Friday, October 2, 2026
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SCBA National Conference: सरकारी वकीलों के पैनल में महिलाओं को मिले 50% आरक्षण…महिला वकीलों के लिए अलग फंड बने

SCBA National Conference: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कानूनी पेशे में लैंगिक समानता (Gender Equality) लाने के लिए एक बड़े बदलाव का आह्वान किया है।

बेंगलुरु में आयोजित ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (SCBA) के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने प्रस्ताव दिया कि सरकारी वकीलों और कानूनी सहायता (Legal Aid) पैनल में कम से कम 50 प्रतिशत सीटें महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित की जानी चाहिए। CJI ने भावुक होते हुए कहा, जब हम अपने संवैधानिक ढांचे के भीतर समानता की बात करते हैं, तो यह सिर्फ कागजों पर नहीं होनी चाहिए; इसे वास्तविक जीवन के अनुभव में बदलना चाहिए।े

करियर में आने वाली बाधाओं की पहचान

  • CJI ने उन संरचनात्मक बाधाओं पर चिंता जताई जो महिलाओं को लंबे समय तक वकालत में बने रहने से रोकती हैं।
  • काम के विषम घंटे: वकालत के पेशे में काम के समय का कोई निश्चित पैमाना न होना।
  • भरोसे की कमी: मुवक्किलों (Litigants) द्वारा महिला वकीलों को केस सौंपने में हिचकिचाहट।
  • वित्तीय असुरक्षा: वरिष्ठ वकीलों द्वारा महिला जूनियरों को पर्याप्त पारिश्रमिक न देना।

CJI के प्रमुख सुझाव: समानता केवल कागज पर न हो

  • जस्टिस सूर्यकांत ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान पेश किए।
  • 50% आरक्षण (Empanelment): सरकारी और लीगल एड पैनल में महिलाओं की आधी भागीदारी सुनिश्चित हो। इससे उन्हें आर्थिक स्थिरता और पहचान मिलेगी, जिससे वे बाद में स्वतंत्र प्रैक्टिस स्थापित कर सकेंगी।
  • विशेष कॉर्पस (Corpus Fund): केंद्र और राज्य सरकारें महिला वकीलों की मदद के लिए एक अलग फंड बनाएं। यह फंड विशेष रूप से मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) के दौरान उन्हें मानदेय (Honorarium) देने के काम आए।
  • बार एसोसिएशन में प्रतिनिधित्व: बार एसोसिएशनों के चुनाव और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं के लिए कम से कम 30% आरक्षण होना चाहिए।
  • बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर: देश की हर अदालत में महिलाओं के लिए अलग कमरा (Common Room) और चाइल्ड केयर सेंटर (पालना घर) अनिवार्य होना चाहिए। CJI ने कहा कि वे इस मुद्दे को सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के साथ उठाएंगे।

न्यायपालिका में बढ़ती भागीदारी

  • CJI ने सकारात्मक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि निचली न्यायपालिका में महिलाओं का प्रवेश तेजी से बढ़ा है।
  • निचली अदालतें: देश में औसतन 45% से 50% न्यायिक अधिकारी महिलाएं हैं। कुछ राज्यों में यह आंकड़ा 50-60% तक है।
  • हाई कोर्ट: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां 18 महिला जज हैं। यह उनकी मेहनत और वरिष्ठता का परिणाम है जो उन्होंने जिला जज के रूप में शुरू की थी।
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