Tuesday, September 29, 2026
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Billing Dispute: बिना टेस्ट किए ₹2,500 चार्ज किया, पता चलने पर लौटाया…ऐसा क्यूं कहा गया, अस्पताल बिल में गड़बड़ी करे तो धोखाधड़ी नहीं, पढ़ें

Billing Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कोलकाता के एक अस्पताल और उसके चेयरमैन के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है।

बारासात स्थित नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल से जुड़ा मामला

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के 2023 के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें अस्पताल के खिलाफ प्रथम दृष्टया आपराधिक मामला चलने की बात कही गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के बिलिंग विवाद (Billing Dispute) या सेवाओं में कमी से जुड़ी शिकायतों को ‘आपराधिक अपराध’ (Criminal Offence) नहीं माना जा सकता; ये मुख्य रूप से दीवानी (Civil) प्रकृति के मामले हैं। यह मामला 2021 में बारासात स्थित नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल से जुड़ा है। एक व्यक्ति ने शिकायत की थी कि अस्पताल ने उसकी मां के इलाज के दौरान एक ‘HRCT टेस्ट’ के लिए ₹2,500 चार्ज किए, जो कभी किया ही नहीं गया था। साथ ही मेडिकल रिकॉर्ड समय पर न देने और कर्मचारियों द्वारा बदतमीजी करने के भी आरोप लगाए गए थे।

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धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का अभाव

  • मजिस्ट्रेट कोर्ट ने IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 120B (साजिश) के तहत नोटिस जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इन धाराओं को खारिज कर दिया।
  • धारा 420 (Cheating): धोखाधड़ी के लिए शुरू से ही “बेईमानी का इरादा” होना चाहिए। यहाँ बिलिंग की गड़बड़ी एक “लापरवाही” (Inadvertence) लग रही है, न कि कोई सोची-समझी साजिश, क्योंकि अस्पताल ने गलती सुधारी और रिफंड की पेशकश भी की।
  • धारा 406 (Criminal Breach of Trust): कोर्ट ने कहा कि अस्पताल के बिल का भुगतान एक व्यावसायिक लेनदेन (Commercial Transaction) है, इसमें किसी संपत्ति का “विश्वास आधारित हस्तांतरण” (Entrustment) नहीं होता।

सिविल बनाम क्रिमिनल उपचार

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मेडिकल रिकॉर्ड नहीं दिए गए या बिल में त्रुटि थी, तो उसके लिए अन्य कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं।
  • दीवानी कानून (Civil Law): पीड़ित पक्ष मुआवजे या हर्जाने के लिए सिविल कोर्ट जा सकता है।
  • नियामक संस्थाएं: पश्चिम बंगाल क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2017 या मेडिकल काउंसिल के नियमों के तहत शिकायत की जा सकती है।
  • आपराधिक कानून का दुरुपयोग: कोर्ट ने कहा कि अगर शिकायत के तथ्यों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए, तब भी वे कोई आपराधिक अपराध नहीं दर्शाते।

‘साजिश’ (Conspiracy) का तर्क खारिज

अदालत ने तर्क दिया कि चूंकि धोखाधड़ी और विश्वासघात के मुख्य आरोप ही नहीं टिकते, इसलिए धारा 120B (आपराधिक साजिश) का आरोप स्वतंत्र रूप से नहीं चल सकता। किसी अवैध कार्य को करने के लिए पूर्व सहमति का कोई सबूत नहीं मिला।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणकोर्ट का निष्कर्ष / स्पष्टीकरण
मुख्य शिकायतबिना टेस्ट किए ₹2,500 चार्ज करना।
अस्पताल का पक्षमानवीय भूल थी, जिसे सुधार कर रिफंड दिया गया।
कोर्ट का रुखबिलिंग की गड़बड़ी को आपराधिक ‘जालसाजी’ नहीं कह सकते।
राहतअस्पताल और चेयरमैन के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द।
भविष्य का विकल्पशिकायतकर्ता दीवानी (Civil) या वैधानिक उपचार के लिए स्वतंत्र है।

कानूनी प्रक्रिया का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए राहत भरा है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रशासनिक या बिलिंग संबंधी गलतियों के लिए डॉक्टरों या अस्पताल प्रबंधन को सीधे आपराधिक मुकदमों में नहीं घसीटा जाए। अदालत ने साफ कर दिया है कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल केवल वास्तविक अपराधों के लिए होना चाहिए, न कि सेवा संबंधी शिकायतों के दबाव के लिए।

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