Tuesday, September 29, 2026
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Gyanesh Kumar: हटाए गए मतदाताओं के नामों को बहाल करने की अर्जी पर आज या कल में ही सुनवाई करने की क्या Urgency है?; CEC के 14 एकतरफा फैसलों का मामला

याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दे और मांगें

  1. 14 विवादित आदेशों को रद्द करने की मांग: याचिका में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी द्वारा दर्ज कराई गई लिखित आपत्तियों और असहमति को दरकिनार कर 14 महत्वपूर्ण फैसले लागू किए।
  2. मतदाता सूची और फॉर्म-6 में अनधिकृत बदलाव:
    • नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 (Form 6) में बिना कानूनी संशोधन के अनधिकृत बदलाव करना।
    • ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना और डेटाबेस पर केवल चुनिंदा अधिकारियों की पहुंच (Centralisation of Database) सुनिश्चित करना।
  3. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव स्थगित करने की मांग: याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि:
    • हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम तुरंत मतदाता सूची में बहाल किए जाएं।
    • महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
    • आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को तब तक के लिए स्थगित किया जाए, जब तक कि पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी रूप से सही मतदाता सूची तैयार नहीं हो जाती।
    • इन गड़बड़ियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक समिति (Judicial Committee) गठित की जाए।

हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणियां और स्टैंड

सुनवाई के दौरान जब वकीलों ने याचिका पर तुरंत (आज या कल) सुनवाई का आग्रह किया, तो पीठ ने कार्यसूची (Roster) के दबाव और तात्कालिकता का अभाव बताते हुए कहा: “इस याचिका में ऐसी क्या आपातकालीन स्थिति है कि इसे आज या कल ही सुना जाए? हम इसे 22 अक्टूबर 2026 को देखेंगे।” कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि क्या यह याचिका मुख्य पीठ (मुंबई) के समक्ष जानी चाहिए या कोल्हापुर बेंच में, और याचिकाकर्ताओं से उनके व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन पर स्पष्टीकरण मांगा।

कोल्हापुर/मुंबई: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर निर्णय-प्रक्रिया, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार द्वारा अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी—की लिखित आपत्तियों के बावजूद लिए गए 14 प्रशासनिक आदेशों और महाराष्ट्र में चल रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है।

न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख और न्यायमूर्ति नीरज धोटे की खंडपीठ के समक्ष जब याचिकाकर्ता के वकील असीम सरोदे ने मामले को मेंशन करते हुए तुरंत सुनवाई की मांग की, तो अदालत ने तीखा सवाल उठाया कि हटाए गए मतदाताओं की बहाली या चुनाव आयोग के आंतरिक फैसलों की चुनौती में ऐसी कौन सी आपातकालीन स्थिति है कि इसे आज या कल में ही सुना जाए। पीठ ने स्पष्ट किया कि जब नोटिस जारी होते हैं तो नियमित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, न कि असाधारण तात्कालिकता का दबाव बनाया जाए। उच्च न्यायालय की कोल्हापुर सर्किट बेंच ने रोस्टर के दबाव और तात्कालिकता के अभाव का हवाला देते हुए मामले को नियमित क्रम में 22 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए तय किया है।

अदालत की मौखिक टिप्पणियां एवं मेंशनिंग पर विधिक सवाल

सुनवाई के दौरान जब अधिवक्ता असीम सरोदे ने याचिका को प्रोडक्शन लिस्ट पर रखकर तत्काल सुनवाई (Urgent Hearing) का अनुरोध किया, तो न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख और न्यायमूर्ति नीरज धोटे की पीठ ने प्रक्रियात्मक पहलुओं पर कई सवाल खड़े किए:

  • मूल पीठ (Principal Seat) बनाम सर्किट बेंच: अदालत ने पूछा कि चूंकि यह पूरे राज्य और राष्ट्रीय स्तर के आयोग से जुड़ा नीतिगत मामला है, तो क्या इस याचिका को कोल्हापुर सर्किट बेंच के बजाय मुंबई स्थित मुख्य पीठ (Principal Seat) के समक्ष नहीं जाना चाहिए?
  • तात्कालिकता का अभाव (No Urgency): पीठ ने सवाल किया:“इसमें ऐसी क्या तात्कालिकता है? क्या यह कोई जनहित याचिका (PIL) है? चूंकि यह एक रिट याचिका के रूप में दायर की गई है, तो निर्वाचन आयोग के विरुद्ध आपका व्यक्तिगत/निजी विधिक अधिकार (Private Right) क्या प्रभावित हो रहा है?”
  • वकील का प्रत्युत्तर: अधिवक्ता सरोदे ने दलील दी कि यह याचिका उन नागरिकों और पंजीकृत मतदाताओं की ओर से दायर की गई है जिनके संवैधानिक मताधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने मांग की कि लाखों मतदाताओं के नाम कटने के खतरे को देखते हुए इसे तुरंत सुना जाए।
  • अदालत का अंतिम रुख: पीठ ने किसी भी आपात राहत से इनकार करते हुए कहा: “जब नोटिस जारी किए जाते हैं, तो इस प्रकार प्रोडक्शन की मांग कैसे की जा सकती है? हम इस पूरे मामले को 22 अक्टूबर को ही देखेंगे।”

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याचिका में उठाए गए मुख्य विधिक आधार: ’14 एकतरफा आदेश एवं ईसीआई मतभेद’

याचिका मुख्य रूप से हालिया मीडिया इन्वेस्टिगेशन और चुनाव आयोग के आंतरिक आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित है, जिसमें साथी चुनाव आयुक्तों संधू और जोशी द्वारा दर्ज की गई आपत्तियों को आधार बनाया गया है:

  1. 2023 के अधिनियम की धारा 18 का उल्लंघन:
    • याचिका में तर्क दिया गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 के अनुसार चुनाव आयोग के कार्यभार का संचालन सर्वसम्मति से, अथवा मतभेद होने पर बहुमत (Majority) के आधार पर होना अनिवार्य है।
    • पिछले 10 महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा दोनों आयुक्तों की असहमति और लिखित आपत्तियों के बावजूद 14 महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले एकतरफा लिए गए।
  2. फॉर्म 6 में अवैध संशोधन और डेटाबेस का केंद्रीकरण:
    • निर्वाचकों का रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत फॉर्म-6 में जुलाई 2026 में किए गए बदलावों को दोनों चुनाव आयुक्तों ने फाइलों पर “अनधिकृत एवं अवैध” (Unauthorised and illegal) बताया था।
    • इसके अलावा, मतदाता सूची डेटाबेस (ERONet) की पहुंच को केंद्रीकृत करने और राज्य स्तरीय वैधानिक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (EROs) के अधिकारों को सीमित करने पर भी दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी और कैबिनेट सचिव तक मामला पहुंचाया था।
  3. संवैधानिक मानदंडों का क्षरण (Erosion of Constitutional Norms):
    • याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूचियों के प्रबंधन, मनमाने ढंग से नाम हटाने और जोड़ने की यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 326 (वयस्क मताधिकार) के तहत नागरिकों के मूल अधिकारों पर सीधा प्रहार करती है।

याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई प्रमुख कानूनी राहतें (Reliefs Sought)

  • 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करना: पिछले दस महीनों के दौरान जारी उन सभी 14 प्रशासनिक आदेशों और परिपत्रों को निरस्त किया जाए जो कथित तौर पर दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना जारी हुए।
  • महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया पर रोक: राज्य में चल रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की कवायद को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
  • हटाए गए मतदाताओं की बहाली: एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अनुचित या एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए सभी वैध मतदाताओं के नाम पुनः बहाल किए जाएं।
  • विधानसभा चुनाव स्थगित करने की मांग: जब तक विधि-सम्मत, त्रुटिरहित और पारदर्शी मतदाता सूचियां तैयार और अनुमोदित नहीं हो जातीं, तब तक आगामी महाराष्ट्र राज्य विधानसभा चुनावों को स्थगित (Postpone) रखा जाए।
  • स्वतंत्र न्यायिक समिति की स्थापना: मतदाता डेटा के विलोपन और सॉफ्टवेयर संबंधी कथित विसंगतियों की निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच समिति गठित की जाए।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: याचिकाकर्ता (पंजीकृत मतदाता) बनाम भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार व अन्य [रिट याचिका – बॉम्बे उच्च न्यायालय, कोल्हापुर सर्किट बेंच]
  • विधिक प्रतिनिधित्व: याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता असीम सरोदे
  • प्रासंगिक कानून एवं संवैधानिक प्रावधान:
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार एवं मनमानेपन से संरक्षण)
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार)
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 324 (चुनाव आयोग का बहु-सदस्यीय संस्थागत ढांचा)
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 326 (लोकसभा व विधानसभाओं के लिए वयस्क मताधिकार)
    • मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 (बहुमत और सर्वसम्मति का वैधानिक नियम)
    • निर्वाचकों का रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 (फॉर्म 6 की वैधानिकता एवं निर्वाचक नामावली संशोधन प्रक्रिया)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
    • टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ (1995, सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ) — ‘चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है जहां मुख्य चुनाव आयुक्त केवल “समानों में प्रथम” हैं; आयोग के नीतिगत निर्णयों में सभी आयुक्तों की सामूहिक भागीदारी और बहुमत का सिद्धांत अनिवार्य है।’
    • लक्ष्मी चरण सेन बनाम ए.के.एम. हसन उज्जामन (1985, सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ) — ‘मतदाता सूचियों की तैयारी में त्रुटियों के आधार पर चुनाव प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किया जा सकता, परंतु प्रक्रियात्मक अवैधताओं की न्यायिक समीक्षा रिट क्षेत्राधिकार के तहत संभव है।’
  • पीठ: न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख और न्यायमूर्ति नीरज धोटे (बॉम्बे उच्च न्यायालय, कोल्हापुर सर्किट बेंच)
  • वर्तमान स्थिति: तत्काल सुनवाई की अर्जी खारिज; मामले की विस्तृत प्रारंभिक सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 को निर्धारित।

Gyanesh Kumar: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (कोल्हापुर सर्किट बेंच)
पीठन्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख एवं न्यायमूर्ति नीरज धोटे
याचिका का शीर्षकप्रथमेश गोपाल गवणकर व अन्य बनाम भारतीय निर्वाचन आयोग व अन्य
मुख्य चुनौतीCEC ज्ञानेश कुमार द्वारा अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिए गए 14 एकतरफा प्रशासनिक निर्णय।
अदालत का आदेशतत्काल सुनवाई की मांग खारिज; नियमित सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 को होगी।
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