Friday, July 3, 2026
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DLF South Court Mall: लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन आवेदनों में देरी क्यों; डीडीए (DDA) उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जानकारी दें

DLF South Court Mall: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण को दिल्ली में प्रॉपर्टी कन्वर्जन के अटके मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कड़ी फटकार लगाई है।

डीडीए के उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन

हाईकोर्ट के जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीडीए के उपाध्यक्ष (Vice Chairman) को अगली सुनवाई यानी 30 जुलाई 2026 को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का समन जारी किया है। अदालत ने कहा, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) अनिश्चित काल के लिए संपत्तियों के फ्रीहोल्ड कन्वर्जन आवेदनों को लटकाकर नहीं रख सकता। प्राधिकरण की इस सुस्ती और अनिर्णय की स्थिति ने राजधानी में प्रॉपर्टी के लेन-देन को पूरी तरह ठप कर दिया है। इसका सीधा असर नागरिकों के पारिवारिक समझौतों, संपत्ति की बिक्री और उत्तराधिकार व्यवस्था जैसे निजी मामलों पर पड़ रहा है।

मामला क्या है?: साकेत मॉल के मालिकों का कानूनी संघर्ष

यह कानूनी विवाद दिल्ली के एक प्रमुख वाणिज्यिक परिसर से शुरू हुआ, जो बाद में पूरी दिल्ली के कन्वर्जन आवेदनों का प्रतिनिधित्व करने लगा।

कन्वर्जन और जीएसटी (GST) का पेच: साकेत स्थित ‘डीएलएफ साउथ कोर्ट मॉल’ (DLF South Court Mall) के कुछ प्रॉपर्टी मालिकों ने साल 2023 में अपनी कमर्शियल संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए डीडीए के पास आवेदन किया था। मालिकों ने डीडीए द्वारा मांगे गए सभी कन्वर्जन शुल्क का भुगतान भी कर दिया था। इसके बावजूद डीडीए ने ट्रांसफर को मंजूरी नहीं दी और ऊपर से उन पर बैकडेट (Retrospective) से जीएसटी भी लगा दिया।

अदालती आदेशों की नाफरमानी: इससे पहले कोर्ट ने 5 दिसंबर 2025 को डीडीए को इन आवेदनों को प्रोसेस करने का आदेश दिया था। इसके बाद भी जब डीडीए ने कार्रवाई नहीं की, तो कोर्ट ने फरवरी और मार्च में दोबारा निर्देश दिए। हैरानी की बात यह है कि इन निर्देशों का पालन करने के बजाय डीडीए ने खुद इन आदेशों को अदालत में चुनौती दे दी, जिस पर आज सुनवाई हुई।

हाई कोर्ट का रुख: पोर्टल खराब होने का बहाना नहीं चलेगा

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने पाया कि डीडीए पिछले कई महीनों से दिल्लीभर के प्रॉपर्टी कन्वर्जन आवेदनों को दबाकर बैठा है। कोर्ट के मुख्य विधिक निष्कर्ष इस प्रकार हैं।

आम जनता और सहकारी समितियां परेशान

खंडपीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि डीडीए की इस कार्यप्रणाली के खिलाफ कई कोऑपरेटिव सोसायटियां और नागरिक समूह लगातार शिकायतें कर रहे हैं। जब लोग कन्वर्जन चार्ज दे चुके हैं, तो फाइलों को अटकाने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।

तकनीकी खामी को ढाल नहीं बना सकता डीडीए

डीडीए ने अदालत के सामने दलील दी थी कि उसका ‘आईडीएलआई’ पोर्टल (IDLI – Interactive Disposal of Land Information System) ठीक से काम नहीं कर रहा है। कोर्ट ने इस बहाने को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि तकनीकी खराबी या पोर्टल डाउन होने के आधार पर सभी कन्वर्जन आवेदनों को अधर (Abeyance) में नहीं लटकाया जा सकता।

अंतर-विभागीय समन्वय (Inter-Departmental Consultation) के निर्देश

हाई कोर्ट ने मामले को सुलझाने के लिए डीडीए को निर्देश दिया है कि वह केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) तथा दिल्ली सरकार के साथ तत्काल उच्च स्तरीय बैठक करे और इस नीतिगत गतिरोध पर एक त्वरित और ठोस निर्णय ले।

अदालत का अंतिम आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीडीए द्वारा अपनी ही एकल पीठ के आदेशों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने इसे “अत्यंत गंभीर मामला” मानते हुए साफ किया कि अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी जरूरी है। कोर्ट ने डीडीए के वाइस चेयरमैन को 30 जुलाई को कोर्ट रूम में हाजिर रहने और यह बताने का आदेश दिया है कि इन लंबित आवेदनों को कब तक निपटाया जाएगा।

केस मैट्रिक्स: दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश (जुलाई 2026)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांदिल्ली उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली
माननीय न्यायाधीशजस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन (खंडपीठ)
संबद्ध पक्षदिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) बनाम साकेत मॉल प्रॉपर्टी ओनर्स व अन्य
मुख्य विवादित पोर्टलIDLI पोर्टल (Interactive Disposal of Land Information System)
मूल विधिक मुद्दाशुल्क भुगतान के बावजूद कमर्शियल लीजहोल्ड को फ्रीहोल्ड में बदलने में अत्यधिक देरी।
प्रॉपर्टी मालिकों के वकीलएडवोकेट सौरभ सेठ, सुमेर डी. सेठ और नीलमप्रीत कौर
अदालत का अंतिम निर्णयडीडीए की टालमटोल पर खिंचाई; उपाध्यक्ष (VC) को 30 जुलाई को व्यक्तिगत पेशी का आदेश।
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