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Missing Children: लापता बच्चों की तलाश के लिए बनेगा ‘नेशनल DNA बैंक’?…केंद्र से पूछा— कैसे मिलेगा बिछड़ों को परिवार?

Missing Children: सुप्रीम कोर्ट ने लापता बच्चों की पहचान और उनकी घर वापसी से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए इसे “अत्यंत संवेदनशील” (Very Sensitive) मुद्दा करार दिया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस समस्या के समाधान के लिए एक आधुनिक और वैज्ञानिक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह याचिका देश में हजारों लापता और छुड़ाए गए (Rescued) बच्चों की पहचान सुनिश्चित करने और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने के लिए एक वैज्ञानिक तंत्र विकसित करने की मांग करती है।

याचिका की मुख्य मांगें (Key Demands of the PIL)

  • याचिकाकर्ता ने केंद्र और राज्य सरकारों को निम्नलिखित निर्देश देने की मांग की है।
  • नेशनल DNA और बायोमेट्रिक सिस्टम: एक ऐसा राष्ट्रीय तंत्र बनाया जाए जहाँ लापता और बचाए गए बच्चों का DNA और बायोमेट्रिक डेटा (जैसे उंगलियों के निशान) सुरक्षित रखा जा सके।
  • अनिवार्य DNA सैंपलिंग: सभी अज्ञात बचाए गए बच्चों और अपने बच्चों की तलाश कर रहे माता-पिता का अनिवार्य रूप से (सहमति प्रोटोकॉल के साथ) DNA टेस्ट कराया जाए ताकि उनका वैज्ञानिक मिलान (Matching) हो सके।
  • डेटाबेस का एकीकरण (Integration): पुलिस रिकॉर्ड, शेल्टर होम, बाल कल्याण समितियों (CWC) और मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (AHTU) के पास मौजूद अलग-अलग डेटा को एक केंद्रीकृत ‘रियल-टाइम’ नेशनल फ्रेमवर्क से जोड़ा जाए।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: केवल समस्या नहीं, समाधान भी बताएं

  • CJI सूर्यकांत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए याचिकाकर्ता के वकील को कई चीजें बताए।
  • होमवर्क की जरूरत: “मुद्दा निश्चित रूप से बहुत, बहुत संवेदनशील है… आप अपनी टीम से थोड़ा ‘होमवर्क’ करने को कहें और हमें एक फ्रेमवर्क (ढांचा) दें कि इसका समाधान क्या होना चाहिए।”
  • सहयोग तंत्र (Collaborative Mechanism): कोर्ट ने सुझाव दिया कि यह सोचें कि विभिन्न संस्थानों को एक साझा मंच पर कैसे लाया जा सकता है और उनके बीच तालमेल कैसे बढ़ाया जा सकता है।

‘एंटी-ट्रैफिकिंग टास्क फोर्स’ का प्रस्ताव

याचिका में एक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय बाल संरक्षण और मानव तस्करी विरोधी टास्क फोर्स के गठन की भी मांग की गई है ताकि अंतर-राज्यीय समन्वय (Inter-state coordination) सुनिश्चित हो सके। लापता और तस्करी किए गए बच्चों की समयबद्ध जांच और बचाव हो सके। बचाए गए बच्चों के पुनर्वास, मुआवजे और लंबे समय तक उनकी निगरानी के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अधिसूचित की जा सके।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
अदालतसुप्रीम कोर्ट (बेंच: CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची)।
प्रमुख मांगनेशनल DNA और बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली का गठन।
कोर्ट का आदेशयाचिकाकर्ता को 4 सप्ताह के भीतर समाधान का ‘फ्रेमवर्क’ पेश करने को कहा।
उद्देश्यलापता बच्चों की पहचान और परिवार के साथ पुनर्मिलन को वैज्ञानिक बनाना।

तकनीक से थमेगी मानव तस्करी?

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि पारंपरिक पुलिस जांच के साथ-साथ अब आधुनिक विज्ञान और तकनीक (जैसे DNA और बायोमेट्रिक्स) को बाल संरक्षण के क्षेत्र में अपनाना अनिवार्य हो गया है। एक एकीकृत डेटाबेस न केवल बच्चों को उनके माता-पिता से मिलाने में मदद करेगा, बल्कि मानव तस्करी के बड़े रैकेटों को तोड़ने में भी एक शक्तिशाली हथियार साबित होगा।

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