Interim Maintenance: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, विदेश में रहने और वहां का जीवन खर्चीला होने के आधार पर कोई भी आत्मनिर्भर और अच्छी कमाई करने वाली पत्नी अपने पति से अंतरिम भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती।
बॉम्बे उच्च न्यायालय की खंडपीठ (जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजीषा देशपांडे) ने एक पत्नी की 1 लाख रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण की याचिका को खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश दिया।
मामला क्या था?: 1 लाख रुपये प्रति माह अंतरिम गुजारा भत्ते का विवाद
पृष्ठभूमि: पुणे की फैमिली कोर्ट ने 2023 में दंपत्ति के तलाक की अर्जी को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए विवाह रद्द कर दिया था, लेकिन पत्नी के स्थायी गुजारा भत्ते (Permanent Alimony) के दावे को खारिज कर दिया था।
हाई कोर्ट में अपील: पत्नी ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की और अपील लंबित रहने के दौरान 1 लाख रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण की मांग की।
पत्नी की दलील: महिला 2011 से अमेरिका (US) में रह रही है। उसने तर्क दिया कि अमेरिका में रहने का खर्च (Cost of Living) बहुत अधिक है, जिससे वह वित्तीय दबाव में है। इसके अलावा, उसने पति की पुणे स्थित संपत्तियों का हवाला देते हुए कहा कि पति यह राशि देने में सक्षम है।
पति का पक्ष: पति ने अदालत को बताया कि पत्नी बीते 15 सालों से आत्मनिर्भर है और कई मौकों पर उससे ज्यादा कमाती रही है। इसके अलावा, वह खुद अपने बड़े बेटे की विदेश में पढ़ाई और अपने बुजुर्ग माता-पिता का खर्च उठा रहा है।
हाई कोर्ट की मुख्य विधिक टिप्पणियां
पर्याप्त आय और आत्मनिर्भरता
अदालत ने पाया कि पत्नी द्वारा पेश किए गए वेतन दस्तावेजों के अनुसार, उसकी मासिक ग्रॉस सैलरी 8,700 अमेरिकी डॉलर (तकरीबन नेट टेक-होम 6,100 डॉलर से अधिक) है।
अदालत का मुख्य अवलोकन: याचिकाकर्ता एक योग्य पेशेवर हैं, जो पिछले 15 वर्षों से विदेश में रह रही हैं। उनके पास स्वयं के जीवनयापन के लिए पर्याप्त से अधिक आय उपलब्ध है। केवल विदेश में जीवन-यापन महंगा होना अंतरिम भरण-पोषण मांगने का कानूनी आधार नहीं हो सकता।”
हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 24 (Section 24 of HMA) का मूल उद्देश्य
अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 के कानूनी सिद्धांतों को स्पष्ट किया।
उद्देश्य: धारा 24 का मकसद उस जीवनसाथी को वित्तीय सहायता और कानूनी खर्च देना है, जिसके पास अपनी आजीविका चलाने या केस लड़ने का कोई स्वतंत्र साधन न हो।
अधिकार की सीमा: इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर पक्ष को लाचार होने से बचाना है, न कि हर हाल में एक खास भव्य जीवनशैली (Lifestyle) की गारंटी देना, विशेषकर तब जब मांगने वाला खुद पर्याप्त कमाई कर रहा हो।
हाई कोर्ट का अंतिम आदेश
अर्जी खारिज: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महिला की 1 लाख रुपये प्रति माह के अंतरिम भरण-पोषण की मांग वाली अंतरिम याचिका (Interim Application) को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
वित्तीय लाचारी सिद्ध करने में विफल: कोर्ट ने माना कि महिला यह साबित करने में विफल रही कि वह केस के दौरान किसी भी तरह की वित्तीय लाचारी या असमर्थता का सामना कर रही है।
केस मैट्रिक्स: Bombay High Court Maintenance Order
| प्रक्रियात्मक और विधिक पहलू | विवरण / अदालत का फैसला |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| माननीय पीठ | जस्टिस भारती डांगरे एवं जस्टिस मंजीषा देशपांडे |
| मांगी गई राशि | 1 लाख रुपये प्रति माह (अंतरिम भरण-पोषण) |
| लागू कानून | हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 (Section 24, HMA) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | धारा 24 केवल साधनहीन पति/पत्नी की सहायता के लिए है; अपनी पसंद से विदेश में रहने के खर्च का हवाला देकर सक्षम व्यक्ति भरण-पोषण नहीं मांग सकता। |
| अदालत का फैसला | पत्नी की अंतरिम याचिका खारिज। |

