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मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?
- ‘EVM हटाओ देश बचाओ’ आंदोलन और खाते का निलंबन:अधिवक्ता महमूद प्राचा और उनके संगठन ने देश में चुनाव प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर पुनः बैलेट पेपर (कागजी मतपत्र) व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर “ब्रिंग बैक बैलेट – EVM हटाओ देश बचाओ” अभियान शुरू किया था। 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन प्रस्तावित था।
- बिना नोटिस और कारण बताए प्रतिबंध:याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन वाले दिन ही अचानक उनके 40,000 से अधिक फॉलोअर्स वाले आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया। अकाउंट खोलने पर केवल यह संदेश दिखाई दे रहा था: “Account not available in India. This is because we complied with a legal request to restrict this content.” (यह खाता भारत में उपलब्ध नहीं है क्योंकि हमने इस सामग्री को सीमित करने के कानूनी अनुरोध का अनुपालन किया है)।
हाईकोर्ट के मुख्य विधिक बिंदु और याचिकाकर्ताओं के तर्क
1. “प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों की अनदेखी”:
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि आईटी अधिनियम और ‘ब्लॉकिंग रूल्स’ (Rule 8 of Information Technology Rules) के तहत निर्धारित अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। खाते को ब्लॉक करने से पहले न तो कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया, न ही पक्ष रखने का अवसर दिया गया और न ही ब्लॉक करने के लिखित आदेश की कोई प्रति सौंपी गई।
2. संवैधानिक अधिकारों पर आघात:
- याचिका में कहा गया है कि किसी अज्ञात या अघोषित नीति/निर्देश के तहत सोशल मीडिया खातों पर प्रतिबंध लगाना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्राप्त वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकारों का हनन है।
- याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह इंस्टाग्राम अकाउंट केवल जागरूकता अभियानों, वीडियो, पोस्टरों और नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध के लिए लामबंद करने का माध्यम था।
नई दिल्ली: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) की धारा 69A (कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से सूचना को जनता की पहुंच से अवरुद्ध/ब्लॉक करने की केंद्र सरकार की शक्तियां), सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना की पहुंच को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 (Blocking Rules, 2009), भारत का संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 19(1)(b) (बिना हथियारों के शांतिपूर्ण सभा करने का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(c) (संगम या संघ बनाने का अधिकार), तथा सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) में निर्धारित प्राकृतिक न्याय के अनिवार्य विधिक मानकों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और सोशल मीडिया दिग्गज मेटा से जवाब तलब किया है।
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अमित महाजन (Justice Amit Mahajan) की एकल पीठ ने अधिवक्ता महमूद प्राचा (Advocate Mehmood Pracha) और उनके संगठन ‘मिशन सेव कॉन्स्टिट्यूशन’ (Mission Save Constitution) द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. (Meta Platforms) को औपचारिक नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ताओं ने अपने 40,000 से अधिक फॉलोअर्स वाले इंस्टाग्राम हैंडल “@bring_back__ballot” को 10 अक्टूबर 2026 को भारत में अचानक ब्लॉक किए जाने को चुनौती दी है। पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र समीक्षा का संकेत दिया और अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को तय की है।
याचिकाकर्ता (महमूद प्राचा व मिशन सेव कॉन्स्टिट्यूशन) के मुख्य विधिक तर्क
याचिका में सोशल मीडिया सेंसरशिप, प्रशासनिक मनमानी और विरोध प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन को लेकर कड़े संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं:
1. ‘कानूनी अनुरोध’ (Legal Request) का अस्पष्ट संदेश:
- याचिका में बताया गया कि 10 अक्टूबर 2026 को जब संगठन का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन निर्धारित था (जिसकी पूर्व सूचना दिल्ली पुलिस को 10 सितंबर 2026 को ही दे दी गई थी), उसी दिन अकाउंट खोलने पर यह संदेश प्रदर्शित होने लगा: “Account not available in India. This is because we complied with a legal request to restrict this content.” (यह खाता भारत में उपलब्ध नहीं है क्योंकि हमने इस सामग्री को प्रतिबंधित करने के एक कानूनी अनुरोध का अनुपालन किया है)।
- याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस संदेश में न तो यह स्पष्ट किया गया कि आदेश किस प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया था, न संबंधित विवादित पोस्ट का विवरण दिया गया और न ही इस प्रतिबंध को चुनौती देने का कोई विधिक विकल्प दिया गया।
2. लोकतांत्रिक अभियानों की आवाज़ दबाने का आरोप:
- याचिका में कहा गया कि यह हैंडल चुनाव सुधारों, मतपत्र (Paper Ballot) की वापसी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के लिए सितंबर 2026 में शुरू किया गया था।
- इस पर पोस्टर, वीडियो और विश्लेषणात्मक सामग्री प्रकाशित की जाती थी। किसी विशिष्ट आपत्तिजनक पोस्ट को हटाने (Targeted Takedown) के बजाय 40,000+ फॉलोअर्स वाले पूरे खाते को ही एकतरफा बंद कर देना आनुपातिकता के सिद्धांत (Doctrine of Proportionality) का खुला उल्लंघन है।
3. अघोषित नीतियों द्वारा मौलिक अधिकारों पर अंकुश वर्जित:
- याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और 19(1)(c) के तहत प्रदत्त वाक्, सभा और संगठन की स्वतंत्रता पर केवल अनुच्छेद 19(2) के संकीर्ण दायरों के भीतर ‘कानून द्वारा’ ही युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
- किसी गुप्त या अघोषित कार्यकारी नीति (Undisclosed Policy/Executive Fiat) के तहत बिना सार्वजनिक कारण दर्ज किए अकाउंट को प्रतिबंधित करना अवैध है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2026)
| चरण / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| याचिकाकर्ता | 1. मिशन सेव कॉन्स्टिट्यूशन (Mission Save Constitution) — सामाजिक एवं विधिक संगठन। 2. अधिवक्ता महमूद प्राचा — राष्ट्रीय संयोजक। |
| प्रतिवादी पक्ष | 1. भारत संघ (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय / MeitY तथा गृह मंत्रालय)। 2. डिजिग्नेटेड ऑफिसर (धारा 69A IT Act)। 3. मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. (Meta Platforms Inc.)। |
| विवादित सोशल मीडिया हैंडल | इंस्टाग्राम अकाउंट: @bring_back__ballot (40,000+ फॉलोअर्स)। |
| प्रतिबंध की तिथि | 10 अक्टूबर 2026 (जंतर-मंतर पर ‘EVM हटाओ देश बचाओ’ आंदोलन के दिन)। |
| प्रक्रियात्मक खामी का आरोप | आईटी नियम, 2009 के नियम 8 व 9 के तहत अनिवार्य पूर्व-सुनवाई और लिखित आदेश का अभाव। |
| हाईकोर्ट की कार्यवाही (28 अक्टूबर 2026) | न्यायमूर्ति अमित महाजन ने केंद्र व मेटा को नोटिस जारी किया; नोटिस स्वीकार किए गए; अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को तय। |
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: ‘आईटी अधिनियम की धारा 69A और श्रेया सिंघल नजीर’
- ‘श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ’ [(2015) 5 SCC 1] का सुरक्षा कवच:
- सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 69A की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया था कि किसी भी डिजिटल सामग्री या खाते को ब्लॉक करते समय ‘कारण दर्ज करना’ (Recording of Reasons in Writing) और जहां संभव हो, संबंधित सामग्री के निर्माता को नोटिस व सुनवाई देना एक अनिवार्य पूर्व-शर्त है।
- यदि केंद्र सरकार या उसकी नामित समिति बिना लिखित कारण दर्ज किए या बिना सुनवाई का अवसर दिए आदेश पारित करती है, तो वह कार्रवाई मनमानी और असंवैधानिक हो जाती है।
- पूर्ण खाता प्रतिबंध बनाम सामग्री-विशिष्ट प्रतिबंध (Account Ban vs URL Blocking):
- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ट्विटर (एक्स कॉर्प) बनाम भारत संघ (2023) मामले में रेखांकित किया था कि पूरे अकाउंट को बंद कर देना किसी नागरिक की भविष्य की अभिव्यक्ति को पूरी तरह से मूक करने (Prior Restraint) जैसा है।
- सरकार को यह सिद्ध करना होता है कि पूरे अकाउंट की प्रत्येक गतिविधि भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा है; अन्यथा संपूर्ण अकाउंट बंद करना आनुपातिकता की परीक्षा में विफल हो जाता है।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- न्यायालय: दिल्ली उच्च न्यायालय (मूल रिट क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: मिशन सेव कॉन्स्टिट्यूशन व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य [W.P.(C) / दिल्ली हाईकोर्ट]
- पीठासीन न्यायाधीश: न्यायमूर्ति अमित महाजन (एकल पीठ)
- आदेश की तिथि: 28 अक्टूबर 2026
- आगामी निर्णायक सुनवाई: 6 नवंबर 2026
- याचिका दायरकर्ता अधिवक्ता: अधिवक्ता निखिल गुलियानी (Nikhil Guliani)
विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ताओं की ओर से: अधिवक्ता महमूद प्राचा (व्यक्तिगत रूप से उपस्थित), साथ में अधिवक्ता सनावर चौधरी, कुमैल, विशाल एवं अदील।
- भारत संघ (MeitY/गृह मंत्रालय) की ओर से: केंद्र सरकार के स्थायी वकील आशीष दीक्षित (Standing Counsel Ashish Dixit)।
- मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. (Instagram) की ओर से: अधिवक्ता अमी राणा (Advocate Amee Rana)।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) — धारा 69A (सूचना को अवरुद्ध करने की शक्तियां) एवं धारा 79 (मध्यवर्ती का सुरक्षित बंदरगाह / Safe Harbour)
- सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना की पहुंच को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 — नियम 7, 8, 9 एवं 14 (समीक्षा समिति)
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b), 19(1)(c) (वाक्, सभा और संगम की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 14 (समानता/गैर-मनमानापन), एवं अनुच्छेद 226
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- डिजिटल सामग्री अवरुद्ध करने और नागरिक अधिकारों का विधिक मानक: ‘सोशल मीडिया पर किसी नागरिक या संगठन के पूरे अकाउंट को बिना पूर्व नोटिस, बिना सुनवाई और बिना कारण दर्ज किए गए आदेश के ब्लॉक करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है; कानून के शासन में राज्य या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गुप्त कार्यकारी अनुरोधों के आधार पर नागरिकों के लोकतांत्रिक संवाद के मंच को एकतरफा समाप्त नहीं कर सकते।’
- वर्तमान स्थिति: दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और मेटा को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है; 6 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या ‘ब्रिंग बैक बैलेट’ हैंडल पर लगी पाबंदी को अंतरिम रूप से हटाया जाएगा।
Instagram Close:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति अमित महाजन (Justice Amit Mahajan) |
| याचिकाकर्ता | 1. ‘मिशन सेव कॉन्स्टिट्यूशन’ (Mission Save Constitution) 2. अधिवक्ता महमूद प्राचा (राष्ट्रीय संयोजक) | स्व-उपस्थित एवं प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता सनावर, कुमैल, विशाल और अदील |
| प्रतिवादी | 1. केंद्र सरकार (MHA, MeitY एवं नोडल अधिकारी) | प्रतिनिधित्व: सीजीएससी आशीष दीक्षित 2. मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक (Meta Platforms) | प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता अमी राणा |
| मूल विवाद | 10 अक्टूबर 2026 को जन्तर-मन्तर पर विरोध प्रदर्शन वाले दिन 40,000+ फॉलोअर्स वाले इंस्टाग्राम अकाउंट को बिना कारण बताए ब्लॉक किया जाना। |
| संवैधानिक चुनौती | संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), 19(1)(b) (शांतिपूर्ण सभा) और 19(1)(c) (संघ बनाने का अधिकार) का उल्लंघन। |
| अदालत का आदेश | नोटिस जारी; केंद्र और मेटा को जवाब दाखिल करने का निर्देश। अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026। |

