Friday, October 16, 2026
HomeScam NoseInsurance Scam: पढ़िए कैसे डाॅक्टर और बीमा कंपनी के फर्जीवाड़े वाले गंठजोड़...

Insurance Scam: पढ़िए कैसे डाॅक्टर और बीमा कंपनी के फर्जीवाड़े वाले गंठजोड़ का खुलासा हुआ…NCDRC का यह रहा फैसला

Insurance Scam: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने जीवन बीमा कंपनी बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस (Birla Sun Life Insurance) को कड़ी फटकार लगाते हुए एक मृतक के परिवार को 49 लाख रुपये (ब्याज सहित) भुगतान करने का आदेश दिया है।

आयोग के जस्टिस ए. पी. साही (अध्यक्ष) और भरतकुमार पंड्या की बेंच ने छत्तीसगढ़ राज्य आयोग के 2014 के पुराने आदेश को पलट दिया। कोर्ट ने बीमा कंपनी की जांच प्रक्रिया को “घटिया और अनैतिक” करार दिया। आयोग ने पाया कि कंपनी ने “फर्जी, मनगढ़ंत और अनैतिक” सबूतों के आधार पर दावे (Claim) को खारिज किया था।

मामला क्या था? (Death within 9 Months)

  • पॉलिसी: सौरभ सेलारका नामक व्यक्ति ने 28 मार्च 2009 को 48.92 लाख रुपये की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी।
  • हादसा: पॉलिसी लेने के मात्र 8.5 महीने बाद (2 दिसंबर 2009) उनकी मृत्यु हो गई।
  • खारिज: कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम रिजेक्ट कर दिया कि मृतक को पहले से बीमारियां (Hypertension, Vertigo) थीं और उन्होंने अपनी आय (Income) बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई थी।

डॉक्टर की गवाही ने खोली ‘पोल’ (The Fake Certificate)

  • बीमा कंपनी ने एक डॉक्टर का सर्टिफिकेट पेश किया था जिसमें दावा किया गया था कि मृतक को पॉलिसी लेने से पहले बीमारियां थीं। लेकिन जब डॉक्टर से पूछताछ हुई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
  • झूठा सर्टिफिकेट: डॉक्टर ने शपथ लेकर (Under Oath) स्वीकार किया कि उन्होंने कभी मृतक का इलाज नहीं किया।
  • इम्पर्सोनेशन (Impersonation): डॉक्टर ने बताया कि बीमा कंपनी के जांचकर्ता (Investigator) ने किसी और व्यक्ति को ‘सौरभ’ बनाकर उनके सामने पेश किया था, जिसके आधार पर उन्होंने सर्टिफिकेट जारी कर दिया।
  • कानूनी शून्य: डॉक्टर ने खुद माना कि उस सर्टिफिकेट की कोई कानूनी वैल्यू नहीं है और वह पूरी तरह फर्जी था।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “बीमा कंपनियों का यह तरीका अनैतिक”

  • NCDRC ने बीमा कंपनियों की कार्यशैली पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया।
  • सबूत जुटाने का ‘गंदा’ तरीका: “बीमा कंपनी ने एक वैध दावे को हराने के लिए सबूत ‘खरीदने’ का प्रयास किया। यह न केवल अविश्वसनीय है, बल्कि अनैतिक भी है।”
  • सबूत का बोझ: कोर्ट ने साफ किया कि अगर कंपनी दावा करती है कि बीमारी छिपाई गई है, तो इसे साबित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह कंपनी की है। केवल ‘संदेह’ के आधार पर क्लेम नहीं रोका जा सकता।
  • आय का तर्क: कंपनी का यह तर्क भी खारिज कर दिया गया कि मृतक की आय कम थी। कोर्ट ने पाया कि वह एक व्यापारिक परिवार से थे और नियमित प्रीमियम भर रहे थे।

आयोग का अंतिम आदेश

  • NCDRC ने मृतक की पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए कई निर्देश दिए।
  • पूरी राशि: बीमा कंपनी को 48.92 लाख रुपये का पूरा भुगतान करना होगा।
  • ब्याज: दावा खारिज होने की तारीख (4 मार्च 2010) से अब तक 6% सालाना ब्याज देना होगा।
  • पेनल्टी: यदि 2 महीने के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर बढ़ाकर 9% कर दी जाएगी।

Table: Summary of the Ruling

पक्षबीमा कंपनी का दावाकोर्ट का निष्कर्ष
बीमारीपुरानी बीमारी (Hypertension) छिपाई।सबूत फर्जी और मनगढ़ंत पाए गए।
आयइनकम गलत बताई गई।प्रीमियम भुगतान क्षमता से आय साबित हुई।
प्रक्रियाजांच सही थी।जांच “अनैतिक और संदिग्ध” थी।

निष्कर्ष: ग्राहकों के लिए बड़ी जीत

यह फैसला उन लाखों पॉलिसीधारकों के लिए एक ढाल है जिनके दावे बीमा कंपनियां अक्सर ‘पुरानी बीमारी’ का बहाना बनाकर खारिज कर देती हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उपभोक्ता फोरम के पास ऐसी जांचों की गहराई तक जाने और फर्जीवाड़े को पकड़ने की पूरी शक्ति है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
clear sky
30 ° C
30 °
30 °
66 %
0kmh
1 %
Fri
32 °
Sat
32 °
Sun
33 °
Mon
33 °
Tue
32 °

Recent Comments