Friday, May 29, 2026
HomeSupreme CourtRoad Accident: 9 बिंदुओं में ट्रॉमा केयर सिस्टम होगा एक्टिव…हादसे के पीड़ित...

Road Accident: 9 बिंदुओं में ट्रॉमा केयर सिस्टम होगा एक्टिव…हादसे के पीड़ित मरीज को मुफ्त इलाज दिलाएं सरकार, पढ़ें क्या-क्या दिए दिशा-निर्देश

Road Accident:सुप्रीम कोर्ट ने देश में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर एक ऐतिहासिक और संवेदी फैसला सुनाया है।

सेवलाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामले में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने देश भर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में एकसमान सड़क दुर्घटना ट्रॉमा केयर सिस्टम (Uniform Road Accident Trauma Care System) के निर्माण के लिए 9 महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश (Slew of Directions) जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट रूप से घोषित किया है कि “ट्रॉमा केयर (आपातकालीन चिकित्सा देखभाल) का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत ‘जीवन के अधिकार’ (Right to Life) का एक अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने सेवलाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ (SaveLife Foundation vs. Union of India) मामले में यह मील का पत्थर साबित होने वाला आदेश पारित किया।

शीघ्रता ही जीवन रक्षक दवा है (Swiftness is Medicine)

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दुर्घटना के बाद के पहले महत्वपूर्ण घंटे (Golden Hour) के महत्व को रेखांकित करते हुए बेहद मार्मिक टिप्पणी की। कहा, जब कोई व्यक्ति दुर्घटना का शिकार होता है, तो वह गहरे सदमे, भटकाव और लाचारी की स्थिति में होता है। ऐसे समय में, चिकित्सा हस्तक्षेप के बिना बीता हर एक मिनट उसके जीवित रहने की संभावना को काफी कम कर देता है। ऐसी आपातकालीन स्थिति में, शीघ्रता (Swiftness) ही वास्तव में सबसे बड़ी दवा है। कोर्ट ने माना कि यद्यपि केंद्र सरकार ने ‘पीएम राहत’ (PM RAHAT), ‘राह-वीर योजना’, ‘गुड समैरिटन रूल्स’ और ‘हेल्पलाइन 112′ जैसी नीतियां बनाई हैं, लेकिन राज्यों के स्तर पर इनका जमीनी क्रियान्वयन बेहद बिखरा हुआ और कमजोर है। अदालत ने एक बॉटम-अप अप्रोच’ (जमीनी स्तर से शुरू होने वाली व्यवस्था) अपनाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी 9 बड़े दिशा-निर्देश (The 9 Directives)

आपातकालीन हेल्पलाइनों का एकीकरण (Unified Helpline 112): सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अगले 3 महीनों के भीतर सभी मौजूदा आपातकालीन और एम्बुलेंस हेल्पलाइनों (जैसे 100, 101, 108, 102, 1033 और 1091) को पूरी तरह से एकीकृत करके एकल नंबर ‘112’ में तब्दील करें। इसके लिए बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाए।

‘नेक मददगारों’ के लिए शिकायत निवारण प्रणाली (Good Samaritan System): 3 महीने के भीतर राज्य और जिला स्तर पर डिजिटल और भौतिक दोनों माध्यमों से ‘गुड समैरिटन शिकायत निवारण प्रणाली’ स्थापित की जाए। नामित नोडल अधिकारी हर महीने बैठक करेंगे और उसकी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करेंगे ताकि दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वालों को पुलिस या अस्पताल परेशान न कर सकें।

मानकीकृत चिकित्सा बचाव प्रोटोकॉल (Standardised Rescue Protocol): केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (MoHFW) और सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) को 3 महीने के भीतर ट्रॉमा मामलों के लिए एक मानक चिकित्सा बचाव प्रोटोकॉल अधिसूचित करना होगा, जिसे अगले 3 महीनों में राज्यों को अपने यहां लागू करना होगा।

एम्बुलेंस के लिए कड़े नियम (Ambulance Compliance): देश की सभी एम्बुलेंसों को अनिवार्य रूप से ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड-125 (AIS-125) का पालन करना होगा। उनमें जीपीएस (GPS) और ‘व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस’ होना अनिवार्य है, जो सीधे 112 हेल्पलाइन से जुड़े हों। एम्बुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम (पहुंचने का समय) और उपकरणों का नियमित ऑडिट होगा।

पैरामेडिक्स के लिए नया पाठ्यक्रम (EMT Curriculum): राज्यों को ‘नेशनल कमिशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स’ (NCAHP) द्वारा अधिसूचित ईएमटी (Emergency Medical Technician) पाठ्यक्रम को पैरामेडिक्स के लिए तुरंत अपनाना होगा, ताकि प्रशिक्षित स्टाफ तैनात हो सके।

राष्ट्रीय ट्रॉमा रजिस्ट्री का गठन (Trauma Registries): केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को 8 सप्ताह में डेटा फॉर्मेट गाइडलाइंस जारी करनी होंगी, जिसके बाद सभी राज्यों को 4 महीनों के भीतर अपनी ‘स्टेट ट्रॉमा रजिस्ट्री’ बनाकर उसे ‘नेशनल रजिस्ट्री’ से जोड़ना होगा।

हाईवे के बाहर भी स्वास्थ्य सुविधाओं का अपग्रेडेशन: अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं की ग्रेडिंग और उनका सुदृढ़ीकरण केवल राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे स्टेट हाईवे, मुख्य जिला सड़कों और शहरी व अर्ध-शहरी (Peri-urban) क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा।

पीएम राहत (PM RAHAT) का अनिवार्य क्रियान्वयन: अदालत ने सभी राज्यों को 3 महीने के भीतर अस्पतालों का चिन्हांकन पूरा करने, ‘ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम’ पर राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों को शामिल करने और जिला पुलिस को इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (e-DAR) सिस्टम पर तैनात करने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसा न करना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 का उल्लंघन माना जाएगा।

कैशलेस इलाज योजना (Cashless Treatment Scheme): जिन राज्यों ने अभी तक सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना, 2025 को लागू नहीं किया है, उन्हें इसे 3 महीनों के भीतर पूरी तरह से जमीन पर उतारना होगा।

अदालत की सख्त निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश की गंभीरता को देखते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) को इस आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया है। सभी राज्यों को दी गई समय-सीमा के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action-Taken Report) कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करनी होगी।सर्वोच्च न्यायालय इस मामले की प्रगति की समीक्षा करने के लिए 4 महीने बाद दोबारा सुनवाई करेगा।

मामले की कानूनी पैरवी (Legal Representation)

  • भारत संघ (केंद्र सरकार) की ओर से: अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी।
  • याचिकाकर्ता (SaveLife Foundation) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और अधिवक्ता मालविका कपिला।

केस मैट्रिक्स (Case Summary at a Glance)

कानूनी पैरामीटरविवरण
सर्वोच्च अदालत बेंचजस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर
ऐतिहासिक घोषणाट्रॉमा केयर (त्वरित इलाज) का अधिकार = अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार)
समय-सीमा (Deadline)अधिकांश प्रमुख सुधारों (जैसे 112 एकीकरण, कैशलेस स्कीम, जीपीएस एम्बुलेंस) के लिए 3 महीने का समय।
मुख्य फोकसदुर्घटना के बाद रिस्पॉन्स टाइम को कम करना और कागजी नीतियों को जमीन पर लागू करना।

निष्कर्ष (Takeaway)

भारत में हर साल सड़क हादसों में लाखों लोग सिर्फ इसलिए जान गंवा देते हैं क्योंकि उन्हें समय पर एम्बुलेंस या प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वास्थ्य को केवल एक नीतिगत मुद्दा न मानकर एक संवैधानिक अधिकार बनाता है। एकीकृत 112 नंबर और कैशलेस इलाज जैसी व्यवस्थाएं अगर तीन महीने के भीतर जमीन पर उतरती हैं, तो यह भारतीय सड़कों पर सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा के इतिहास में सबसे बड़ा युगांतकारी सुधार साबित होगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
mist
29 ° C
29 °
29 °
74 %
4.6kmh
20 %
Thu
30 °
Fri
42 °
Sat
41 °
Sun
42 °
Mon
44 °

Recent Comments