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मामले की पृष्ठभूमि: क्या था विवाद और वीसी की घटना?
- भूमि वर्गीकरण रिकॉर्ड में सुधार का विवाद:जी.एस.बी. कंस्ट्रक्शन ने अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया कि स्थानीय प्राधिकारी मास्टर प्लान के अनुसार भूमि उपयोग रिकॉर्ड में सुधार करने के अदालती निर्देशों का पालन करने में विफल रहे हैं। याचिकाकर्ता की भूमि मास्टर प्लान के तहत ‘आवासीय’ है, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में इसे ‘औद्योगिक’ दिखाया जा रहा था।
- अनुपालन रिपोर्ट दाखिल न करना और वीसी आदेश:हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को अमित कुमार गभिए को अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया था, जिसमें विफल रहने पर उन्हें अदालत के समक्ष व्यक्तिगत या ऑनलाइन पेश होने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई के दौरान जब मामला आया, तो अधिकारी वीसी के जरिए अपने बिस्तर पर अनुचित कपड़ों (अंडरपैंट व शर्ट के बटन बंद करते हुए) में उपस्थित पाए गए।
- अदालत का प्रशासनिक रुख:पीठ ने प्राधिकारियों द्वारा भूमि सुधार के आवेदन को ‘रिकॉर्ड सुधार’ के बजाय ‘भूमि उपयोग परिवर्तन’ (Land Use Change) की नई अर्जी की तरह निपटाने को खारिज करते हुए कहा: “याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर पारित आदेश केवल एक आंख में धूल झोंकने (Eyewash) जैसा है।”
हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और निर्देश
1. “वर्चुअल सुनवाई में कोर्ट डेकोरम का पालन अनिवार्य”:
अदालत ने स्पष्ट किया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि कोई अधिकारी या पक्षकार अदालत की गरिमा और औपचारिक पोशाक के नियमों को दरकिनार कर दे। पीठ ने राज्य के उप महाधिवक्ता (Deputy AG) स्वप्निल गांगुली के आश्वासन के बाद राज्य सरकार को अधिकारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए।
2. भूमि रिकॉर्ड सुधार प्रक्रिया का निर्देश:
- हाईकोर्ट ने जी.एस.बी. कंस्ट्रक्शन को आदेश दिया कि वह ALPASS (Automated Layout Process Approval and Scrutiny System) पोर्टल के माध्यम से अपना ऑनलाइन आवेदन जमा करे।
- अधिकारी अमित कुमार गभिए को निर्देश दिया गया कि वे 7 दिनों के भीतर इस आवेदन को अपलोड और स्वीकार कराने की सुविधा प्रदान करें तथा संबंधित प्राधिकरण को इसे 4 सप्ताह के भीतर अंतिम रूप से तय करने का आदेश दिया।
जबलपुर (मध्य प्रदेश): भारत का संविधान के अनुच्छेद 215 (अभिलेख न्यायालय के रूप में उच्च न्यायालय की अवमानना हेतु दंडित करने की शक्तियां), अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) की धारा 2(c) (आपराधिक अवमानना—अदालती प्राधिकार को कम करना व न्यायिक गरिमा को ठेस पहुंचाना), उच्च न्यायालयों द्वारा अधिसूचित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम (Video Conferencing Rules for Courts) के अंतर्गत शिष्टाचार व पोशाक संहिता (Courtroom Decorum & Dress Code), तथा नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम के तहत भूमि उपयोग अभिलेखों के लिपिकीय सुधार के विधिक मानकों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अत्यंत तल्ख और अनुशासनात्मक आदेश पारित किया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक खोत (Justice Deepak Khot) की एकल पीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान भोपाल स्थित नगर एवं ग्राम निवेश (Directorate of Town and Country Planning) के संयुक्त निदेशक अमित कुमार गजभिए (Amit Kumar Gajbhiye) के अशोभनीय आचरण पर कड़ा ऐतराज जताया। अधिकारी अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने बिस्तर पर बैठकर, केवल अंडरपैंट पहने हुए और शर्ट के बटन लगाते हुए उपस्थित हुए थे।
न्यायालय ने इस आचरण को न केवल गंभीर सेवा कदाचार (Gross Misconduct) माना, बल्कि इसे प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) करार देते हुए मध्य प्रदेश सरकार को अधिकारी के विरुद्ध तत्काल विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने गजभिए को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है कि उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना की औपचारिक कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
उच्च न्यायालय की तीखी विधिक टिप्पणियां: ‘बिस्तर से अधोवस्त्रों में पेशी अवमाननाजनक’
न्यायमूर्ति दीपक खोत ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान अधिकारी की दृश्य उपस्थिति को आधिकारिक न्यायिक आदेश में दर्ज करते हुए कड़े शब्दों में निंदा की:
1. ‘अदालत कक्ष की गरिमा और आचरण का खुला उल्लंघन’:
पीठ ने अधिकारी के आचरण को अपने आदेश में रेखांकित करते हुए कहा: “प्रतिवादी (गजभिए) सुबह के सत्र में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने बिस्तर से, केवल अंडरपैंट (Underpant) में और अपनी शर्ट के बटन बंद करते हुए पेश हुए। प्रतिवादी-अवमाननाकर्ता का यह आचरण अदालत की गरिमा (Court Decorum) के कतई अनुकूल नहीं है और पूरी तरह अवमाननाजनक है। इसलिए यह न्यायालय यह दर्ज करने के लिए विवश है कि प्रतिवादी-अवमाननाकर्ता गंभीर कदाचार (Misconduct) का दोषी है और उसने इस अदालत की आपराधिक अवमानना की है।”
2. राज्य सरकार को 4 सप्ताह में अनुशासनात्मक कार्रवाई रिपोर्ट देने का आदेश:
- अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह संबंधित अधिकारी के इस गैर-जिम्मेदाराना कृत्य के विरुद्ध तत्काल विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करे और 4 सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) अदालत में प्रस्तुत करे।
- राज्य की ओर से पेश उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे इस विषय को शासन के वरिष्ठतम प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे ताकि अधिकारी के विरुद्ध उचित और सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
3. भूमि रिकॉर्ड सुधार पर प्रशासनिक रवैये को बताया “महज दिखावा” (Eyewash):
- अवमानना के मुख्य मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता फर्म (जीएसबी कंस्ट्रक्शन) की जमीन मास्टर प्लान के तहत ‘आवासीय’ थी, किंतु सरकारी रिकॉर्ड में लिपिकीय त्रुटि के कारण उसे ‘औद्योगिक’ दर्शाया गया था।
- जबलपुर के संयुक्त निदेशक द्वारा 3 अक्टूबर 2025 को ही त्रुटि सुधारने की अनुशंसा भोपाल भेजी जा चुकी थी, किंतु भोपाल निदेशालय ने इसे अभिलेख सुधार (Correction of Records) मानने के बजाय ‘भूमि उपयोग परिवर्तन’ (Change in Land Use) की नई अर्जी मानकर पल्ला झाड़ लिया।
- अदालत ने तल्ख टिप्पणी की: “याचिकाकर्ता के प्रत्यावेदन पर पारित किया गया प्रशासनिक आदेश महज एक दिखावा (Merely an Eyewash) है।”
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम
| चरण / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
|---|---|
| याचिकाकर्ता | जीएसबी कंस्ट्रक्शन (GSB Construction) — निजी निर्माण एवं रियल एस्टेट फर्म। |
| प्रतिवादी / अवमाननाकर्ता | अमित कुमार गजभिए — संयुक्त निदेशक (Joint Director), नगर तथा ग्राम निवेश (Town and Country Planning), भोपाल, मध्य प्रदेश। |
| विवाद की पृष्ठभूमि | मास्टर प्लान में आवासीय के रूप में अधिसूचित भूमि को राजस्व/टाउन प्लानिंग रिकॉर्ड में ‘औद्योगिक’ दर्ज किया गया था। जबलपुर कार्यालय द्वारा सुधार की अनुशंसा भेजे जाने के बावजूद भोपाल निदेशालय ने त्रुटि सुधारने के अदालती निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद फर्म ने अवमानना याचिका दाखिल की। |
| 9 अक्टूबर 2026 का अदालती आदेश | हाईकोर्ट ने संयुक्त निदेशक गजभिए को निर्देश दिया था कि वे अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें, अन्यथा अगली तारीख पर अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों। |
| 27 अक्टूबर 2026 का घटनाक्रम | अधिकारी वीसी के माध्यम से बिस्तर पर बैठकर, अधोवस्त्रों में बटन लगाते हुए पेश हुए; अदालत ने इसे न्यायिक मर्यादा का घोर उल्लंघन माना। |
| भूमि उपयोग पर अंतरिम निर्देश | याचिकाकर्ता को ALPASS (Automated Layout Process Approval and Scrutiny System) पोर्टल पर सुधार अर्जी अपलोड करने का निर्देश दिया गया; गजभिए को 7 दिन में प्रक्रिया सुगम बनाने और प्राधिकारी को 4 सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया गया। |
| आगामी तारीख | अनुशासनात्मक कार्रवाई रिपोर्ट व अवमानना जवाब हेतु मामला 30 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध। |
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: ‘वर्चुअल कोर्टरूम शिष्टाचार और आपराधिक अवमानना’
- वर्चुअल प्लेटफॉर्म भौतिक अदालत का ही विधिक विस्तार है:
- सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों द्वारा अधिसूचित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों के अनुसार, वर्चुअल प्लेटफॉर्म किसी अनौपचारिक संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह खुली अदालत (Open Court) का ही एक डिजिटल विस्तार है।
- किसी भी पक्षकार, वकील या विशेष रूप से वरिष्ठ सरकारी अधिकारी द्वारा अनौपचारिक, अशोभनीय या अर्द्धनग्न अवस्था में कैमरे के सामने आना न्यायालय के प्राधिकार को कम करने और न्यायिक गरिमा को नीचा दिखाने (Lowering the Authority and Dignity of the Court) की श्रेणी में आता है, जो अदालत की अवमानना अधिनियम की धारा 2(c) के तहत आपराधिक अवमानना का सीधा आधार बनता है।
- लोक सेवकों के आचरण नियम (Civil Services Conduct Rules):
- प्रशासनिक सेवा नियमों के तहत प्रत्येक लोक सेवक का यह वैधानिक कर्तव्य है कि वह संवैधानिक संस्थाओं और अदालतों के समक्ष उपस्थित होते समय पूर्ण रूप से पेशेवर गरिमा, शालीनता और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करे। सरकारी अधिकारी द्वारा इस प्रकार की अनुशासनहीनता प्रदर्शित करना गंभीर कदाचार की परिधि में आता है।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- न्यायालय: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर पीठ)
- केस संदर्भ: जीएसबी कंस्ट्रक्शन बनाम अमित कुमार गजभिए [Contempt Petition (Civil) No. … / 2026]
- पीठासीन न्यायाधीश: न्यायमूर्ति दीपक खोत (एकल पीठ)
- आदेश की तिथि: 27 अक्टूबर 2026
- आगामी निर्णायक सुनवाई: 30 नवंबर 2026
विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता (जीएसबी कंस्ट्रक्शन) की ओर से: अधिवक्ता साकेत उपाध्याय (Advocate Saket Upadhyay) एवं अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय (Advocate Dinesh Kumar Upadhyay)।
- प्रतिवादी राज्य सरकार की ओर से: उप महाधिवक्ता (Deputy Advocate General) स्वप्निल गांगुली (Swapnil Ganguly) एवं अधिवक्ता आकाश मालपानी (Advocate Akash Malpani)।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 215 (अभिलेख न्यायालय के रूप में उच्च न्यायालय की अवमानना शक्तियां)
- अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 — धारा 2(c) (आपराधिक अवमानना) एवं धारा 12 (दंड)
- मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) नियम — अदालत कक्षीय गरिमा, शिष्टाचार और औपचारिक पोशाक संहिता संबंधी प्रावधान
- मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम — शासकीय सेवकों द्वारा प्रदर्शित किया जाने वाला कर्तव्यनिष्ठ आचरण
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- वर्चुअल कोर्टरूम शिष्टाचार और लोक सेवकों का विधिक मानक: ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायिक कार्यवाही में उपस्थित होना भौतिक अदालत कक्ष में खड़े होने के समतुल्य है; किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का अपने बिस्तर से अधोवस्त्रों में उपस्थित होना न्यायालय की गरिमा का घोर उल्लंघन और गंभीर कदाचार है; ऐसा आचरण अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत आपराधिक अवमानना को आकर्षित करता है जिसके लिए विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई और अदालती दंड दोनों लागू किए जा सकते हैं।’
- वर्तमान स्थिति व अनुपालन निर्देश: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अधिकारी के आचरण को आपराधिक अवमानना मानकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है; राज्य सरकार को गजभिए के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर 4 सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है; भूमि रिकॉर्ड सुधार हेतु ALPASS पोर्टल पर प्रक्रिया सुगम बनाने के निर्देश के साथ मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को नियत की गई है।
Court Appearing: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court), जबलपुर |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति दीपक खोत (Justice Deepak Khot) |
| मामला/साइटेशन | मेसर्स जी.एस.बी. कंस्ट्रक्शन बनाम अमित कुमार गभिए (M/s G.S.B. Construction v. Shri Amit Kumar Gajbhiye) |
| याचिकाकर्ता | जी.एस.बी. कंस्ट्रक्शन (GSB Construction) | प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता साकेत उपाध्याय एवं दिनेश कुमार उपाध्याय |
| प्रतिवादी/राज्य | अमित कुमार गभिए (संयुक्त निदेशक, नगर एवं ग्राम निवेश, भोपाल) | प्रतिनिधित्व: उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली एवं अधिवक्ता आकाश मालपानी |
| मूल विवाद | 1. अवमानना आचरण: वीसी सुनवाई में बिना उचित पोशाक/अंडरपैंट में बिस्तर से उपस्थित होना। 2. भूमि रिकॉर्ड सुधार: मास्टर प्लान में आवासीय होने के बावजूद रिकॉर्ड में औद्योगिक दर्ज भूमि के नक्शे और वर्गीकरण को ठीक न करना। |
| अदालत का आदेश | 1. विभागीय कार्रवाई: राज्य सरकार को 4 हफ्ते में अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रिपोर्ट देने का निर्देश। 2. आपराधिक अवमानना नोटिस: अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी। 3. ALPASS पोर्टल निर्देश: 7 दिनों में आवेदन अपलोड कराकर 4 हफ्ते में भूमि रिकॉर्ड का फैसला करने का आदेश। |

