Free Medical Facility: तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा, यदि किसी निजी अस्पताल ने सरकार से रियायती दर (Concessional Rates) पर जमीन ली है, तो वह गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज देने से इनकार नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट के जस्टिस एन. वी. श्रवण कुमार ने कैंसर से पीड़ित एक गरीब महिला को तत्काल राहत देते हुए ‘बसावतारकम इंडो-अमेरिकन कैंसर अस्पताल’ को निर्देश दिया है कि वह महिला को 25% अनिवार्य मुफ्त इन-पेशेंट कोटे (Inpatient Quota) के तहत भर्ती करे और बिना कोई शुल्क लिए पूरा इलाज मुहैया कराए।
मामला क्या था?: कैंसर पीड़ित महिला की याचिका
पृष्ठभूमि: जगतियाल जिले की रहने वाली एक गरीब विधवा ‘बाले भागयम्मा’ (Bale Bhagyamma) स्तन कैंसर (Breast Cancer) से पीड़ित हैं। करीमनगर के डॉक्टरों ने उन्हें विशेष इलाज के लिए बसावतारकम इंडो-अमेरिकन कैंसर अस्पताल, हैदराबाद में रिफर किया था।
अस्पताल का इनकार: अस्पताल ने यह कहते हुए मुफ्त इलाज से इनकार कर दिया कि उनका इलाज ‘आरोग्यश्री योजना’ (Aarogyasri Scheme) के तहत कवर नहीं होता है और उन्हें इलाज का खर्च खुद उठाना होगा।
हाई कोर्ट में चुनौती: महिला ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और तर्क दिया कि उनकी मांग आरोग्यश्री योजना पर आधारित नहीं है, बल्कि यह अस्पताल का कानूनी दायित्व (Statutory Obligation) है।
हाई कोर्ट की मुख्य कानूनी दलीलें और आधार
रियायती जमीन का कानूनी दायित्व
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि नन्दमुरी बसावतारक रामाराव मेमोरियल कैंसर फाउंडेशन को बंजारा हिल्स में लगभग 7.35 एकड़ सरकारी जमीन रियायती दरों पर अलॉट की गई थी। इस जमीन आवंटन की शर्त के अनुसार, अस्पताल को 25% इन-पेशेंट (Inpatient) बेड गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए आरक्षित रखने होंगे। अस्पताल को 40% आउट-पेशेंट (Outpatient/OPD) सेवाएं गरीबों के लिए पूरी तरह मुफ्त देनी होंगी।
संबंधित सरकारी आदेश (Government Orders)
यह कानूनी बाध्यता दो मुख्य सरकारी आदेशों से तय होती है
GOMs No. 434 (26 मई 1989 – राजस्व विभाग)
GOMs No. 80 (16 जुलाई 2022 – स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग)
अदालत का मुख्य अवलोकन: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में देरी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। रियायती जमीन प्राप्त करने वाले अस्पतालों को अपने कानूनी दायित्वों का पालन करते हुए गरीब मरीजों को तुरंत मुफ्त इलाज देना होगा।
हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश (Interim Order)
तत्काल मुफ्त भर्ती व इलाज: हाई कोर्ट ने बसावतारकम अस्पताल को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 25% मुफ्त कोटे के तहत तुरंत भर्ती किया जाए और उनकी सभी जांचें, कीमोथेरेपी, सर्जरी, रेडियोथेरेपी, दवाएं और इन-पेशेंट देखभाल बिना कोई शुल्क लिए पूरी की जाएं।
निगरानी और रिपोर्ट: अदालत ने जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (DMHO), हैदराबाद को निर्देश दिया कि वे महिला के इलाज की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें और रिपोर्ट सौंपें कि अस्पताल इन सरकारी आदेशों का अनुपालन कर रहा है या नहीं।
अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तारीख तय की गई है।
केस मैट्रिक्स: Telangana High Court Order
| प्रक्रियात्मक और विधिक पहलू | विवरण / अदालत का फैसला |
| संबंधित अदालत | तेलंगाना उच्च न्यायालय (Telangana High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस एन. वी. श्रवण कुमार |
| याचिकाकर्ता | बाले भागयम्मा (कैंसर पीड़ित) |
| प्रतिवादी अस्पताल | बसावतारकम इंडो-अमेरिकन कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद |
| लागू सरकारी आदेश | GOMs No. 434 (1989) एवं GOMs No. 80 (2022) |
| मुफ्त इलाज का कोटा | 25% Inpatient (भर्ती) बेड एवं 40% Outpatient (OPD) सेवाएं |
| अदालत का आदेश | याचिकाकर्ता का सभी सुविधाओं के साथ पूरी तरह मुफ्त इलाज करने का निर्देश। |

