Saturday, August 15, 2026
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Patna HC Slams Lawyer: महिला वकीलों के सामने स्त्री जाति का कर रहे हैं अपमान… यूं लगी वकील को फटकार

Patna HC Slams Lawyer: पटना हाई कोर्ट ने स्त्री जाति के अपमान करने के एक मामले की सुनवाई के दौरान वकील को फटकार लगाई है।

दरअसल, वकील ने अपनी मुवक्किल की पत्नी पर “अनैतिक” और “असंसदीय” आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट ने मामले में कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि बिना किसी सबूत के खुली अदालत में महिलाओं के खिलाफ ऐसी टिप्पणियां न केवल संबंधित महिला का अपमान हैं, बल्कि समस्त नारी जाति के लिए अपमानजनक हैं।

मामला ₹10 लाख के स्थायी गुजारा भत्ता से जुड़ा था

हाईकोर्ट के जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस डॉ. अंशुमन की बेंच ने एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई करते हुए वकील के आचरण की कड़े शब्दों में निंदा की। मामला ₹10 लाख के स्थायी गुजारा भत्ता (Permanent Alimony) से जुड़ा था। बेंच ने वकील की इन दलीलों को “असंसदीय” करार दिया। इस दौरान कोर्ट ने पति के “मजदूर” होने के दावे के बावजूद वैज्ञानिक तरीके से एलिमनी की गणना की

वकील की ‘असंसदीय’ दलील (The Outrageous Argument)

अपीलकर्ता (पति) के वकील ने ₹10 लाख की एलिमनी देने का विरोध करते हुए खुली अदालत में दावा किया कि पत्नी “व्यभिचार” (Adultery) में रह रही है और किसी अन्य व्यक्ति के साथ भाग गई है। इसलिए पति ऐसी महिला को कोई भी गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं है।

हाई कोर्ट का सख्त रुख (HC’s Strong Reaction)

  • तथ्यों की अनदेखी: निचली अदालत ने पहले ही व्यभिचार के आरोपों को खारिज कर दिया था और तलाक केवल “क्रूरता” (Cruelty) के आधार पर दिया गया था।
  • मर्यादा का उल्लंघन: “खुली अदालत में, जहां महिला अधिवक्ता भी मौजूद हैं, बिना किसी आधार के ऐसे आरोप लगाना न केवल पत्नी के लिए, बल्कि सामान्य रूप से महिलाओं के लिए अपमानजनक है।”
  • चेतावनी: कोर्ट ने भविष्य में ऐसी टिप्पणियां न करने के लिए वकील को सख्त चेतावनी (Caution) दी।

गुजारा भत्ता का गणित (The Alimony Calculation)

विवरणगणना (Calculation)
दैनिक आय (न्यूनतम मजदूरी)₹480 प्रति दिन
अनुमानित मासिक आय₹14,400
पत्नी का हिस्सा (1/3)₹4,800 प्रति माह
वार्षिक राशि₹57,600
कुल एलिमनी (18 साल के लिए)₹10.36 लाख

कोर्ट का अंतिम आदेश (Final Verdict)

  • कोई हस्तक्षेप नहीं: चूंकि गणना के अनुसार राशि ₹10.36 लाख बनती है, इसलिए निचली अदालत द्वारा तय किए गए ₹10 लाख के आदेश में कोर्ट ने कोई बदलाव नहीं किया।
  • समय सीमा: कोर्ट ने पति को यह राशि चुकाने के लिए 6 महीने का समय दिया है। यदि वह समय पर भुगतान नहीं करता, तो पत्नी कानूनी प्रक्रिया (Execution Decree) के जरिए इसे वसूलने के लिए स्वतंत्र है।

अदालती गरिमा और महिला सम्मान

यह फैसला न केवल एलिमनी के अधिकारों को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि अदालती कार्यवाही के दौरान वकीलों को भाषा की मर्यादा और तथ्यों की सत्यता का ध्यान रखना अनिवार्य है। ‘चरित्र हनन’ को कानूनी ढाल के रूप में इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं है।

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