Friday, July 3, 2026
HomeHigh CourtSeparate Tamil Nadu: अलग तमिलनाडु की बात करना आज देशद्रोह नहीं…बल्कि मानसिक...

Separate Tamil Nadu: अलग तमिलनाडु की बात करना आज देशद्रोह नहीं…बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्या माना जाएगा, केस को पूरा पढ़िए

Separate Tamil Nadu: मद्रास हाईकोर्ट ने भारत में देशद्रोह (Sedition) की कानूनी सीमाओं और बदलते सामाजिक संदर्भों को लेकर यह बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक टिप्पणी की है।

दो प्रकाशकों के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे को पूरी तरह से किया रद्द

हाईकोर्ट जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती की एकल पीठ ने कीरा बनाम राज्य मामले में सुनवाई करते हुए दो प्रकाशकों के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे को पूरी तरह से रद्द (Quash) कर दिया है। यह मुकदमा 2014 में प्रकाशित एक किताब को लेकर दर्ज किया गया था, जिसमें दशकों पुराने इतिहास का जिक्र था। अदालत ने कहा, वर्ष 1967 के दौर में जब तमिल मुक्ति मोर्चा जैसी संस्थाएं बनी थीं, तब अलग देश की मांग करने वाले भाषण या प्रकाशन भारत सरकार के प्रति नफरत या अवमानना भड़का सकते थे। लेकिन आज के परिदृश्य में, भारत एक राष्ट्र के रूप में दिल और आत्मा से पूरी तरह एकीकृत है। आज के सामाजिक परिवेश में यदि कोई व्यक्ति तमिल नाडु को एक अलग देश बनाने की बात करता है, तो आम जनता में कोई नफरत नहीं फैलेगी, बल्कि उस व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं (Mental Health Issues) से पीड़ित माना जाएगा।

मामला क्या है?: 1967 के इतिहास को छापने पर देशद्रोह का मुकदमा

यह पूरा विवाद एक ऐतिहासिक संदर्भ को किताब में दर्ज करने से शुरू हुआ था।

किताब और प्रकाशक: कीरा उर्फ मूर्ति और तमिल बाला नामक दो प्रकाशकों पर आरोप था कि उनके प्रकाशन ‘कड़गम पथिपगम’ ने साल 2014 में इलांगोवन द्वारा लिखित एक किताब प्रकाशित की थी। इस मामले के मुख्य आरोपी लेखक इलांगोवन की मुकदमे की लंबित अवधि के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है।

अभियोजन (Prosecution) का आरोप: पुलिस की फाइनल रिपोर्ट के मुताबिक, इस किताब में यह रिकॉर्ड दर्ज था कि 1967 में कोयंबटूर में ‘तमिलरसन’ नामक व्यक्ति ने घोषणा की थी कि तमिल नाडु को एक अलग राष्ट्र बनना चाहिए। अभियोजन का यह भी आरोप था कि किताब में अलगाव (Secession) के लिए गुरिल्ला युद्ध (Guerrilla Warfare) की रणनीति अपनाने का भी जिक्र किया गया था। इसी आधार पर प्रकाशकों के खिलाफ तत्कालीन आईपीसी की धारा 124A (देशद्रोह) के तहत मामला दर्ज कर सैदापेट कोर्ट में मुकदमा चलाया जा रहा था।

प्रकाशकों की दलील: याचिकाकर्ताओं के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले एस.जी. वोम्बटकेरे बनाम भारत संघ (जिसमें देशद्रोह कानून के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी) और मद्रास हाई कोर्ट के ही एक अन्य खंडपीठ के फैसले का हवाला देते हुए मुकदमे को रद्द करने की मांग की।

हाई कोर्ट का रुख: इतिहास को दर्ज करना नफरत फैलाना नहीं

मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उन दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अलग देश और गुरिल्ला युद्ध की बात छापना देशद्रोह है। अदालत के मुख्य विधिक निष्कर्ष इस प्रकार हैं।

आज का सामाजिक परिवेश (Current Social Milieu) अलग है

जस्टिस चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि देशद्रोह के किसी भी आरोप की समीक्षा आज के सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। आज का भारत आंतरिक रूप से बेहद मजबूत और एकजुट है। आज के समय में ऐसी बातें केवल झुंझलाहट या खीझ (Annoyance) पैदा कर सकती हैं, सरकार के खिलाफ जन-आक्रोश या नफरत नहीं।

केवल इतिहास दर्ज करना अपराध नहीं

अदालत ने पाया कि यह किताब आज के दौर में भारत से अलग होने का कोई नया आह्वान (Call for Secession) नहीं कर रही थी। यह केवल दशकों पहले तमिलरसन द्वारा कही गई बातों का एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड (Mere Recording) थी। इतिहास में जो घटित हुआ, उसे केवल कागजों पर दर्ज कर देना सरकार के प्रति नफरत फैलाने का प्रयास नहीं माना जा सकता।

अदालत का अंतिम आदेश

मद्रास उच्च न्यायालय ने माना कि प्रकाशकों के खिलाफ चल रही यह न्यायिक कार्यवाही कानून का दुरुपयोग है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि इस प्रकाशन से समाज में नफरत या अवमानना फैलने का कोई वास्तविक खतरा नहीं है, इसलिए सैदापेट के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित इस देशद्रोह के मुकदमे को पूरी तरह से निरस्त (Quash) किया जाता है।

केस मैट्रिक्स: मद्रास हाई कोर्ट का आदेश (जुलाई 2026)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांमद्रास उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय, चेन्नई
माननीय न्यायाधीशजस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती (एकल पीठ)
केस संदर्भकीरा उर्फ मूर्ति और अन्य बनाम राज्य (Keera Vs State)
आरोपित कानून / धारातत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (देशद्रोह / Sedition)
विवादित सामग्री1967 में अलग तमिल नाडु देश और गुरिल्ला युद्ध की मांग से जुड़ा ऐतिहासिक रिकॉर्ड।
याचिकाकर्ताओं के वकीलएडवोकेट पी. पुगलेंथी
सरकार के प्रतिनिधिगवर्नमेंट एडवोकेट एम. मोहम्मद रियाज
अदालत का अंतिम निर्णययाचिका मंजूर; प्रकाशकों के खिलाफ दर्ज देशद्रोह का क्रिमिनल केस रद्द।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
36.5 ° C
36.5 °
36.5 °
41 %
4.3kmh
98 %
Fri
37 °
Sat
40 °
Sun
39 °
Mon
38 °
Tue
39 °

Recent Comments