Speedy Trial: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों और बलात्कार जैसे जघन्य मामलों की धीमी न्यायिक प्रक्रिया पर बेहद कड़ा और सुधारात्मक रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने यह निर्देश एक यौन उत्पीड़न पीड़िता द्वारा दायर उस रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें पूरे राज्य में बलात्कार और यौन अपराधों के मामलों में त्वरित सुनवाई (Speedy Trial) सुनिश्चित करने की गुहार लगाई गई थी। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को पूरे तमिलनाडु के सभी जिलों में ‘पॉक्सो’ (POCSO – प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट, 2012) अदालतों के कामकाज को लेकर एक विस्तृत जिला-वार रिपोर्ट (District-wise Report) पेश करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने रजिस्ट्री और राज्य सरकार से क्या-क्या आंकड़े मांगे हैं?
खंडपीठ ने हाई कोर्ट रजिस्ट्री और राज्य सरकार के वकीलों को आगामी 7 जुलाई, 2026 तक तथ्यों और आंकड़ों (Facts & Figures) के साथ व्यापक रिपोर्ट सौंपने को कहा है, जिसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल होंगे।
लंबित मामलों की संख्या: राज्य के हर जिले में वर्तमान में कुल कितने पॉक्सो (POCSO) मामले लंबित हैं?
अदालतों की मौजूदा स्थिति: प्रत्येक जिले में वर्तमान में विशेष रूप से पॉक्सो मामलों के लिए कितनी अदालतें कार्य कर रही हैं?
रिक्त पद (Vacancies): ऐसी कितनी अदालतें हैं जहां पीठासीन अधिकारियों (Judges/Presiding Officers) की नियुक्ति की जानी बाकी है?
नए न्यायालय और इंफ्रास्ट्रक्चर: मामलों के त्वरित निपटारे के लिए कितने नए कोर्ट स्थापित करने की आवश्यकता है और उनके लिए किस स्तर के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की जरूरत है?
पीड़िता का मामला: आरोपी पुलिसकर्मी थे, फिर भी सुनवाई में देरी
इस जनहितैषी निर्देश के पीछे एक बेहद गंभीर और संवेदनशील व्यक्तिगत मामला है, जिसने अदालतों की कछुआ गति को उजागर किया।
पुलिसकर्मियों पर आरोप: याचिकाकर्ता एक जघन्य यौन अपराध की पीड़िता है, और इस मामले में आरोपी स्वयं पुलिस विभाग के कर्मचारी थे। आरोपियों को 2 अक्टूबर, 2025 को ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
निचली अदालत की सुस्ती: तिरुवन्नामलाई की महिला फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Mahila Court) के समक्ष भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आरोप पत्र (Final Report) 11 दिसंबर, 2025 को ही दाखिल कर दिया गया था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी मुकदमे (Trial) की वास्तविक शुरुआत नहीं हुई।
पिछली बेंच की तल्ख टिप्पणी: इससे पहले, 27 मई 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने निचली अदालत पर नाराजगी जताते हुए कहा था, “हम यह समझने में असमर्थ हैं कि विद्वान ट्रायल जज ने आज तक इस जांच में तेजी क्यों नहीं लाई।” कोर्ट ने साफ किया कि आरोपी द्वारा डिस्चार्ज याचिका (आरोपमुक्त करने की अर्जी) खारिज होने के खिलाफ ऊपरी अदालत में केवल अपील लंबित होने का मतलब यह नहीं कि मुख्य ट्रायल को ही रोक दिया जाए।
हाई कोर्ट का कड़ा निर्देश: 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में पूरा हो ट्रायल
मद्रास हाई कोर्ट ने पीड़िता को त्वरित न्याय देने के लिए समयसीमा तय कर दी है।
डिस्चार्ज याचिका का निपटारा: ट्रायल कोर्ट को दूसरे आरोपी की डिस्चार्ज याचिका का निपटारा 7 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया गया।
डे-टू-डे (रोजाना) सुनवाई: यदि ऊपरी अदालत से कोई नया स्थगन आदेश (Stay) नहीं मिलता है, तो ट्रायल कोर्ट को 31 जुलाई, 2026 तक इस मामले की सुनवाई रोजाना (Day-to-day basis) करके इसे पूरी तरह समाप्त करने का आदेश दिया गया है।
इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वकील एस. कमलाकन्नन और जयसुधा पेश हुए, जबकि राज्य सरकार का पक्ष महाधिवक्ता (Advocate General) विजय नारायण और अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण अनबुमणी ने रखा। हाई कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से वकील बी. विजय ने पैरवी की।
केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Overview)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | मद्रास उच्च न्यायालय की विधिक कार्यवाही (जून 2026) |
| संबंधित अदालत | मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court – मुख्य पीठ) |
| माननीय न्यायाधीश | मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन |
| याचिकाकर्ता | एक यौन उत्पीड़न उत्तरजीवी (Sexual Assault Survivor) |
| मुख्य कानूनी विधिक अधिनियम | पॉक्सो अधिनियम, 2012 (POCSO Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) |
| हाई कोर्ट का मुख्य आदेश | तमिलनाडु के सभी जिलों से POCSO कोर्ट के बुनियादी ढांचे, न्यायाधीशों की कमी और लंबित मुकदमों की जिला-वार रिपोर्ट तलब। |
| ट्रायल की अंतिम तिथि | पीड़ित से जुड़े मुख्य मामले को 31 जुलाई, 2026 तक रोजाना सुनवाई कर निपटाने का निर्देश। |
| अगली सुनवाई की तिथि | 7 जुलाई, 2026 |

