधा न डाले या घोर कदाचार न करे, तब तक उसके आचरण पर ऐसी टिप्पणियां नहीं की जानी चाहिए जो उसके पूरे करियर को प्रभावित करें।
- प्राकृतिक न्याय के तहत किसी भी वकील के विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणी करने से पूर्व उसे कारण बताओ नोटिस और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।
- के.पी. तिवारी बनाम मध्य प्रदेश राज्य [1994 Supp (1) SCC 540] और नीरज गर्ग बनाम सरोज गर्ग [(2021) 9 SCC 738] में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि:
- IBC मामलों में समय की महत्ता:
- दिवाला कानून (IBC) एक समयबद्ध प्रक्रिया है। रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी मिलने के बाद प्रत्येक दिन की देरी कॉरपोरेट देनदार और लेनदारों के करोड़ों रुपये के हित को प्रभावित करती है। NCLAT ने सही माना कि वकील की चिंता कोई व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि कानून की समय-सीमा का पालन करने के लिए थी।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- केस संदर्भ: मृणाल हर्ष वर्धन (अधिवक्ता) बनाम हायनाइट फार्म्स प्राइवेट लिमिटेड व अन्य [कंपनी अपील – NCLAT, नई दिल्ली]
- पीठ: न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान (न्यायिक सदस्य) एवं नरेश सलेचा (तकनीकी सदस्य)
- निर्णय की तिथि: अक्टूबर 2026
- संबद्ध निचली अदालत: राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की संबंधित पीठ (आदेश दिनांक: 05.06.2026 एवं 06.07.2026)
विधिक प्रतिनिधित्व:
- अपीलकर्ता (अधिवक्ता) की ओर से: अधिवक्ता चित्रांशुल सिन्हा, आदित्य मिश्रा, सृष्टि अग्रवाल एवं आयुषी किरण
- रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) की ओर से: अधिवक्ता संजीव देवड़ा
- हायनाइट फार्म्स (कॉर्पोरेट देनदार) की ओर से: अधिवक्ता ऋषि सिंघल एवं तन्नू राणा
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण नियम, 2016 (NCLT Rules, 2016) — नियम 150 (आदेश सुनाना व आदेश की प्रतियों का वितरण)
- दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (IBC, 2016) — धारा 31 (समाधान योजना को मंजूरी) एवं धारा 61 (NCLAT के समक्ष अपील)
- कंपनी अधिनियम, 2013 — धारा 421 (अपीलीय अधिकारिता)
- संवैधानिक सिद्धांत: प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत (Audi Alteram Partem) और न्यायिक संयम (Judicial Restraint)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- न्यायिक आदेशों के अपलोड में वकीलों का अधिकार और शिष्टाचार: ‘यदि खुली अदालत में सुनाए गए आदेश को कई दिनों तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया जाता, तो वकील द्वारा कोर्ट मास्टर को सौम्य भाषा में ईमेल भेजकर आदेश अपलोड करने का अनुरोध करना कोई कदाचार नहीं है; यह केवल आदेश प्राप्त करने की पेशेवर उत्सुकता है जिसके लिए वकील के आचरण पर प्रतिकूल टिप्पणी करना पूरी तरह अनुचित है।’
- अंतिम परिणाम: अपील स्वीकार; NCLT द्वारा 5 जून 2026 और 6 जुलाई 2026 के आदेशों में अधिवक्ता के विरुद्ध की गई सभी प्रतिकूल टिप्पणियां पूरी तरह विलोपित (Expunged); स्पष्ट किया गया कि इस आदेश का उपयोग अन्य लंबित अवमानना मामलों में नहीं किया जा सकेगा।
NOIDA Authority:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अपीलीय अदालत | राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) |
| पीठ | न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान एवं नरेश सलेचा (तकनीकी सदस्य) |
| मामले का शीर्षक | मृणाल वर्सेज हाइनाइट (Mrinal Vs Hynite) |
| मूल विवाद | खुली अदालत में आदेश सुनाए जाने के 18 दिनों बाद भी NCLT की वेबसाइट पर अपलोड न होना। |
| वकील द्वारा कदम | समाधान पेशेवर (Resolution Professional) के वकील द्वारा आदेश अपलोड करने हेतु कोर्ट मास्टर को विनम्र ईमेल भेजना। |
| NCLAT का अंतिम आदेश | वकील के खिलाफ NCLT द्वारा पारित प्रतिकूल टिप्पणियों को रद्द/हटाया गया। |

