Wednesday, September 16, 2026
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Illusory Site: कर्नाटक के पूर्व सांसद की बेटी को बीडीए साइट का आवंटन क्यों रद्द किया…कहा, ऊंचे पदों पर बैठे लोग निजी स्वार्थ न साधें

Illusory Site: कर्नाटक हाई कोर्ट ने सार्वजनिक जीवन में सुशासन और राजनीतिक भाई-भतीजावाद (Nepotism) पर करारी चोट करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

बेंगलुरु विकास प्राधिकरण की संपत्ति आवंटन का मामला

हाईकोर्ट के जस्टिस डी.के. सिंह और जस्टिस टी.एम. नदाफ की खंडपीठ ने पूर्व लोकसभा सांसद और कर्नाटक विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डी.बी. चंद्रेगौड़ा की बेटी पल्लवी राम को किए गए बीडीए साइट के आवंटन को पूरी तरह अवैध, मनमाना और धोखाधड़ी का मामला करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने या ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों के वीआईपी (VIP) बच्चे होने मात्र से बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) की संपत्तियों के आवंटन में कोई अतिरिक्त तरजीह या पक्षपात (Favouritism) नहीं किया जा सकता। आवंटन का एकमात्र पैमाना कानून और उसके तहत तय नियम ही होने चाहिए।

यह रही अदालत की टिप्पणी

संवैधानिक और राजनीतिक पदों की शुचिता पर बात करते हुए हाई कोर्ट ने बेहद तीखी टिप्पणी की। कहा, अब वह समय आ गया है जब सार्वजनिक जीवन में सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों को आत्मनिरीक्षण (Introspect) करना चाहिए कि क्या वे वास्तव में नागरिकों की सेवा, उनके अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने का काम कर रहे हैं या फिर अपने निजी हितों को पोषित करने में लगे हैं। एक पिता (तत्कालीन सांसद) द्वारा अपनी बेटी के लिए लिखा गया सिफारिशी पत्र निजी स्वार्थ को बढ़ावा देने का एक ऐसा उदाहरण है, जो उनके द्वारा ली गई पद की गोपनीयता की शपथ के बिल्कुल खिलाफ है।

मामला क्या था? (‘G’ कैटेगरी के तहत वीआईपी आवंटन का खेल)

यह कानूनी विवाद वर्ष 2009-2010 के दौरान बेंगलुरु की एक बेशकीमती जमीन के आवंटन से जुड़ा है।

सांसद पिता की सिफारिश (2009): तत्कालीन लोकसभा सांसद डी.बी. चंद्रेगौड़ा ने सूबे के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर अपनी बेटी पल्लवी राम के लिए ‘जी’ कैटेगरी (G-Category) के तहत एक ‘स्ट्रे साइट’ (Stray Site) आवंटित करने का अनुरोध किया। दलील दी गई कि उनकी बेटी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय है और एक स्कूल चलाती है। इस सिफारिश के आधार पर 2010 में बीडीए ने पल्लवी राम को साइट आवंटित कर दी।

आम नागरिक की जमीन पर कब्जा: बीडीए ने पल्लवी को जो जमीन आवंटित की, उसका एक हिस्सा के.एन. प्रकाश (याचिकाकर्ता) की निजी संपत्ति का था। प्रकाश के पास अपनी जमीन का वैध खाता प्रमाण पत्र, एनओसी (NOC) थी और वे नियमित रूप से बीबीएमपी (BBMP) को प्रॉपर्टी टैक्स दे रहे थे। अपनी जमीन पर राजनीतिक रसूख के कारण हुए इस अतिक्रमण के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की।

हाई कोर्ट का कानूनी चाबुक: नियम 5 और 10 की धज्जियां उड़ाई गईं

अदालत ने बीडीए (साइट आवंटन) नियम, 1984 के नियम 5 और 10 का बारीकी से अध्ययन किया, जो यह तय करते हैं कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े किन लोगों को ऐसी साइटें मिल सकती हैं। कोर्ट ने पाया कि पल्लवी राम इस आवंटन के लिए हर मोर्चे पर अपात्र (Ineligible) थीं।

राजनेता की बेटी होना कोई योग्यता नहीं: कोर्ट ने साफ कहा कि किसी राजनेता की बेटी होना या आजीविका कमाने के लिए स्कूल चलाना किसी को ‘सार्वजनिक जीवन का विशिष्ट व्यक्ति’ नहीं बना देता जिसके आधार पर उसे सरकारी जमीन का तोहफा दिया जाए। बीडीए कमेटी ने नियमों को ताक पर रखकर केवल उनके पिता के रसूख को देखा।

पहले से मौजूद संपत्तियां छिपाई गईं: नियम 10 के अनुसार, जिस व्यक्ति या उसके परिवार के पास बेंगलुरु महानगरीय क्षेत्र में पहले से कोई मकान या साइट हो, वह बीडीए साइट के लिए पात्र नहीं है। कोर्ट ने रिकॉर्ड खंगालते हुए पाया कि पल्लवी राम के पिता को पहले ही एक बीडीए साइट आवंटित की जा चुकी थी। इसके अलावा, उनकी मां ने बेंगलुरु के पास ही अपने बेटे (पल्लवी के भाई) को एक फ्लैट गिफ्ट किया था।

कागजों में हेरफेर (Illusory Site): कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पल्लवी राम को जो साइट आवंटित की गई थी, वह कागजों में पूरी तरह काल्पनिक (Illusory) थी, क्योंकि बीडीए के रिकॉर्ड में उस साइट के निर्माण या सृजन का कोई वैध रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं था।

विश्लेषण: बीडीए आवंटन नियम और अदालत का फैसला

कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चाहे कोई निर्वाचित प्रतिनिधि हो या सरकारी सेवा का शीर्ष अधिकारी, उसे अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं को पूरा करने के बजाय कानून के दायरे में काम करना होगा।

कानूनी मानदंड / नियमबीडीए (BDA) नियमावली का प्रावधानपल्लवी राम मामले में हकीकत और अदालती निष्कर्ष
नियम 5 (Rule 5)सार्वजनिक जीवन में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को ‘G’ कैटेगरी की साइटें दी जा सकती हैं।एक राजनेता की बेटी होना या निजी स्कूल चलाना इस श्रेणी के तहत विशिष्ट योगदान नहीं माना जा सकता।
नियम 10 (Rule 10)बेंगलुरु में पहले से खुद का या परिवार का घर/जमीन होने पर पूर्ण प्रतिबंध।पिता के नाम पहले से बीडीए साइट थी और मां के पास बेंगलुरु क्षेत्र में फ्लैट था। आवंटन पूरी तरह अवैध था।
जनहित बनाम निजी हितजनसेवकों से कानून के अनुसार निष्पक्ष काम करने की अपेक्षा होती है।वीआईपी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए बीडीए ने एक आम टैक्सपेयर (याचिकाकर्ता) की जमीन का हिस्सा छीन लिया, जो न्याय का गला घोंटने जैसा है।

अंतिम निष्कर्ष

कर्नाटक हाई कोर्ट ने बीडीए द्वारा पल्लवी राम को जारी किए गए आवंटन आदेश को पूरी तरह से निरस्त (Set Aside) कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता के.एन. प्रकाश की भूमि के उस हिस्से को सुरक्षित घोषित कर दिया, जिसे इस अवैध आवंटन में शामिल कर लिया गया था।

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