सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन मामलों में एक मिसाल है जहां ‘जनहित’ के नाम पर बेवजह कानूनी बाधाएं खड़ी की जाती हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि व्यवसाय (Commercial enterprise) शुरू करने में अनावश्यक देरी न केवल मालिक के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी नुकसानदेह है। यह मामला हरिद्वार में एक पेट्रोल पंप के निर्माण को रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका दायर की गई थी। आरोप था कि यह पेट्रोल पंप स्कूल और आवासीय इलाके के करीब है, जो CPCB (Central Pollution Control Board) की गाइडलाइन्स के खिलाफ है।
मुख्य विवाद: क्या नियम टूटे थे?
- CPCB गाइडलाइन्स: नियमों के अनुसार, पेट्रोल पंप स्कूल, अस्पताल (10 बेड से अधिक) और ‘निर्धारित आवासीय क्षेत्रों’ (Designated residential areas) से 50 मीटर की दूरी पर होना चाहिए।
- सच्चाई: जांच रिपोर्ट में पाया गया कि: साइट के पास जो घर हैं, वे ‘निर्धारित आवासीय क्षेत्र’ नहीं हैं। राज्य के मास्टर प्लान (Master Plan) के अनुसार, वह पूरी जगह ‘व्यावसायिक’ (Commercial) क्षेत्र के अंतर्गत आती है। दूरी का नियम यहाँ लागू नहीं होता क्योंकि वह क्षेत्र आवासीय घोषित नहीं है।
NGT की कार्यप्रणाली पर सवाल
- सुप्रीम कोर्ट ने NGT द्वारा दिए गए दो आदेशों (01.02.2021 और 11.11.2022) को खारिज कर दिया।
- बिना सुनवाई के आदेश: NGT ने पक्षों को नोटिस दिए बिना और रिपोर्ट को देखे बिना ही आदेश जारी कर दिया।
- प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: सेक्शन 19(1) के तहत अनिवार्य नोटिस और आपत्तियां मंगाने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
- बिजी बॉडी (Busy Body): कोर्ट ने याचिकाकर्ता (1st respondent) के इरादों पर सवाल उठाते हुए उसे एक ‘बिजी बॉडी’ (व्यर्थ का दखल देने वाला) करार दिया, जिसने लगभग 6 साल तक इस परियोजना को ठप रखा।
हम मामले को वापस (Remand) भी भेज सकते थे, लेकिन रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट है कि कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। मामले को वापस भेजने से केवल देरी होगी, जो मालिक और जनता दोनों के हित में नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट
अंतिम आदेश (The Verdict)
- NGT के आदेश रद्द: कोर्ट ने NGT के दोनों विवादित आदेशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया।
- रास्ता साफ: जिला मजिस्ट्रेट (DM), हरिद्वार को निर्देश दिया गया है कि वे मौजूदा नियमों के आधार पर मामले को देखें। अगर पेट्रोल पंप सभी कानूनी शर्तों को पूरा करता है, तो उसे तुरंत स्थापित करने की अनुमति दी जाए।
महत्वपूर्ण संदेश: विकास और नियम
सुप्रीम कोर्ट ने यह संदेश दिया है कि अदालतें जनहित याचिका (PIL) का इस्तेमाल किसी के बिजनेस को दबाने के लिए नहीं होने देंगी। अगर मास्टर प्लान कहता है कि जमीन ‘व्यावसायिक’ है, तो उसे ‘आवासीय’ मानकर पेट्रोल पंप नहीं रोका जा सकता।
IN THE SUPREME COURT OF INDIA
K. VINOD CHANDRAN, J. , SANJAY KUMAR J.
CIVIL APPELLATE JURISDICTION
Civil Appeal No.3042 of 2023 With Civil Appeal Nos.4991-4992 of 2024
Indian Oil Corporation Ltd.
Versus
Deepak Sharma and Ors.

