Tuesday, July 21, 2026
HomeHigh CourtMens Rea: लूट के दौरान पीड़ित को लगी चोट के लिए धारा...

Mens Rea: लूट के दौरान पीड़ित को लगी चोट के लिए धारा 392 और 394 लगेगी, हत्या के प्रयास की धारा 307 नहीं…यहां समझिए केस

Mens Rea: लूटपाट के दौरान होने वाली हिंसक वारदातों में विधिक धाराओं के सही अनुप्रयोग को स्पष्ट करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

आरोपी का इरादा पीड़ित की जान लेने का साबित न हो जाए

हाईकोर्ट के जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने राज्य सरकार (दिल्ली पुलिस) द्वारा दायर उस आपराधिक अपील को खारिज कर दिया, जिसमें आरोपी को धारा 307 के तहत बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा, यदि किसी वारदात का मुख्य उद्देश्य केवल लूटपाट (Robbery) करना हो और उस दौरान पीड़ित को कोई गंभीर चोट लग जाती है, तो आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 392 और 394 के तहत ही दंडित किया जा सकता है। ऐसे मामलों में हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) की धारा 307 तब तक नहीं लगाई जा सकती, जब तक कि आरोपी का इरादा (Mens Rea) पीड़ित की जान लेने का साबित न हो जाए। भले ही पीड़ित का पैर कट गया हो, लेकिन यदि मुख्य मंशा केवल फोन छीनना थी, तो इसे हत्या का प्रयास नहीं माना जाएगा।

घटनाक्रम: चलती ट्रेन से धक्का और छात्र का कटा पैर

यह दर्दनाक मामला दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज के एक छात्र अमन से जुड़ा है।

वारदात: पीड़ित अमन पश्चिम विहार एक्सप्रेस ट्रेन से अपने घर सोनीपत लौट रहा था। उसी कोच में यात्रा कर रहे आरोपी आशीष कुमार ने अचानक अमन का मोबाइल फोन छीन लिया।

ट्रेन से नीचे फेंका: जब अमन ने फोन छीनने का विरोध किया, तो आरोपी ने उसे चलती ट्रेन से बाहर धक्का दे दिया। अमन सीधे रेलवे ट्रैक पर गिरा और उसका पैर ट्रेन के पहियों के नीचे आ गया, जिससे उसका पैर काटना (Amputation) पड़ा। आरोपी उसका मोबाइल लेकर फरार हो गया।

निचली अदालत का फैसला: पुलिस ने जांच के बाद धारा 392 (लूटपाट) और 394 (लूटपाट के दौरान स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। सत्र न्यायालय (Sessions Court) ने आरोपी को धारा 394 के तहत 5 साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई, लेकिन धारा 307 (हत्या का प्रयास) के आरोप से बरी कर दिया। राज्य सरकार इसी बरी किए जाने के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंची थी।

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: इरादा (Intent) बनाम परिणाम (Result)

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने आईपीसी की धारा 307 और धारा 394 के बारीक विधिक अंतर को समझाते हुए स्पष्ट किया कि कानून में किसी अपराध की गंभीरता केवल उसके ‘परिणाम’ (चोट कितनी गंभीर है) से नहीं, बल्कि अपराधी के ‘इरादे’ (Mens Rea) से तय होती है।

धारा 307 (IPC) का मूल तत्व: इस धारा के तहत हत्या के प्रयास का अपराध तभी बनता है, जब आरोपी का स्पष्ट इरादा या ज्ञान (Intent or Knowledge) ऐसा हो कि उसके कृत्य से पीड़ित की मृत्यु हो सकती है।

धक्के का वास्तविक उद्देश्य: कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि आरोपी ने जो धक्का दिया, उसका मूल उद्देश्य केवल अमन के हाथ से मोबाइल फोन छीनकर भागना था, न कि उसे जान से मारना।

अदालत का विधिक निष्कर्ष: अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने बिल्कुल सही पाया कि आरोपी का एकमात्र साबित हुआ इरादा पीड़ित के हाथ से अवैध रूप से मोबाइल फोन छीनना था, न कि उसकी हत्या करना। भले ही पीड़ित को गंभीर चोट आई हो और उसका पैर काटना पड़ा हो, लेकिन लूटपाट के दौरान पहुंचाई गई ऐसी कोई भी चोट आईपीसी की धारा 392 और 394 के तहत ही दंडनीय है। यह धारा 307 के विधिक तत्वों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

प्रासंगिक विधिक धाराओं का वर्गीकरण (IPC)

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कानून निर्माताओं ने लूट के दौरान चोट पहुंचाने के लिए पहले से ही एक विशिष्ट और कठोर धारा (धारा 394) बना रखी है, तो उसमें सामान्य सामान्य धारा (धारा 307) को जबरन नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

आईपीसी की धारा (IPC Sections)विधिक परिभाषा और लागू होने की स्थिति
धारा 392 (लूटपाट)किसी से जबरन चोरी या जबरन वसूली के लिए हिंसा का डर दिखाना।
धारा 394 (लूट में चोट)यदि कोई व्यक्ति लूटपाट करने या उसकी कोशिश करने के दौरान स्वेच्छा से किसी को चोट पहुंचाता है (इसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है)।
धारा 307 (हत्या का प्रयास)ऐसा कोई कृत्य जो पूरी तरह से जान लेने के इरादे या ज्ञान के साथ किया गया हो।

हाई कोर्ट ने माना कि चूंकि आरोपी को धारा 394 के तहत पहले ही 5 साल की कड़ी सजा मिल चुकी है, जो कि इस अपराध के लिए बिल्कुल उपयुक्त है, इसलिए निचली अदालत का धारा 307 से उसे बरी करने का फैसला विधिक रूप से त्रुटिहीन है। इसी के साथ राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी गई।

📌 विधिक फैक्ट शीट: दिल्ली हाई कोर्ट बनाम राज्य (IPC 307 बनाम 394 क्षेत्राधिकार)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और अंतिम निर्णय
संबंधित न्यायालयदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court), नई दिल्ली
माननीय न्यायाधीशजस्टिस नीना बंसल कृष्णा (एकल पीठ)
अपील का प्रकारदंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 377(3) के तहत राज्य की अपील
आरोपी/प्रतिवादीआशीष कुमार
पुष्टि की गई सजाधारा 394 IPC के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास
स्थापित कानूनी सिद्धांतलूट के दौरान लगी चोट धारा 394 के तहत कवर होगी, जब तक कि मर्डर का ‘Mens Rea’ न हो

लेकिन विधिक रूप से, चूंकि चोर का मकसद केवल फोन झपटकर भागना था, इसलिए कानून उसे ‘लुटेरा’ मानेगा, ‘हत्यारा’ नहीं। आईपीसी की धारा 394 अपने आप में एक बेहद गंभीर धारा है जिसमें दोषी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। कोर्ट ने पुलिस की उस सामान्य प्रवृत्ति पर रोक लगाई है जहां वे मामले को गंभीर दिखाने के लिए बिना पुख्ता इरादे के भी धारा 307 जोड़ देते हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
29.3 ° C
29.3 °
29.3 °
70 %
5.6kmh
87 %
Tue
29 °
Wed
33 °
Thu
31 °
Fri
33 °
Sat
35 °