Friday, August 21, 2026
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Delhi HC: रामदेव किसी के नियंत्रण में नहीं हैं, वे अपनी ही दुनिया में रहते हैं…हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

Delhi HC: दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित बंसल ने कहा, रामदेव किसी के नियंत्रण में नहीं हैं, वे अपनी ही दुनिया में रहते हैं।

वीडियो को 24 घंटे के भीतर सभी प्लेटफॉर्म से हटा लें

अदालत ने योग गुरु रामदेव को आदेश दिया है कि वे हमदर्द कंपनी और उसके उत्पाद रूह अफजा के खिलाफ सोशल मीडिया पर डाले गए आपत्तिजनक वीडियो को 24 घंटे के भीतर सभी प्लेटफॉर्म से हटा लें। कोर्ट ने यह आदेश गुरुवार को दिया, जब हमदर्द की ओर से बताया गया कि रामदेव ने पहले दिए गए कोर्ट के निर्देशों के बावजूद एक नया वीडियो जारी किया है, जिसमें आपत्तिजनक बातें कही गई हैं।

एक सप्ताह के भीतर इस आदेश के पालन का हलफनामा भी दाखिल करें

कोर्ट ने कहा कि रामदेव द्वारा दायर हलफनामा और नया वीडियो, दोनों ही कोर्ट की अवमानना के दायरे में आते हैं। कोर्ट ने रामदेव को आदेश दिया कि वे वीडियो का वह हिस्सा जिसमें हमदर्द और उसके उत्पादों का जिक्र है, उसे सभी सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से हटाएं। साथ ही, एक सप्ताह के भीतर इस आदेश के पालन का हलफनामा भी दाखिल करें।

हमदर्द की दलील: वीडियो से फैल रही सांप्रदायिकता

हमदर्द की ओर से वरिष्ठ वकील संदीप सेठी ने कोर्ट को बताया कि रामदेव ने नया वीडियो जारी कर कोर्ट के आदेश की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि यह वीडियो सांप्रदायिक भावना फैलाने वाला है और इसमें उपभोक्ताओं को दूसरे उत्पादों के खिलाफ भड़काया गया है। सेठी ने बताया कि एक दिन में इस वीडियो को 8.9 लाख बार देखा गया, 8,500 लाइक्स और 2,200 कमेंट्स आए, जिससे इसकी व्यापक पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

रामदेव की दलील: मानहानि हो सकती है, अवमानना नहीं

रामदेव और पतंजलि की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव नायर और जयंत मेहता ने कहा कि वीडियो भले ही आपत्तिजनक हो, लेकिन यह अवमानना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अधिकतम मानहानि का मामला हो सकता है, जिसके लिए हमदर्द को अलग से कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए। रामदेव की ओर से यह भी कहा गया कि वीडियो हटा दिया जाएगा।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: रामदेव का हलफनामा झूठा

कोर्ट ने यह भी कहा कि रामदेव पहले भी सुप्रीम कोर्ट में अवमानना के मामले में फंसे हैं। ऐसे में उनका यह दावा कि वे कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं, गलत साबित होता है। कोर्ट ने 22 अप्रैल को भी रामदेव की ‘शरबत जिहाद’ टिप्पणी को गंभीर बताते हुए कहा था कि यह कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोरने वाली बात है।

हमदर्द का आरोप: मदरसों और मस्जिदों के लिए पैसे का आरोप

हमदर्द की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि रामदेव ने पतंजलि के ‘गुलाब शरबत’ का प्रचार करते हुए कहा कि हमदर्द के रूह अफजा से कमाया गया पैसा मदरसों और मस्जिदों के निर्माण में लगाया जाता है। कोर्ट ने इस बयान को भी बेहद आपत्तिजनक माना।

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