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GPSC Answer Key Row: कैंडिडेट्स के भविष्य के साथ खेल रहे हैं…आप बिना किसी जिम्मेदारी के केवल पावर का मजा लेना चाहते हैं, पढ़ें

GPSC Answer Key Row: गुजरात हाई कोर्ट ने ‘अर्थशास्त्र’ विषय की परीक्षा की उत्तर कुंजी (Answer Key) को लेकर चल रहे विवाद में गुजरात लोक सेवा आयोग (GPSC) के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।

हाईकोर्ट के जस्टिस निर्झर एस. देसाई की बेंच ने GPSC द्वारा दाखिल नए हलफनामे (Affidavit) को “सिर्फ एक दिखावा” (Eyewash) करार दिया। कोर्ट ने कहा कि आयोग के अधिकारी खुद को अदालत से ऊपर समझ रहे हैं।कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आयोग के अधिकारियों ने अदालती आदेशों का पालन नहीं किया, तो उनके खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

मामला क्या था? (The One-Mark Dispute)

  • याचिकाकर्ता: आरती दमजीभाई रंगपरिया नामक एक उम्मीदवार ने GPSC की भर्ती परीक्षा को चुनौती दी।
  • विवाद: वह केवल एक नंबर से क्वालिफाई करने से चूक गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ पर आधारित एक प्रश्न का उत्तर आयोग की ‘की’ (Key) में गलत दिया गया है।
  • अदालती निर्देश: 20 मार्च को कोर्ट ने GPSC से पूछा था कि जिस PDF का हवाला देकर उन्होंने उत्तर सही बताया है, क्या वह प्रामाणिक (Authentic) है? साथ ही, ऐसी सामग्री के सत्यापन (Verification) के लिए आयोग की क्या नीति है?

कोर्ट की तीखी टिप्पणियां: “पावर चाहिए, जिम्मेदारी नहीं”

  • सुनवाई के दौरान जस्टिस देसाई ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
  • अवमानना का आरोप: “मेरा आदेश बहुत स्पष्ट था, लेकिन जो पूछा गया उसका जवाब नहीं दिया गया। यह अदालत की अवमानना के अलावा और कुछ नहीं है।”
  • अहंकार या अक्षमता?: कोर्ट ने पूछा, “क्या यह खराब समझ को दर्शाता है या ऐसी मानसिकता को कि आप कोर्ट से ऊपर हैं?”
  • भविष्य से खिलवाड़: “आप केवल शक्तियों का आनंद लेना चाहते हैं और उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खेलना चाहते हैं। लेकिन जब जिम्मेदारी की बात आती है, तो आप हाथ खड़े कर देते हैं।”

विशेषज्ञों पर जिम्मेदारी टालने की कोशिश

  • GPSC ने तर्क दिया कि उत्तर ‘विषय विशेषज्ञों’ (Subject Experts) द्वारा तय किए गए थे। इस पर कोर्ट ने कहा:
  • जवाबदेही: “आप अपनी भूमिका को सीमित करने वाले किस प्रावधान की बात कर रहे हैं? आप बिना किसी जिम्मेदारी के केवल पावर का मजा लेना चाहते हैं।”
  • सीमित अवसर: कोर्ट ने कहा कि बार-बार मौका देने के बावजूद आयोग सही जानकारी छिपा रहा है।

Table: Summary of the GPSC ‘Arthashastra’ Case

मुख्य बिंदुविवरण
विवादित विषयकौटिल्य का अर्थशास्त्र (Kautilya’s Arthashastra)
कोर्ट का रुखआयोग के हलफनामे से सख्त असंतुष्ट।
संभावित कार्रवाईचेयरमैन और सचिव को अवमानना का नोटिस।
अगली तारीख7 अप्रैल, 2026 (सुबह 11 बजे)

अगला कदम (Next Steps)

अदालत ने संकेत दिया है कि अगर सरकारी वकील (Government Pleader) संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो GPSC के चेयरमैन और सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया जा सकता है।

निष्कर्ष: सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही

यह मामला उन हजारों छात्रों के संघर्ष को दर्शाता है जो सरकारी परीक्षाओं में ‘गलत उत्तर कुंजी’ के कारण अपना करियर दांव पर लगा देते हैं। गुजरात हाई कोर्ट की यह सख्ती यह सुनिश्चित करने के लिए है कि संवैधानिक संस्थाएं अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय उन्हें ‘विशेषज्ञों’ की आड़ में छिपाएं नहीं।

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