LOAN NOC: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, पंजाब ने बैंकों द्वारा लोन चुकता होने के बाद भी की जाने वाली लापरवाही और ग्राहकों के उत्पीड़न पर देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) पर कड़ा रुख अपनाया है।
बैंक के क्रियाकलाप के चलते ग्राहक को मानसिक परेशानी आई
आयोग के अध्यक्ष जगदीश्वर कुमार चोपड़ा और सदस्य मनदीप कौर की पीठ ने 3 जून 2026 को दिए अपने आदेश में बैंक को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक प्रताड़ना के लिए मुआवजा देने के साथ-साथ उनके सिबिल (CIBIL) रिकॉर्ड को भी तुरंत दुरुस्त करे। फोरम ने एक कार लोन खाता पूरी तरह बंद होने और एनओसी (NOC) मिलने के बाद भी खाते से बार-बार गलत तरीके से ईएमआई (EMI) काटने के प्रयास और बाउंसिंग चार्ज वसूलने का दोषी पाते हुए SBI पर ₹1 लाख का भारी जुर्माना लगाया है।
फोरम ने बैंक की यह कहकर की खिंचाई
फोरम ने बैंक की खिंचाई करते हुए अपने फैसले में कहा, लोन खाता बंद होने के बाद भी बार-बार NACH मैंडेट (ऑटो-डेबिट) के लिए रिक्वेस्ट भेजना विपक्षी दल (SBI) की घोर लापरवाही और सेवा में कमी (Deficiency in Service) को स्पष्ट रूप से स्थापित करता है। बैंक की इस गलती के कारण ट्रांजैक्शन डिक्लाइन हुआ और शिकायतकर्ता के खाते पर ₹590 का बाउंसिंग चार्ज थोप दिया गया। बैंक के इस मनमाने और लापरवाह कृत्य के कारण शिकायतकर्ता को न केवल वित्तीय नुकसान हुआ, बल्कि वह लगातार अपना CIBIL स्कोर खराब होने के डर और गंभीर मानसिक तनाव में जीने को मजबूर हुआ।
मामला क्या था? (लोन बंद, NOC जेब में, फिर भी कटती रही EMI)
पंजाब के रहने वाले 57 वर्षीय संजीव कुमार नैय्यर के साथ घटी यह घटना बैंकों की तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है।
लोन और नियमित भुगतान: नैय्यर ने जनवरी 2021 में मारुति सुजुकी सेलेरियो कार खरीदने के लिए एसबीआई से 2 लाख रुपये का कार लोन लिया था, जिसकी मासिक किस्त (EMI) 4100 रुपये थी। उन्होंने बिना किसी डिफॉल्ट के हर महीने नियमित रूप से किस्त चुकाई।
खाता बंद और NOC: 10 नवंबर 2025 को उन्होंने लोन की पूरी बकाया राशि एकमुश्त चुका दी। बैंक ने खाता बंद कर दिया और संबंधित शाखा प्रबंधक के हस्ताक्षर व मोहर के साथ उन्हें बाकायदा नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) भी जारी कर दिया।
बैंक की लापरवाही का सिलसिला: लोन बंद होने के बावजूद, एसबीआई ने दिसंबर 2025 और फिर जनवरी 2026 में उनके खाते से 4100 रुपये की ईएमआई काट ली। शिकायत दर्ज कराने पर बैंक ने यह राशि वापस (Reverse) तो कर दी और आश्वासन दिया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा, लेकिन बैंक का सिस्टम नहीं सुधरा।
₹590 का गलत चार्ज: 20 जनवरी 2026 को बैंक ने फिर से ऑटो-डेबिट (NACH Mandate) के जरिए ईएमआई वसूलने का प्रयास किया। इस बार खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण ट्रांजैक्शन बाउंस हो गया और एसबीआई ने नैय्यर पर ही ₹590 का बाउंसिंग चार्ज ठोक दिया। इसके बाद फरवरी 2026 में भेजे गए कानूनी नोटिस का भी बैंक ने कोई जवाब नहीं दिया।
विश्लेषण: उपभोक्ता फोरम का सख्त आदेश मैट्रिक्स
फोरम ने माना कि बैंक की लापरवाही के कारण एक वरिष्ठ नागरिक को बार-बार बैंक के चक्कर काटने पड़े, जिससे उनके कीमती समय की बर्बादी हुई और सामाजिक रूप से अपमानित होना पड़ा। अदालत ने एसबीआई को 45 दिनों के भीतर निम्नलिखित आदेशों का पालन करने का निर्देश दिया है।
| उपभोक्ता फोरम का निर्देश | वित्तीय देनदारी और दंडात्मक कार्रवाई |
| गलत चार्ज की वापसी | बैंक द्वारा अवैध रूप से वसूले गए ₹590 का पूरा रिफंड। |
| मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा | बैंक के मनमाने रवैये और मानसिक तनाव के एवज में ₹1,00,000 का मुआवजा। |
| मुकदमेबाजी का खर्च | शिकायतकर्ता को कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में ₹10,000 का भुगतान। |
| CIBIL रिकॉर्ड का सुधार | यदि इस गलत ऑटो-डेबिट बाउंस की वजह से शिकायतकर्ता का क्रेडिट (CIBIL) स्कोर प्रभावित हुआ है, तो बैंक उसे अपने खर्च पर तुरंत सुधारे। |

