Fake Advocate: सुप्रीम कोर्ट में देश की कानूनी प्रणाली की विश्वसनीयता और वकालत के पेशे की गरिमा को बनाए रखने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी सुधार वाली याचिका दायर की गई है।
बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से याचिका दायर
चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने इस याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए इसे एक ‘अनोखा और अनूठा सुधार’ माना। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के बड़े कदम को उठाने से पहले सभी संबंधित पक्षों (Stakeholders) के विचारों को सुनना बेहद आवश्यक होगा। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर वकीलों के लिए आधार (Aadhaar) जैसी एक केंद्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाने की मांग की है, ताकि रियल-टाइम में किसी भी वकील के दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) किया जा सके और फर्जी कानूनी प्रैक्टिस करने वालों पर लगाम लगाई जा सके।
सीजेआई की टिप्पणी ध्यान से पढ़िए
सीजेआई सूर्य कांत ने मामले की व्यापकता को रेखांकित करते हुए मौखिक टिप्पणी की। कहा, यह एक नया और बेहतरीन सुधार प्रतीत होता है, लेकिन इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए देश की सभी लॉ यूनिवर्सिटीज (Law Universities) को इस मामले में पक्षकार बनाना होगा। उन्हें यह स्पष्ट और सार्वजनिक करना होगा कि उनके संस्थानों से डिग्री लेने वाले वास्तविक और वैध लॉ ग्रेजुएट्स कौन हैं।”
क्या है प्रस्तावित NDRLP? (वकीलों के लिए ‘यूनिक डिजिटल पहचान’)
बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने अपनी याचिका [बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ व अन्य] में ‘नेशनल डिजिटल रजिस्ट्री फॉर द लीगल प्रोफेशन ऑफ इंडिया’ (NDRLP) की स्थापना का प्रस्ताव रखा है।
यूनिक आइडेंटिफायर (Unique ID): इस तकनीक-आधारित केंद्रीय डेटाबेस के तहत देश के प्रत्येक पंजीकृत अधिवक्ता को एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक आईडी) आवंटित की जाएगी।
रियल-टाइम वेरिफिकेशन: इस रजिस्ट्री में वकील की शैक्षणिक योग्यता, बार काउंसिल का नामांकन (Enrolment Status) और उनका अनुशासनात्मक रिकॉर्ड (Disciplinary Record) दर्ज होगा। कोई भी वादी (Litigant), कोर्ट या अथॉरिटी एक क्लिक पर यह जांच सकेगी कि उनके सामने खड़ा व्यक्ति असली वकील है या नहीं।
सोशल मीडिया आचरण पर लगाम: याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह सोशल मीडिया पर वकीलों के आचरण, भ्रामक आत्म-प्रचार और मुवक्किलों को रिझाने (Solicitation) की प्रवृत्तियों को रोकने के लिए एक व्यापक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करे।
‘सिस्टम फेलियर’: क्यों पड़ी इस डिजिटल रजिस्ट्री की जरूरत?
बीएआई के अध्यक्ष प्रशांत कुमार और अधिवक्ता विपिन नायर के माध्यम से दायर इस याचिका में देश की कानूनी प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़े ‘ढांचागत संकट’ (Structural Crisis) का दावा किया गया है।
टुकड़ों में बंटा सिस्टम: वर्तमान में देश के 23 अलग-अलग स्टेट बार काउंसिल (State Bar Councils) वकीलों का नामांकन रिकॉर्ड रखते हैं। इनमें आपस में कोई रियल-टाइम तालमेल या ‘इंटर-ऑपरेबिलिटी’ नहीं है।
फर्जीवाड़ा और अभद्र टिप्पणियां: कोई भी आम नागरिक या अदालत तुरंत यह पता नहीं लगा सकती कि कोई व्यक्ति विधिक रूप से प्रमाणित है या नहीं। सीजेआई सूर्य कांत ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा, “हम आपको ऐसे उदाहरण (सैंपल) दिखा सकते हैं जहां सोशल मीडिया या सार्वजनिक तौर पर ऐसे घटिया और गंदे बयान दिए जा रहे हैं जिनका कानून या वकालत से कोई लेना-देना ही नहीं है, लेकिन वे खुद को वकील प्रोजेक्ट करते हैं।”
युवा वकीलों को मुख्यधारा में लाने पर जोर
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कानूनी पेशे को मजबूत करने के लिए युवा अधिवक्ताओं के समर्थन और प्रशिक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। सीजेआई ने कहा, अधिवक्ता समाज के बेहद जिम्मेदार नागरिक होते हैं। बार के युवा सदस्यों को मजबूत करने की जरूरत है। जब तक हम उन्हें सही प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा में नहीं लाएंगे और भीड़भाड़ वाली अदालतों में उन्हें काम करने का पर्याप्त अवसर (Space) नहीं देंगे, तब तक इस तरह की विकृतियां सामने आती रहेंगी। कुछ युवा वकीलों ने मिलकर बेहद रचनात्मक और अच्छे संगठन बनाए हैं, जो इस पेशे के लिए एक उम्मीद की किरण (Silver Lining) हैं।
विधिक एवं केस सारांश (Case Matrix)
| विधिक बिंदु | उच्चतम न्यायालय की प्रारंभिक सुनवाई एवं रुख (जून 2026) |
| याचिकाकर्ता | बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) व अन्य। |
| प्रतिवादी पक्ष | भारत संघ (Union of India) एवं अन्य। |
| पीठ (Coram) | भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना। |
| प्रस्तावित विधिक ढांचा | नेशनल डिजिटल रजिस्ट्री फॉर द लीगल प्रोफेशन ऑफ इंडिया (NDRLP)। |
| अगली विधिक कार्रवाई | अदालत ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Vacations) के बाद पहले सोमवार को इस मामले को सूचीबद्ध करेगी; एक नई विशेषज्ञ समिति के गठन पर भी विचार संभव है। |

