Thursday, October 29, 2026
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Land Donate: क्या स्कूल बंद होने के बाद सरकार स्कूल के लिए दान में मिली जमीन दबाकर रख सकती है?…पढ़िए हिमाचल के एक स्कूल का केस

Land Donate: यदि किसी विशिष्ट उद्देश्य (जैसे सरकारी स्कूल चलाने) के लिए दी गई भूमि का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है, तो राज्य सरकार या शिक्षा विभाग उस जमीन पर अपना कब्जा बरकरार नहीं रख सकता।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस ज्योत्स्ना रीवाल दुआ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि शून्य/कम छात्र संख्या के कारण बंद हुए प्राथमिक विद्यालय की भूमि का कब्जा 4 सप्ताह के भीतर मूल भू-स्वामियों को वापस सौंपा जाए।

मामला क्या था?: 50 साल पहले शिमला में स्कूल के लिए दी गई जमीन

पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता के दादा ने लगभग 50 वर्ष पहले शिमला जिले के ‘गोकासवारी’ (Gokaswari) गांव में ‘सरकारी प्राथमिक विद्यालय’ खोलने के लिए अपनी निजी जमीन दी थी।

स्कूल का बंद होना: यह स्कूल लगभग पांच दशकों तक चला और बाद में मिडिल स्कूल में अपग्रेड हुआ। हालांकि, 2017 में छात्रों की संख्या न के बराबर होने के कारण इसे बंद कर दिया गया और 2024 में पास के दूसरे सरकारी स्कूल में विलय (Merge) कर दिया गया।

याचिकाकर्ता का तर्क: याचिकाकर्ता ने शिक्षा विभाग को कानूनी नोटिस देकर अपनी जमीन वापस मांगी। उसने तर्क दिया कि जमीन केवल स्कूल चलाने के विशिष्ट उद्देश्य से दी गई थी। अब जब उद्देश्य ही समाप्त हो गया है, तो जमीन का मालिक हक वापस पाने का हकदार है।

राज्य सरकार का तर्क: राज्य सरकार ने दलील दी कि यह जमीन 50 साल पहले दान/उपहार (Gift) में दी गई थी। संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 126 के तहत बिना किसी वापसी (Reversion Clause) की शर्त वाले गिफ्ट डीड को रद्द नहीं किया जा सकता और यह संपत्ति अब सरकार की है।

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण और तीखी टिप्पणियां

बिना रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के सरकार मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकती

अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) का अवलोकन किया और पाया कि जमीन अभी भी याचिकाकर्ता के पिता के नाम पर ही दर्ज थी तथा सरकार के पास कोई लिखित या पंजीकृत गिफ्ट डीड (Registered Gift Deed) मौजूद नहीं था।

अदालत का मुख्य अवलोकन: “संपत्ति अंतरण अधिनियम (Transfer of Property Act) की धारा 123 और पंजीकरण अधिनियम (Registration Act) की धारा 17 के तहत अचल संपत्ति का उपहार केवल एक पंजीकृत दस्तावेज (Registered Instrument) के माध्यम से ही हो सकता है। पंजीकृत गिफ्ट डीड के अभाव में राज्य सरकार स्वामित्व का दावा नहीं कर सकती और न ही धारा 126 का सहारा ले सकती है।”

उद्देश्य खत्म तो लाइसेंस भी खत्म (Indian Easements Act)

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार के कब्जे को केवल एक लाइसेंस (Licence) भी माना जाए, तो भारतीय सुखाधिकार अधिनियम, 1882 (Indian Easements Act) की धारा 62(f) के तहत यह लाइसेंस स्वतः निरस्त (Revoked) माना जाएगा, क्योंकि जिस विशिष्ट उद्देश्य (स्कूल संचालन) के लिए जमीन दी गई थी, उसे सरकार ने छोड़ दिया है।

जस्टिस ज्योत्स्ना रीवाल दुआ की मुख्य टिप्पणी: जब प्रतिवादी-राज्य शिक्षा विभाग ने उस उद्देश्य को ही छोड़ दिया है जिसके लिए याचिकाकर्ता के दादा ने अपनी भूमि उनके पक्ष में दी थी, तो राज्य को उस जमीन को अपने पास रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

हाई कोर्ट का अंतिम आदेश

याचिका स्वीकार: हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की रिट याचिका को स्वीकार कर लिया।

कब्जा वापस करने का निर्देश: राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को आदेश दिया गया कि वे 4 सप्ताह के भीतर जमीन का भौतिक कब्जा मूल भू-स्वामियों (याचिकाकर्ता) को सौंपें।

केस मैट्रिक्स: Himachal Pradesh High Court Order

प्रक्रियात्मक और विधिक पहलूविवरण / अदालत का फैसला
संबंधित अदालतहिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court of Himachal Pradesh)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस ज्योत्स्ना रीवाल दुआ
मामले का स्थानगोकासवारी, जिला शिमला (हिमाचल प्रदेश)
मुख्य कानूनी मुद्दाक्या स्कूल बंद होने के बाद सरकार स्कूल के लिए मिली जमीन दबाकर रख सकती है?
लागू कानूनTransfer of Property Act (Sec 123, 126), Indian Easements Act (Sec 62(f))
अदालत का अंतिम आदेश4 सप्ताह के भीतर जमीन का कब्जा मूल मालिक को वापस करने का निर्देश।
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