Friday, July 3, 2026
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NextGen e-HMIS पोर्टल: 38 सरकारी अस्पतालों के सरप्राइज ऑडिट का क्यों दिया आदेश, यहां विस्तार से समझिए

NextGen e-HMIS पोर्टल: दिल्ली की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और डिजिटल पोर्टल की विफलता पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

गंभीर मरीज को बेड नहीं होने का बहाना बनाकर लौटा दिया जात है: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट के जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए नेशनल इन्फॉरमेटिक्स सेंटर (NIC) को दिल्ली सरकार के सभी 38 अस्पतालों का औचक निरीक्षण (Surprise Audit) करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा, अस्पतालों की वेबसाइट पर आईसीयू (ICU) बेड खाली दिख रहे हैं, लेकिन जब गंभीर मरीज अस्पताल पहुंचता है, तो उसे बेड न होने का बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है। हेल्पलाइन नंबरों पर कोई फोन नहीं उठाता। यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इस डिजिटल सिस्टम के क्रियान्वयन में भारी असमानता है। जनता के टैक्स के पैसे से खरीदी गई 15-15 करोड़ रुपये की मशीनें डॉक्टरों की ट्रेनिंग न होने के कारण धूल फांक रही हैं, जो सार्वजनिक संसाधनों की खुली बर्बादी (Gross Waste of Public Resource) है।”

मामला क्या है?: पोर्टल पर बेड ‘खाली’, अस्पताल के गेट से मरीज ‘बाहर’

यह मामला दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत और उनके डिजिटल दावों के बीच के बड़े अंतर को उजागर करता है।

क्या है NextGen e-HMIS?: एनआईसी (NIC) द्वारा विकसित इस ‘नेक्स्टजेन ई-अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली’ का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में आईसीयू बेड, वेंटिलेटर और आपातकालीन सेवाओं की लाइव उपलब्धता की सटीक जानकारी देना है, ताकि मरीजों को त्वरित इलाज मिल सके।

कमर जहां का दुर्भाग्यपूर्ण मामला: कोर्ट द्वारा खुद संज्ञान लिए गए (Suo Moto) मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र (Amicus Curiae) ने एक घटना का जिक्र किया। ‘कमर जहां’ नामक एक गंभीर मरीज को लोक नायक (LNJP) अस्पताल ने आईसीयू बेड खाली न होने की बात कहकर गेट से लौटा दिया। जबकि उसी समय मरीज की पोती ने कोर्ट को लाइव दिखाया कि e-HMIS पोर्टल पर अस्पताल में 2 आईसीयू बेड खाली नजर आ रहे थे। इसके अलावा पोर्टल पर दिए गए किसी भी हेल्पलाइन नंबर पर डॉक्टरों या स्टाफ ने फोन तक नहीं उठाया।

NextGen e-HMIS को लेकर हाई कोर्ट का रुख: बहानेबाजी बंद करें, एनआईसी करेगी औचक जांच

हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के अस्पतालों के इस रवैए पर गहरी नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत का मिलान करना अब जरूरी हो गया है। कोर्ट के मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं।

एनआईसी (NIC) को सरप्राइज ऑडिट की कमान

अदालत ने एनआईसी की संयुक्त निदेशक (Joint Director) आरती गर्ग को आदेश दिया है कि वे अपनी टीम के साथ 31 जुलाई 2026 तक अलग-अलग तारीखों पर दिल्ली के सभी 38 सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण (Surprise Audit) करें। एनआईसी को अपनी रिपोर्ट में तीन मुख्य बिंदुओं पर जवाब देना होगा।

  • क्या वेबसाइट पर दिखाए जा रहे आईसीयू बेड वास्तविक उपलब्धता के साथ मेल खाते हैं?
  • क्या आपातकालीन आईसीयू बेड के लिए आने वाले फोन कॉल्स को अस्पताल स्टाफ ठीक से अटेंड कर रहा है?
  • क्या सभी 38 अस्पतालों में यह सिस्टम समान रूप से लागू है या इसमें कोई विधिक व तकनीकी खामी (Gaps) है?

ऑडिट का खर्च उठाएगी दिल्ली सरकार

चूंकि एनआईसी के पास वाहनों की कमी थी, इसलिए कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को निर्देश दिया कि वे ऑडिट टीम को गाड़ियां मुहैया कराएं। इस पूरे सरप्राइज ऑडिट का सारा प्रशासनिक खर्च दिल्ली सरकार को उठाना होगा।

15 करोड़ की मशीनें धूल फांकने पर नाराजगी

सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद एक कैंसर विशेषज्ञ (Oncologist) ने बताया कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने 15-15 करोड़ रुपये से अधिक की महंगी चिकित्सा मशीनें खरीद तो ली हैं, लेकिन स्टाफ और डॉक्टरों को उन्हें चलाने की ट्रेनिंग ही नहीं दी गई। इस वजह से मशीनें बंद पड़ी हैं और मरीजों का इलाज महीनों की देरी से हो रहा है। कोर्ट ने इसे ‘सार्वजनिक धन की बर्बादी’ मानते हुए सभी सरकारी अस्पतालों को ऐसी अप्रयुक्त (Unused) मशीनों का ऑडिट कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

विधिक सुधारात्मक निर्देश (Remedial Directions)

हाई कोर्ट ने दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे को सुचारू बनाने के लिए निम्नलिखित त्वरित आदेश पारित किए हैं।

टोल-फ्री नंबर: दिल्ली सरकार आपातकालीन सेवाओं और आईसीयू बेड की जानकारी के लिए एक एकीकृत केंद्रीकृत टोल-फ्री नंबर शुरू करने पर विचार करे।

नोडल अधिकारी की नियुक्ति: हर अस्पताल में एक ‘नोडल पर्सन’ तैनात किया जाए, जिसका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि किसी दूसरे अस्पताल से कोई मरीज रेफर होकर आया है, तो उसे बिना इलाज के वापस न भेजा जाए।

लाइव डेमो: दिल्ली सरकार को अगली सुनवाई में इस सॉफ्टवेयर और ‘ICU Beds Saarthi’ ऐप का लाइव डेमो अदालत के सामने देना होगा।

केस मैट्रिक्स: दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांदिल्ली उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली
माननीय न्यायाधीशजस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा (खंडपीठ)
केस का प्रकारस्वत: संज्ञान जनहित याचिका (Suo Moto Healthcare Monitoring Case)
मुख्य डिजिटल पोर्टलNextGen e-HMIS और ‘ICU Beds Saarthi’
जांच अधिकारी (Audit Head)आरती गर्ग, संयुक्त निदेशक, एनआईसी (NIC)
ऑडिट की अंतिम तिथि31 जुलाई 2026 (रिपोर्ट जमा करने की डेडलाइन)
अदालत का अंतिम अंतरिम निर्देशदिल्ली के सभी 38 अस्पतालों का सरप्राइज ऑडिट; बंद पड़ी करोड़ों की मशीनों की रिपोर्ट तलब।

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