Tuesday, September 8, 2026
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Law Attendance Rules: कम अटेंडेंस वाले लॉ छात्रों को बड़ी राहत…एक बार की छूट का आदेश जारी, जानें इसके फायदे

Law Attendance Rules: अनिवार्य अटेंडेंस (Compulsory Attendance) के नियमों को लेकर पैदा हुए भ्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के उन लॉ छात्रों को बड़ी राहत दी है।

प्रभावित हुए छात्रों का साल बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले और उस पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बीच के समय में प्रभावित हुए छात्रों का साल बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। जिन्हें कम अटेंडेंस के कारण परीक्षाओं में बैठने से रोक दिया गया था या परीक्षा से वंचित (Debarred) कर दिया गया था।

मामला क्या था?: कैसे शुरू हुआ भ्रम?

नवंबर 2025 (दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला): दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि केवल कम अटेंडेंस के आधार पर छात्रों को परीक्षा देने या शैक्षणिक सत्र में आगे बढ़ने से नहीं रोका जाना चाहिए।

BCI का सर्कुलर: इस फैसले के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने देश भर के लॉ कॉलेजों/विश्वविद्यालयों को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।

मई 2026 (सुप्रीम कोर्ट का स्टे): सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले के निष्पादन पर भविष्यलक्षी प्रभाव (Prospective Stay) से रोक लगा दी।

ताजा संकट: स्टे के तुरंत बाद कई विश्वविद्यालयों (जैसे NMIMS आदि) ने कम अटेंडेंस वाले छात्रों को आगामी परीक्षाओं में बैठने से रोकना और डिटेन करना शुरू कर दिया, जिससे छात्रों का शैक्षणिक वर्ष खतरे में पड़ गया।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य विधिक टिप्पणियां

“छात्रों को संशय/संदेह का लाभ मिलना चाहिए”

अदालत ने माना कि दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले और BCI के सर्कुलर के कारण छात्र इस सद्भावी विश्वास (Bona fide belief) में थे कि कम अटेंडेंस से उनकी परीक्षा पर असर नहीं पड़ेगा।

अदालत का मुख्य अवलोकन: “जो छात्र इस सद्भावी विश्वास में थे कि अटेंडेंस की कमी उनकी परीक्षाओं में शामिल होने में बाधा नहीं बनेगी, वे ‘वन-टाइम मेजर’ (एक बार की छूट) के रूप में संदेह के लाभ (Benefit of Doubt) के हकदार हैं।”

सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षाओं का आदेश

अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन छात्रों की परीक्षाएं छूट गई हैं या जिन्हें बैठने नहीं दिया गया, कॉलेज उनके लिए पूरक परीक्षाएं आयोजित करें। “3 नवंबर 2025 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के दौरान जो शैक्षणिक सत्र चल रहा था, उस सत्र के छात्रों को अंतिम परीक्षाओं में बैठने से नहीं रोका जाएगा। 26 मई 2026 का हमारा स्टे आदेश भविष्यलक्षी (Prospective) था, इसलिए इस अंतरिम अवधि में प्रभावित होने वाले छात्रों के शैक्षणिक वर्ष का नुकसान नहीं होना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य आदेश

परीक्षाओं में बैठने की अनुमति: कम अटेंडेंस वाले प्रभावित छात्रों को चालू/संबंधित शैक्षणिक सत्र की अंतिम परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी जाए।

पूरक परीक्षाएं (Supplementary Exams): जिन छात्रों को अटेंडेंस की कमी के कारण परीक्षा देने से रोका गया था या जिनकी परीक्षाएं छूट गई थीं, उनके लिए विशेष पूरक परीक्षाएं आयोजित की जाएं।

मामले की अगली सुनवाई: अटेंडेंस नियमों की संवैधानिकता और व्यापक कानूनी मुद्दे पर अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

केस मैट्रिक्स: Supreme Court Relief on Law Attendance Rules

प्रक्रियात्मक और विधिक पहलूविवरण / अदालत का फैसला
संबंधित अदालतसर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय पीठजस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता एवं जस्टिस आर. महादेवन
केस का नामप्रकृति जैन बनाम बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Prakruthi Jain v. BCI)
मुख्य कानूनी मुद्दादिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद कम अटेंडेंस वाले लॉ छात्रों को डिटेन करना उचित है या नहीं?
प्रदान की गई राहतकेवल एक बार की विशेष छूट (One-Time Relief/Benefit of Doubt); छात्रों को परीक्षा और सप्लीमेंट्री एग्जाम देने की अनुमति।
अगली सुनवाई की तिथि25 अगस्त, 2026
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