Thursday, October 15, 2026
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Maintenance Victory: बुजुर्ग मां के हक में बड़ा फैसला…कहा- मेंटेनेंस ऑर्डर के खिलाफ बेटा नहीं कर सकता अपील

Maintenance Victory: ओडिशा हाई कोर्ट ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 (Senior Citizens Act) के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस ए.सी. बेहरा की बेंच ने एक 83 वर्षीय विधवा मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी (Collector) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने बेटे की अपील पर मां के भरण-पोषण पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस कानून के तहत भरण-पोषण के आदेश के खिलाफ बेटे या बच्चों को अपील करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

मामला क्या था? (The Dispute of Two Sons)

  • पृष्ठभूमि: एक 83 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने अपने दो बेटों द्वारा उपेक्षित किए जाने के बाद मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया था।
  • ट्रिब्यूनल का आदेश (फरवरी 2024): उप-जिलाधिकारी (Sub-Collector) ने एक बेटे को ₹5,000 प्रति माह देने और दूसरे बेटे को मां को पैतृक घर में रहने की अनुमति देने का निर्देश दिया था।
  • बेटे की चुनौती: एक बेटे ने इस आदेश के खिलाफ कलेक्टर के पास अपील दायर की। कलेक्टर ने अपील स्वीकार करते हुए मेंटेनेंस के आदेश को रद्द कर दिया और मामले को दोबारा सुनने का निर्देश दिया।

कोर्ट का तर्क: धारा 16 की व्याख्या (Interpretation of Section 16)

  • हाई कोर्ट ने सीनियर सिटीजन एक्ट की धारा 16 का बारीकी से अध्ययन किया।
  • अपील का अधिकार किसे?: कानून के अनुसार, अपील करने का अधिकार केवल वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता को ही दिया गया है।
  • बच्चों पर रोक: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “बच्चे या रिश्तेदार” इस अपीलीय उपचार (Appellate Remedy) का उपयोग नहीं कर सकते।
  • स्पष्ट भाषा: धारा 16 की भाषा बिल्कुल साफ और असंदिग्ध है। इसमें किसी अन्य व्यक्ति को अपील का अधिकार देना कानूनन गलत है।

कलेक्टर का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर

    • अदालत ने कलेक्टर की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की।
    • बिना अधिकार क्षेत्र: चूंकि बेटा “वरिष्ठ नागरिक” या “माता-पिता” की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए कलेक्टर के पास उसकी अपील सुनने का कोई कानूनी अधिकार (Jurisdiction) ही नहीं था।
    • कानून का उद्देश्य: यह कानून बुजुर्गों को गरिमा और सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है, न कि बच्चों को कानूनी दांव-पेंच खेलने का मौका देने के लिए।

    Table: Summary of Orissa HC Ruling

    विषयअदालत का फैसला
    धारा 16 (Senior Citizens Act)अपील का अधिकार केवल माता-पिता/बुजुर्गों को है।
    बेटे की स्थितिबेटा आदेश के खिलाफ अपील दायर नहीं कर सकता।
    कलेक्टर का फैसलाक्षेत्राधिकार न होने के कारण रद्द (Quashed)।
    नतीजाबुजुर्ग मां को ₹5,000 और घर में रहने का हक बहाल।

    निष्कर्ष: मां को मिला न्याय

    ओडिशा हाई कोर्ट ने कलेक्टर के 7 नवंबर, 2025 के आदेश को रद्द करते हुए ट्रिब्यूनल के पुराने आदेश को बहाल कर दिया है। अब बेटों को न केवल अपनी मां को आर्थिक सहायता देनी होगी, बल्कि उन्हें पैतृक घर में सम्मान के साथ रहने का अधिकार भी देना होगा।

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