FOLLOW US FOR MORE LEGAL UPDATES ON WhatsApp
मामले की पृष्ठभूमि: क्या था सरकारी आदेश और विवाद?
- 22 अक्टूबर 2026 का सरकारी आदेश (GO):केरल सरकार ने 22 अक्टूबर 2026 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर ‘सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005’ की धारा 24(4) की शक्तियों का उपयोग करते हुए विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) की ‘T1’ और ‘T2’ शाखाओं को RTI के दायरे से बाहर कर दिया। धारा 24(4) राज्य सरकारों को कुछ ‘गुप्तचर और सुरक्षा संगठनों’ (Intelligence and Security Organisations) को RTI से छूट देने का अधिकार देती है।
- याचिकाओं में उठाई गई आपत्तियां:
- भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी पर पर्दा: पूर्व कानूनी सलाहकार पी.के. मुरलीकृष्णन और आरटीआई कार्यकर्ता जॉय केथारथ ने PIL दाखिल कर कहा कि T1 और T2 शाखाएं केवल लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच का काम करती हैं, वे कोई “गुप्तचर या सुरक्षा संगठन” नहीं हैं।
- धारा 24(4) के प्रोवाइजो (Proviso) का उल्लंघन: RTI अधिनियम की धारा 24(4) का पहला प्रावधान स्पष्ट रूप से कहता है कि “भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों से संबंधित जानकारी को RTI से बाहर नहीं रखा जा सकता।” याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पूरे अनुभाग को बाहर करने से यह वैधानिक सुरक्षा बेअसर हो जाती है।
हाईकोर्ट के मुख्य विधिक बिंदु और याचिकाकर्ताओं के तर्क
1. “अपारदर्शिता का अभेद्य पर्दा”:
याचिकाकर्ता मुरलीकृष्णन ने तर्क दिया कि VACB के जन सूचना अधिकारी (PIO) और प्रथम अपीलीय अधिकारी इस सरकारी आदेश का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिससे केरल में भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गोपनीयता का अभेद्य पर्दा खिंच गया है।
2. “सुरक्षा संगठन” का दायरा:
RTI कार्यकर्ता जॉय केथारथ ने दलील दी कि केवल इसलिए कि कोई अनुभाग गोपनीय या संवेदनशील फाइलों से निपटता है, वह स्वतः ही धारा 24(4) के अर्थ के भीतर “इंटेलिजेंस या सुरक्षा संगठन” नहीं बन जाता। यह आदेश निष्कर्ष निकाल चुकी जांचों और प्रशासनिक कार्रवाइयों की जानकारी देने से भी रोकता है, जो कि पूरी तरह से मनमाना और असंगत है।
कोच्चि: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) की धारा 24(4) (राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचना के माध्यम से आसूचना और सुरक्षा संगठनों को RTI के दायरे से छूट देने की शक्ति), धारा 24(4) का प्रथम परंतुक (First Proviso—भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से संबंधित सूचनाओं को किसी भी परिस्थिति में छूट न देने की सांविधिक बाध्यता), भारत का संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (नागरिकों का जानने का मौलिक अधिकार / Right to Know), तथा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) के आंतरिक अनुभागों को ‘सुरक्षा संगठन’ का दर्जा देने की विधिक वैधता पर केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में संज्ञान लिया है।
केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन (Chief Justice Soumen Sen) और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. (Justice Syam Kumar VM) की खंडपीठ ने केरल सरकार द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशित उस विवादित सरकारी आदेश (Government Order – GO) को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं (PILs) पर राज्य सरकार को औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसके तहत VACB के ‘T1’ और ‘T2’ अनुभागों को RTI कानून से पूर्ण छूट प्रदान कर दी गई है।
खंडपीठ ने राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा है कि वह स्थिति स्पष्ट करे कि क्या इस छूट में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ चल रही सतर्कता जांचों और इंक्वायरी से संबंधित जानकारी भी शामिल होगी। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर विवादित सरकारी आदेश के क्रियान्वयन पर कोई अंतरिम रोक (No Interim Stay) लगाने से इनकार कर दिया और मामले की विस्तृत सुनवाई 18 नवंबर 2026 को तय की है।
उच्च न्यायालय के समक्ष मुख्य कानूनी प्रश्न एवं अदालती रुख
1. सतर्कता जांचों की पहुंच पर खंडपीठ की स्पष्टता की मांग:
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन की अगुवाई वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए विशेष रूप से यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया:“राज्य सरकार यह स्पष्ट करे कि क्या सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) के ‘T1’ और ‘T2’ अनुभागों को RTI अधिनियम के दायरे से बाहर रखने के निर्णय में लोक सेवकों/अधिकारियों के विरुद्ध सतर्कता जांच (Vigilance Inquiries) से संबंधित जानकारी भी शामिल है या नहीं।”
2. अंतरिम रोक लगाने से इनकार:
- याचिकाकर्ताओं ने सरकारी आदेश पर तत्काल अंतरिम स्थगन (Interim Stay) की मांग की थी, ताकि लोक सूचना अधिकारी (PIOs) भ्रष्टाचार से संबंधित आवेदनों को एकमुश्त खारिज न करने लगें।
- हालांकि, खंडपीठ ने प्रारंभिक स्तर पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई और सरकार को अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का अवसर दिया।
याचिकाकर्ताओं (पी.के. मुरलीकृष्णन व जॉय कैथारथ) के मुख्य विधिक तर्क
याचिकाकर्ताओं—जिनमें केरल VACB के पूर्व विधिक सलाहकार अधिवक्ता पी.के. मुरलीकृष्णन तथा प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता जॉय कैथारथ शामिल हैं—ने सरकारी आदेश को मनमाना, गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताते हुए निम्नलिखित आधार प्रस्तुत किए:
1. धारा 24(4) के पहले परंतुक (First Proviso) का उल्लंघन:
- RTI अधिनियम की धारा 24(4) राज्य सरकार को खुफिया संगठनों को छूट देने की शक्ति देती है, किंतु इसका पहला परंतुक स्पष्ट रूप से यह अधिदेश देता है:“बशर्ते कि भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों से संबंधित सूचना इस उपधारा के अधीन विवर्जित नहीं की जाएगी (Information pertaining to allegations of corruption and human rights violations shall not be excluded)।”
- याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि चूंकि T1 और T2 अनुभागों का पूरा कार्य ही लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों का सत्यापन, प्राथमिक जांच और अभियोजन करना है, अतः इन्हें पूरी तरह छूट देने वाला आदेश सीधे कानून के सांविधिक प्रावधान और परंतुक को निरस्त (Nullify) करता है।
2. संवेदनशील जानकारी संभालना ‘सुरक्षा एजेंसी’ होने का प्रमाण नहीं:
- जॉय कैथारथ ने दलील दी कि केवल इसलिए कि कोई प्रशासनिक विंग गोपनीय या संवेदनशील दस्तावेज (Confidential or Sensitive Material) संभालती है, वह अपने आप में धारा 24(4) के तहत ‘आसूचना या सुरक्षा संगठन’ (Intelligence and Security Organisation) नहीं बन जाती।
3. ‘गोपनीयता का अभेद्य आवरण’:
- अधिवक्ता पी.के. मुरलीकृष्णन ने याचिका में रेखांकित किया कि सरकारी आदेश जारी होते ही VACB के लोक सूचना अधिकारी (PIOs) और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी इसका दुरुपयोग करने लगे हैं:“यह आदेश केरल में भ्रष्टाचार-विरोधी प्रशासनिक तंत्र के ऊपर ‘गोपनीयता का एक अभेद्य पर्दा’ (Impenetrable Veil of Secrecy) खड़ा कर रहा है। केवल यह लिख देना कि यह आदेश ‘परंतुकों के अधीन’ है, पीआईओ को मनमाने ढंग से आवेदनों को खारिज करने की खुली छूट देता है।”
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक विवरण
| चरण / संदर्भ | तथ्यात्मक स्थिति एवं विधिक विवरण |
|---|---|
| आक्षेपित सरकारी आदेश | केरल सरकार द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को केरल राजपत्र (Kerala Gazette) में प्रकाशित शासकीय आदेश (GO)। |
| लागू विधिक प्रावधान | सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24(4)। |
| छूट प्राप्त विंग्स | सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) के ‘T1’ और ‘T2’ अनुभाग। |
| याचिकाकर्तागण | 1. एडवोकेट पी.के. मुरलीकृष्णन — केरल सतर्कता ब्यूरो (VACB) के पूर्व विधिक सलाहकार (Legal Advisor)। 2. जॉय कैथारथ — जाने-माने भ्रष्टाचार विरोधी और आरटीआई कार्यकर्ता। |
| प्रतिवादी पक्ष | केरल राज्य (कार्मिक व गृह विभाग) एवं सतर्कता व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB)। |
| मुख्य प्रार्थनाएं | 1. 22 अक्टूबर 2026 के विवादित GO को असंवैधानिक और अधिकार-विहीन (Ultra Vires) घोषित कर रद्द किया जाए। 2. घोषित किया जाए कि T1 और T2 अनुभाग धारा 24(4) के तहत आसूचना या सुरक्षा संगठन नहीं हैं। 3. वैकल्पिक रूप से, यह आदेश लोक सेवकों के खिलाफ शिकायतों की प्राप्ति, सत्यापन, जांच, क्लोजर रिपोर्ट या जांच के परिणामों पर लागू न हो। |
| हाईकोर्ट का अंतरिम कदम | राज्य सरकार को नोटिस जारी; अंतरिम रोक लगाने से इनकार; स्पष्टीकरण तलब। |
| आगामी निर्णायक सुनवाई | 18 नवंबर 2026। |
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: ‘RTI की धारा 24(4) और जानने का अधिकार’
- ‘आसूचना व सुरक्षा संगठन’ बनाम भ्रष्टाचार जांच एजेंसी:
- दिल्ली हाईकोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट ने कई पूर्ववर्ती निर्णयों में यह व्यवस्था दी है कि केवल ‘जांच’ करने वाली एजेंसियां (जैसे CBI या राज्य विजिलेंस) अपने सामान्य भ्रष्टाचार निवारण कार्यों के लिए धारा 24 के तहत पूर्ण छूट (Blanket Exemption) का दावा नहीं कर सकतीं।
- धारा 24 की मंशा रॉ (R&AW), आईबी (IB) और सैन्य खुफिया शाखाओं जैसी विशुद्ध सुरक्षा संस्थाओं को रणनीतिक गोपनीयता प्रदान करना था, न कि घूसखोरी और आय से अधिक संपत्ति की जांच करने वाले विभागों को सार्वजनिक जवाबदेही से बचाना।
- धारा 24(4) का अनिवार्य परंतुक (Non-derogable Nature):
- संसद ने धारा 24 के तहत छूट देने की शक्ति पर ‘भ्रष्टाचार’ और ‘मानवाधिकार उल्लंघन’ का स्पष्ट अपवाद लगाया है। यदि किसी संगठन को छूट दी भी जाती है, तब भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सूचना देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
- जब कोई सरकारी आदेश सतर्कता ब्यूरो के मुख्य जांच अनुभागों को ही पूरी तरह बाहर कर देता है, तो वह उस मूल वैधानिक परंतुक को ही निष्प्रभावी करने का प्रयास करता है, जिसकी विधिक वैधता अब केरल हाईकोर्ट की कसौटी पर है।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- न्यायालय: केरल उच्च न्यायालय (मूल जनहित रिट क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: एडवोकेट पी.के. मुरलीकृष्णन बनाम केरल राज्य व अन्य [W.P.(C) No. … / 2026] एवं संबद्ध जनहित याचिका (जॉय कैथारथ बनाम केरल राज्य)
- पीठ: मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन एवं न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 28 अक्टूबर 2026
- आगामी निर्णायक सुनवाई: 18 नवंबर 2026
विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता (एडवोकेट पी.के. मुरलीकृष्णन) की ओर से: अधिवक्ता अमित कृष्णन एच. (Amith Krishnan H), साथ में अधिवक्ता अन्ना मैरी मैथ्यू, मानवी मुरलीधरन एवं काव्या पी.।
- याचिकाकर्ता (जॉय कैथारथ) की ओर से: अधिवक्ता जोस अब्राहम (Advocate Jose Abraham), साथ में अधिवक्ता मुरलीधरन आर., सेबेस्टियन जोसेफ, बेसिल जैसन एवं दीपा जोसेफ।
- केरल राज्य व सतर्कता विभाग की ओर से: राज्य के वरिष्ठ शासकीय अधिवक्ता (Senior Government Pleader)।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) — धारा 24(4) (राज्य आसूचना और सुरक्षा संगठनों को छूट देने की शक्ति) एवं धारा 24(4) का प्रथम परंतुक (भ्रष्टाचार और मानवाधिकार हनन की सूचनाओं का अनिवार्य प्रकटीकरण)
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति तथा सूचना पाने की स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 226
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act) — लोक सेवकों के विरुद्ध अपराधों की जांच
- केरल सरकारी आदेश (GO) दिनांक 22 अक्टूबर 2026 — VACB के T1 व T2 अनुभागों का बहिष्करण
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र और सूचना की स्वतंत्रता का विधिक मानक: ‘राज्य सरकार द्वारा RTI कानून की धारा 24(4) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग मनमाने ढंग से भ्रष्टाचार निवारण जांचों को छुपाने के लिए नहीं किया जा सकता; धारा 24 का पहला परंतुक एक सांविधिक अधिदेश है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जानकारी बाहर नहीं की जा सकती; किसी जांच अनुभाग को मात्र गोपनीय फाइलें संभालने के आधार पर सुरक्षा संगठन का दर्जा देकर जनता से सूचना छिपाना न्यायिक समीक्षा का विषय है।’
- वर्तमान स्थिति: केरल उच्च न्यायालय ने 22 अक्टूबर 2026 के सरकारी आदेश पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है, किंतु राज्य सरकार से इस गंभीर प्रश्न पर 18 नवंबर 2026 तक औपचारिक जवाब तलब किया है कि क्या यह छूट भ्रष्ट लोक सेवकों के विरुद्ध सतर्कता जांचों के विवरण को भी जनता से छिपाने के लिए लागू होगी।
Vigilance Raid: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court), कोच्चि |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन एवं न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. |
| मामला/साइटेशन | एडवोकेट पी.के. मुरलीकृष्णन व अन्य बनाम केरल राज्य व अन्य (Adv PK Muralikrishnan v. State of Kerala & Ors.) |
| याचिकाकर्ता | 1. एडवोकेट पी.के. मुरलीकृष्णन (पूर्व कानूनी सलाहकार, VACB) | प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता अमित कृष्णन एच. 2. जॉय केथारथ (RTI कार्यकर्ता) | प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता जोस अब्राहम |
| विवादित आदेश | 22 अक्टूबर 2026 का सरकारी आदेश (GO), जिसके तहत RTI की धारा 24(4) का हवाला देकर VACB के ‘T1’ और ‘T2’ सेक्शन को RTI से छूट दी गई। |
| मुख्य तर्क | भ्रष्टाचारी अधिकारियों के खिलाफ जांच और शिकायतों से जुड़ी जानकारी छुपाने के लिए यह अवैध कदम उठाया गया है, जो धारा 24(4) के प्रावधानों का उल्लंघन है। |
| अदालत का फैसला | नोटिस जारी; राज्य सरकार से स्पष्टीकरण तलब; स्टे देने से इंकार। अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026। |

