Saturday, October 24, 2026
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Citizenship Act: जन्म से मिली नागरिकता सांविधिक प्राधिकार के बिना नहीं छीनी जा सकती; 10 वर्षीय बालक का पासपोर्ट 3 माह में जारी करने का निर्देश

मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी विवाद

  1. क्या था पूरा मामला?याचिकाकर्ता बच्चे का जन्म 23 जनवरी 2016 को सेलम (तमिलनाडु) में हुआ था। जन्म के समय उसके माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक थे। अक्टूबर 2021 में उसे भारतीय पासपोर्ट जारी किया गया था, जिसकी वैधता 4 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रही थी। बच्चे ने अपने पासपोर्ट नवीनीकरण (आवेदन तिथि: 3 अगस्त 2026) के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय मदुरै में अर्जी दी थी, जिसे लंबित रखा गया था।
  2. पासपोर्ट अधिकारियों का तर्क:पासपोर्ट अधिकारियों के वकील ने तर्क दिया कि बच्चे के पिता ने वर्ष 2021 में यूनाइटेड किंगडम (UK) की नागरिकता प्राप्त कर ली थी। नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 8(2) के अनुसार, जब कोई पुरुष भारत का नागरिक नहीं रहता है, तो उसके नाबालिग बच्चे की भारतीय नागरिकता भी समाप्त हो जाती है।
  3. याचिकाकर्ता के वकील का तर्क:याचिकाकर्ता के वकील ने स्पष्ट किया कि धारा 8 केवल तभी लागू होती है जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी भारतीय नागरिकता का त्याग (Renunciation) करता है। जबकि धारा 9 उस स्थिति से निपटती है जहां कोई नागरिक किसी दूसरे देश की नागरिकता ग्रहण करता है।

हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी व्याख्या

1. “जन्म से नागरिकता वैधानिक प्रावधानों के बिना नहीं छीनी जा सकती”:

न्यायामूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति ने नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3(1) का हवाला देते हुए कहा: “23 जनवरी 2016 को बच्चे के जन्म के समय उसके माता-पिता दोनों भारत के नागरिक थे। इस प्रकार, बच्चा जन्म से ही भारत का नागरिक बन गया। स्पष्ट वैधानिक मंजूरी (Statutory Sanction) के अभाव में, किसी नाबालिग से उसकी जन्मजात नागरिकता नहीं छीनी जा सकती।”

2. धारा 8 और धारा 9 के बीच अंतर:

  • अदालत ने माना कि पिता द्वारा यूके (UK) की नागरिकता लेना देशीयकरण (Naturalisation) के तहत आता है, जो धारा 9 के दायरे में है। इसे धारा 8 के तहत स्वेच्छा से नागरिकता का त्याग नहीं माना जा सकता, इसलिए धारा 8(2) के तहत नाबालिग की नागरिकता रद्द करने का पासपोर्ट अधिकारियों का तर्क गलत था।

मदुरै: नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) की धारा 3(1)(c) (जन्म से नागरिकता / Citizenship by Birth – जन्म के समय माता-पिता दोनों का भारतीय नागरिक होना), धारा 8(1) व (2) (भारतीय नागरिकता का औपचारिक परित्याग / Renunciation of Citizenship और अवयस्क बच्चे पर उसका सीमित प्रभाव), धारा 9(1) (स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता अर्जित करने पर नागरिकता की स्वतः समाप्ति / Termination of Citizenship), तथा पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत भारतीय नागरिकों के यात्रा दस्तावेज नवीनीकरण के अधिकार पर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैधानिक व्यवस्था दी है।

न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति की एकल पीठ ने अपने पिता के माध्यम से 10 वर्षीय बालक द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO), मदुरै को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता बालक के पासपोर्ट नवीनीकरण आवेदन (दिनांक 3 अगस्त 2026) पर तीन महीने के भीतर सकारात्मक निर्णय ले और पासपोर्ट का नवीनीकरण करे।

अदालत ने पासपोर्ट प्राधिकरण की उस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि चूंकि बालक के पिता ने वर्ष 2021 में यूनाइटेड किंगडम (UK) की नागरिकता ले ली थी, इसलिए धारा 8(2) के तहत पिता के भारतीय नागरिक न रहने पर उनके नाबालिग पुत्र की भारतीय नागरिकता भी स्वतः समाप्त हो गई। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 8 केवल ‘नागरिकता के स्वैच्छिक परित्याग’ पर लागू होती है, न कि विदेशी नागरिकता ग्रहण करने पर नागरिकता समाप्ति (धारा 9) के मामलों में; अतः जन्म से मिली नागरिकता किसी स्पष्ट वैधानिक प्रावधान के अभाव में मनमाने ढंग से नहीं छीनी जा सकती।

उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं विधिक व्यवस्था

1. ‘जन्म से मिली नागरिकता को बिना सांविधिक मंजूरी के नहीं छीना जा सकता’

न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति ने नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3(1) के सांविधिक अधिदेश को रेखांकित करते हुए व्यवस्था दी: “याचिकाकर्ता बालक उस प्रासंगिक समय पर अपने माता-पिता दोनों के भारतीय नागरिक होने के कारण नागरिकता अधिनियम की धारा 3(1) के तहत ‘जन्म से भारत का नागरिक’ (Citizen of India by Birth) बना था। किसी स्पष्ट सांविधिक मंजूरी (Statutory Sanction) के अभाव में, किसी नाबालिग को इस प्रकार उसकी भारतीय नागरिकता से वंचित नहीं किया जा सकता (Cannot be stripped of citizenship)।”

2. धारा 8 (परित्याग) और धारा 9 (समाप्ति) का विधिक अंतर:

  • पासपोर्ट प्राधिकरण ने तर्क दिया था कि नागरिकता अधिनियम की धारा 8(2) के अनुसार जब कोई पुरुष/व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं रहता, तो उसके नाबालिग बच्चे की भारतीय नागरिकता भी समाप्त हो जाती है।
  • उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता के वकील की इस दलील को स्वीकार किया कि धारा 8 और धारा 9 दो बिल्कुल अलग-अलग विधिक परिस्थितियों को नियंत्रित करती हैं:
    • धारा 8 (Renunciation): यह प्रावधान केवल तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति धारा 8(1) के तहत निर्धारित प्रारूप में भारत सरकार के समक्ष औपचारिक घोषणा करके स्वेच्छा से अपनी भारतीय नागरिकता का परित्याग (Renunciation) करता है। केवल इसी विशिष्ट स्थिति में धारा 8(2) के तहत अवयस्क बच्चे की नागरिकता प्रभावित होती है (और वह बच्चा भी 18 वर्ष का होने पर धारा 8(2) के परंतुक के तहत 1 वर्ष के भीतर भारतीय नागरिकता पुनः बहाल करा सकता है)।
    • धारा 9 (Termination): जब कोई भारतीय नागरिक किसी दूसरे देश (जैसे ब्रिटेन) की नागरिकता देशीयकरण (Naturalisation) या पंजीकरण से स्वेच्छा से हासिल करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता धारा 9(1) के तहत ‘स्वतः समाप्त’ (Terminates) होती है। धारा 9 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो पिता के विदेशी नागरिक बनने पर उसके भारत में जन्मे नाबालिग बच्चे की नागरिकता को समाप्त करता हो।

3. विधिक संरक्षण (Legal Custody) का आक्षेप खारिज:

  • पासपोर्ट कार्यालय ने यह तकनीकी आपत्ति भी उठाई थी कि उनके रिकॉर्ड में बालक की विधिक कस्टडी को लेकर कोई अदालती आदेश या दस्तावेज नहीं है।
  • अदालत ने पाया कि जब पिता अपने बच्चे के स्वाभाविक अभिभावक (Natural Guardian) के रूप में याचिका प्रस्तुत कर रहे हैं और माता-पिता के बीच किसी वैवाहिक विवाद या कस्टडी विवाद का कोई साक्ष्य नहीं है, तो पासपोर्ट नवीनीकरण को रोकने के लिए कस्टडी का बहाना बनाना पूरी तरह अनुचित है।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम

चरण / विवरणतथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के तर्क
याचिकाकर्ता की पृष्ठभूमि10 वर्षीय नाबालिग बालक (पिता के माध्यम से याचिका दायर)। जन्म तिथि: 23 जनवरी 2016, स्थान: सलेम (तमिलनाडु)।
जन्म के समय माता-पिता की स्थिति23 जनवरी 2016 को जन्म के समय बालक के माता और पिता दोनों वैध भारतीय नागरिक थे। अतः बालक धारा 3(1)(c) के तहत जन्म से भारतीय नागरिक बना।
पासपोर्ट का इतिहासबालक को अक्टूबर 2021 में 5 वर्ष की वैधता वाला भारतीय पासपोर्ट जारी किया गया था, जिसकी वैधता 4 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो गई। बालक ने 3 अगस्त 2026 को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO), मदुरै में नवीनीकरण का आवेदन दिया।
पासपोर्ट प्राधिकरण का आक्षेपप्राधिकरण के वकील ने दलील दी कि पिता ने वर्ष 2021 में UK (ब्रिटिश) नागरिकता ले ली थी। नागरिकता कानून की धारा 8(2) के तहत पिता की भारतीय नागरिकता समाप्त होने के साथ ही नाबालिग पुत्र की नागरिकता भी समाप्त हो गई। साथ ही कस्टडी रिकॉर्ड का अभाव बताया गया।
याचिकाकर्ता की दलीलपिता ने धारा 8 के तहत नागरिकता का कोई औपचारिक त्यागपत्र (Renunciation) नहीं दिया था, बल्कि धारा 9 के तहत विदेशी पासपोर्ट लेने से उनकी नागरिकता समाप्त हुई थी। धारा 9 बच्चों की नागरिकता समाप्त नहीं करती। धारा 3 के तहत मिला जन्मजात दर्जा छीना नहीं जा सकता।
हाईकोर्ट का अंतिम निर्देशपासपोर्ट कार्यालय की आपत्तियां निरस्त; RPO मदुरै को 3 महीने के भीतर नाबालिग बालक के पासपोर्ट नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी कर पासपोर्ट जारी करने का आदेश।

विधिक एवं सांविधिक विश्लेषण: नागरिकता अधिनियम, 1955 का ढांचा

  • नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3(1)(c) — ‘सिटिजनशिप बाय बर्थ’:
    • 2003 के संशोधन (जो 3 दिसंबर 2004 से प्रभावी हुआ) के अनुसार, भारत में पैदा हुआ कोई भी बच्चा जन्म से भारत का नागरिक होता है यदि उसके जन्म के समय उसके दोनों माता-पिता भारत के नागरिक हों (या एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो)।
    • चूंकि याचिकाकर्ता का जन्म 2016 में सलेम में हुआ था और उस समय उसके माता-पिता दोनों भारतीय थे, इसलिए वह जन्म से भारतीय नागरिकता प्राप्त कर चुका था।
  • धारा 8(2) के दायरे का संकीर्ण निर्वचन:
    • धारा 8 का शीर्षक ही है: “नागरिकता का परित्याग” (Renunciation of citizenship)।
    • धारा 8 की उपधारा (2) स्पष्ट रूप से कहती है कि “जहाँ कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन नागरिकता का परित्याग करने की घोषणा करने के परिणामस्वरूप भारत का नागरिक नहीं रहता…”।
    • जब तक पिता ने धारा 8(1) के तहत औपचारिक घोषणा दाखिल न की हो, तब तक उपधारा (2) का चाबुक किसी नाबालिग बच्चे पर नहीं चलाया जा सकता।
  • धारा 9 की स्वतंत्र कार्यप्रणाली (Termination):
    • धारा 9 नागरिकता की समाप्ति से संबंधित है जो कानून के संचालन (Operation of Law) से होती है जब कोई व्यक्ति विदेशी पासपोर्ट हासिल करता है।
    • संसद ने जानबूझकर धारा 9 में ऐसा कोई उपबंध नहीं जोड़ा कि किसी भारतीय नागरिक द्वारा विदेशी नागरिकता लेने पर उसके भारत में जन्मे नाबालिग बच्चों की नागरिकता भी समाप्त मान ली जाएगी। संसद की स्पष्ट विधायी मंशा के बिना कार्यपालिका ऐसा कठोर परिणाम नहीं थोप सकती।
  • संविधान का अनुच्छेद 21 और पासपोर्ट का अधिकार:
    • मेनका गांधी बनाम भारत संघ [(1978) 1 SCC 248] के अनुसार, पासपोर्ट प्राप्त करना और विदेश यात्रा करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अनिवार्य हिस्सा है। किसी भी नागरिक (विशेषकर बच्चे) को मनमाने और गैर-कानूनी आधारों पर पासपोर्ट से वंचित नहीं किया जा सकता।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: नाबालिग बालक (पिता के माध्यम से) बनाम क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, मदुरै व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – मद्रास उच्च न्यायालय, मदुरै पीठ]
  • पीठ: न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति (एकल पीठ)
  • आदेश की तिथि: अक्टूबर 2026
  • संबद्ध विषय: माता-पिता द्वारा विदेशी नागरिकता ग्रहण करने के उपरांत भारत में जन्मे अवयस्क बच्चे की भारतीय नागरिकता व पासपोर्ट नवीनीकरण का अधिकार

पक्षकारों का विधिक विवरण:

  • याचिकाकर्ता: 10 वर्षीय बालक (जन्म: 23 जनवरी 2016, सलेम, तमिलनाडु), प्राकृतिक अभिभावक पिता के माध्यम से
  • प्रतिवादी: क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी (RPO), मदुरै; विदेश मंत्रालय (भारत सरकार)
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) — धारा 3(1)(c) (जन्म से नागरिकता), धारा 8 (नागरिकता का औपचारिक परित्याग व अवयस्कों पर प्रभाव) एवं धारा 9(1) (विदेशी नागरिकता ग्रहण करने पर नागरिकता की समाप्ति)
    • पासपोर्ट अधिनियम, 1967 — धारा 5 व धारा 6 (पासपोर्ट नवीनीकरण व इनकार के आधार)
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता व विदेश यात्रा का अधिकार) एवं अनुच्छेद 226 (रिट क्षेत्राधिकार)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • जन्मजात नागरिकता का संरक्षण और विधायी परित्याग की सीमा: ‘धारा 8(2) के तहत अवयस्क बच्चे की नागरिकता केवल तभी समाप्त हो सकती है जब पिता ने धारा 8(1) के तहत नागरिकता का औपचारिक परित्याग किया हो; धारा 9 के तहत पिता द्वारा स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता (UK) ले लेने से भारत में जन्मे बच्चे की धारा 3 के तहत प्राप्त जन्मजात नागरिकता समाप्त नहीं होती।’
  • अंतिम परिणाम: रिट याचिका पूरी तरह स्वीकार; क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, मदुरै को निर्देश दिया गया कि वह बालक के 3 अगस्त 2026 के पासपोर्ट नवीनीकरण आवेदन पर कार्रवाई करे और आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर पासपोर्ट का नवीनीकरण सुनिश्चित करे।

Citizenship Act:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय – मदुरै पीठ (Madurai Bench of Madras High Court)
न्यायाधीशन्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति
याचिकाकर्ता10 वर्षीय बालक (पिता के माध्यम से दायर याचिका)
जन्म विवरण23 जनवरी 2016 (सेलम, तमिलनाडु में जन्म)
संबंधित कानूननागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) की धारा 3(1), धारा 8(2) और धारा 9
मुख्य कानूनी मुद्दाक्या धारा 8(2) के तहत पिता के ब्रिटिश नागरिक बनने पर भारत में जन्मे नाबालिग बच्चे की जन्मजात नागरिकता समाप्त हो जाती है?
अदालत का अंतिम आदेशयाचिका स्वीकार; 3 महीने के भीतर बच्चे का पासपोर्ट नवीनीकृत (Renew) करने का निर्देश।
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