Fair Trial: वर्ष 1996 के चर्चित समलेटी (राजस्थान) बस बम विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी की मृत्युदंड (Death Sentence) की सजा को रद्द कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की तीन जजों की पीठ ने 183 पन्नों के फैसले में आदेश दिया कि मुख्य आरोपी को मुकदमे के दौरान कानूनी सहायता (वकील) उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जिससे उसने खुद ही गवाहों से जिरह (Cross-examination) की। कोर्ट ने इसे निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन माना और मामले में नये सिरे से मुकदमा (De-Novo Trial) चलाने का आदेश दिया।
मामला क्या था?: 1996 का समलेटी बस ब्लास्ट
घटना: 22 मई 1996 को आगरा से बीकानेर जा रही राजस्थान रोडवेज की बस में समलेटी गांव (दौसा) के पास भीषण विस्फोट हुआ था। इसमें 14 लोगों की मौत हुई थी और 37 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
जांच निष्कर्ष: सीआईडी (क्राइम ब्रांच) के अनुसार, बस में सीट नंबर 17 और 18 के नीचे लगभग 2.5 किलोग्राम RDX रखा गया था। यह आतंकी साजिश जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट (JKIF) और हरकत-उल-अंसार द्वारा रची गई थी।
निचली अदालतों का फैसला: 2014 में दौसा की निचली अदालत ने मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद को मौत की सजा सुनाई, जिसे 2019 में राजस्थान हाई कोर्ट ने बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य विधिक निष्कर्ष
वकील का न होना संवैधानिक रूप से अमान्य (Constitutionally Infirm)
सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर सेंट्रल जेल में बंद 64 वर्षीय अब्दुल हमीद से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। हमीद ने बताया कि पूरे ट्रायल के दौरान उसके पास कोई वकील नहीं था और न ही उसे कोई लीगल एड दिया गया।
अदालत का मुख्य अवलोकन: प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार केवल एक प्रक्रियात्मक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है। किसी आरोपी को मृत्युदंड का सामना करते समय बिना वकील के गवाहों से जिरह करने के लिए मजबूर करना निष्पक्ष सुनवाई की अवधारणा को नष्ट करता है।
फ्रेश ट्रायल का आदेश (Special Court in Jaipur)
अदालत ने अपराध की गंभीरता और समाज पर इसके प्रभाव को देखते हुए हमीद को पूरी तरह बरी करने के बजाय नए सिरे से मुकदमा चलाने का आदेश दिया। राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जयपुर में एक विशेष अदालत गठित करने का अनुरोध किया गया है। ट्रायल डेली बेसिस (प्रतिदिन) पर चलेगा और इसे 1 वर्ष के भीतर पूरा करना होगा। राज्य सरकार को हमीद के लिए कम से कम 10 वर्ष के अनुभव वाले वरिष्ठ आपराधिक वकील (Lead Defence Counsel) को नियुक्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
23 साल बाद एक आरोपी रिहा, 6 अन्य की बरी बरकरार
पप्पू उर्फ सलीम बरी: 23 साल से अधिक समय जेल में बिताने वाले सह-आरोपी ‘पप्पू उर्फ सलीम’ को अदालत ने बरी कर दिया। कोर्ट ने पाया कि उसकी सजा केवल एक विवादित/वापस लिए गए स्वीकारोक्ति बयान (Confession) पर आधारित थी और उसके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई थी।
राज्य की अपील खारिज: राजस्थान सरकार द्वारा जावेद खान और रईस बेग सहित छह अन्य आरोपियों की बरीअत के खिलाफ दायर अपीलों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
केस मैट्रिक्स: SC Verdict on Samleti Bus Blast Case
| प्रक्रियात्मक और विधिक पहलू | विवरण / अदालत का फैसला |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| माननीय पीठ | जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल एवं जस्टिस संदीप मेहता |
| मुख्य आरोपी | अब्दुल हमीद (मृत्युदंड रद्द, नया ट्रायल होगा) |
| बरी हुए आरोपी | पप्पू उर्फ सलीम (23 साल बाद रिहा) और 6 अन्य (बरीअत बरकरार) |
| संवैधानिक मुद्दा | निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी सहायता का अधिकार (Right to Fair Trial & Legal Aid) |
| अदालत का अंतिम आदेश | मौत की सजा रद्द; जयपुर में विशेष अदालत में 1 साल के भीतर De-Novo (नया) ट्रायल पूरा करने का निर्देश। |

