Sunday, August 30, 2026
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TET Exam: सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी पास होना जरूरी है…टीईटी एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवैधानिक आवश्यकता है, पढ़िए यह दो टूक निर्देश

TET Exam: सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार और शिक्षकों की योग्यता को लेकर एक बेहद ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है।

शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने सेवारत शिक्षकों (In-Service Teachers), शिक्षक संघों और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा दायर 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं (Review Petitions) को गुण-दोष (Merits) के आधार पर पूरी तरह खारिज कर दिया। हालांकि, व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए कोर्ट ने शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी (TET) योग्यता हासिल करने की समयसीमा को एक साल के लिए आगे बढ़ा दिया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की एक संवैधानिक आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु (Core Judicial Observations)

बच्चों के भविष्य की कीमत पर समझौता नहीं: शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में बच्चों के भविष्य और शिक्षा के स्तर को सर्वोपरि माना। खंडपीठ ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) बच्चों को केंद्र में रखकर बनाया गया कानून (Child Centric Legislation) है और इसे इसी नजरिए से पढ़ा जाना चाहिए। शिक्षकों की सेवा की निरंतरता, बच्चों के शैक्षिक भविष्य की कीमत पर नहीं हो सकती।

कोई भी सरकारी नियम मुख्य कानून से ऊपर नहीं: शिक्षकों का तर्क था कि विभिन्न राज्यों के नियमों या अधिसूचनाओं में उन्हें छूट दी गई थी। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी अधीनस्थ कानून (Subordinate Legislation या सरकारी नोटिफिकेशन), संसद द्वारा बनाए गए मूल कानून (RTE Act की धारा 23) के स्पष्ट आदेश को बदल या दबा नहीं सकता।

अनुच्छेद 21-A के तहत संवैधानिक आवश्यकता: अदालत ने दोहराया कि संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत बच्चों को मिलने वाली “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा” (Quality Education) सीधे तौर पर शिक्षकों की योग्यता से जुड़ी है। इसलिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता को किसी भी स्थिति में कमजोर या हल्का नहीं किया जा सकता।

समयसीमा में विस्तार: अब 31 अगस्त 2028 तक का मौका

राहत: अदालत ने माना कि यदि एक साथ बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों को नौकरी से हटा दिया गया, तो स्कूलों का कामकाज ठप हो जाएगा और अंततः बच्चों की पढ़ाई का ही नुकसान होगा। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए यह राहत दी।

नई डेडलाइन: टीईटी (TET) पास करने की समयसीमा को 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2028 कर दिया गया है।

अंतिम चेतावनी: कोर्ट ने बिल्कुल साफ और स्पष्ट लहजे में कह दिया है कि इसके बाद समयसीमा बढ़ाने की किसी भी प्रार्थना या याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। यह आखिरी मौका है।

पदोन्नति (Promotion) के लिए भी जरूरी: जिन शिक्षकों की सेवा के 5 साल से अधिक बचे हैं, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए इसे पास करना होगा। वहीं, जो शिक्षक प्रमोशन (प्रदोन्नति) चाहते हैं, उन्हें अपनी बची हुई सेवा अवधि की परवाह किए बिना टीईटी पास करना ही होगा।

राज्यों को निर्देश: साल में दो बार कराएं परीक्षा

शिक्षकों को टीईटी पास करने का पर्याप्त अवसर मिल सके, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और सक्षम अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। “सभी राज्य पीरियोडिकली (नियमित रूप से) और अधिमानतः साल में दो बार (लगभग छह महीने के अंतराल पर) टीईटी (TET) परीक्षा का आयोजन करें, ताकि सेवारत शिक्षकों को योग्यता हासिल करने का उचित और पर्याप्त अवसर मिल सके।”

मामले की पृष्ठभूमि (Background)

यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के ही एक पुराने फैसले ‘अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025)’ से उपजा था। उस फैसले में कोर्ट ने अनिवार्य किया था कि सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी पास होना जरूरी है और इसके लिए 1 सितंबर 2025 से दो साल का समय दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ राज्यों और शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका तर्क था कि यह फैसला उनके साथ अन्याय है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Audi Alteram Partem) का उल्लंघन करता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने इस बार खुली अदालत (Open Court) में नए सिरे से सभी वरिष्ठ वकीलों (जैसे डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी, सलमान खुर्शीद आदि) की दलीलों को सुना और अंततः समयसीमा में संशोधन के साथ पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया।

फैसले का मुख्य सार (Core Matrix)

विधिक बिंदुपुराना निर्देश (2025 का फैसला)सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश (2026)
TET की अनिवार्यतासभी इन-सर्विस शिक्षकों के लिए अनिवार्य।अनिवार्यता बरकरार, कोई छूट नहीं मिलेगी।
अनुपालन की अंतिम तिथि31 अगस्त 202731 अगस्त 2028 (एक साल का विस्तार)
आगे विस्तार की गुंजाइशपुनर्विचार के अधीन थी।कैटेगोरिकल डायरेक्शन: आगे कोई समय नहीं मिलेगा।
राज्यों की जिम्मेदारीपरीक्षा आयोजित करना।साल में कम से कम 2 बार परीक्षा कराना अनिवार्य।

निष्कर्ष (Takeaway)

यह फैसला देश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ संदेश दे दिया है कि सरकारी नौकरियों की सुरक्षा या शिक्षकों के हितों की रक्षा के नाम पर देश के बच्चों के भविष्य और शिक्षा के स्तर के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सेवारत शिक्षकों के पास अब अपनी योग्यता साबित करने के लिए अगस्त 2028 तक का अंतिम अवसर है।

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