Sunday, October 18, 2026
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MONKEY MENACE: गाजियाबाद के व्यक्ति की शिकायत पर कोर्ट का सीधा सवाल…बंदरों के आतंक से निपटने के लिए का क्या उठाए

MONKEY MENACE: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते ‘बंदरों के आतंक’ (Monkey Menace) पर चिंता जताते हुए प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया है।

कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा है कि गाजियाबाद और मथुरा जैसे जिलों में इस समस्या से निपटने के लिए मौजूदा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत अब तक क्या कार्रवाई की गई है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने विनीत शर्मा और अन्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर यह आदेश पारित किया।

मामले की मुख्य बातें

  • सर्वे की जरूरत: सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि ‘रीसस मकाक’ (लाल मुंह वाले बंदरों) की आबादी का आकलन करने, संघर्ष वाले हॉटस्पॉट की पहचान करने और प्रबंधन रणनीति बनाने के लिए एक व्यवस्थित फील्ड सर्वे की आवश्यकता है।
  • कोर्ट का निर्देश: अदालत ने कहा कि प्रस्तावित अध्ययन से पहले, सरकार हलफनामे के माध्यम से यह बताए कि गाजियाबाद और मथुरा जिलों में मौजूदा SOP के तहत अब तक क्या एक्शन लिया गया है।

क्या है जनहित याचिका (PIL) का आधार?

गाजियाबाद निवासी याचिकाकर्ताओं ने अपनी अर्जी में कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं। इसमें बंदरों की तेजी से बढ़ती आबादी और मानव-बंदर संघर्ष।बंदरों में भूख और भुखमरी की समस्या। बंदरों को रखने की कथित अमानवीय स्थितियां।

सरकार की कार्ययोजना (Action Plan)

सरकारी वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के लिए कम से कम एक वर्ष का समय चाहिए। तब तक बंदरों को पकड़ने, परिवहन और छोड़ने के निर्देशों वाली मौजूदा SOP लागू रहेगी। एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जा चुका है। पशु कल्याण बोर्ड (Animal Welfare Board) के सुझावों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

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