Sunday, November 1, 2026
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KPSC Chairman’s Daughter: यह दिन-दहाड़े किया गया धोखा है… कैसे KPSC अध्यक्ष की बेटी ने फर्जी आय प्रमाण पत्र पर आरक्षण का लिया लाभ, पढ़ें

केस मैट्रिक्स: Karnataka HC Refuses to Quash FIR Against KPSC Chairman’s Daughter

KPSC Chairman’s Daughter: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार की बेटी सुमा एस. साहूकार (Suma S Sahukar) को कर्नाटक हाईकोर्ट से भारी झटका लगा है।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने याचिकाकर्ता को आड़े हाथों लिया और इसे प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी करार दिया। अदालत के कड़े रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली। फर्जी आय प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर श्रेणी 3B (Category 3B) के तहत आरक्षण लाभ का दावा करने के आरोप में दर्ज FIR को रद्द करने से अदालत ने साफ इनकार कर दिया।

मामला क्या था?: ₹30 लाख की आय और ₹40,000 का झूठा हलफनामा

  • आरोप: सुमा एस. साहूकार पर आरोप है कि उन्होंने KPSC भर्ती परीक्षा में श्रेणी 3B (पिछड़ा वर्ग) के तहत आरक्षण का लाभ उठाने के लिए अपने पिता (जो KPSC के अध्यक्ष थे) की वार्षिक पारिवारिक आय महज ₹40,000 दर्शाई, जबकि वास्तविक वार्षिक आय लगभग ₹25 से ₹30 लाख थी।
  • याचिकाकर्ता की दलील: याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम. अरुणा श्याम ने तर्क दिया कि कर्नाटक एससी/एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग (आरक्षण) नियम, 1992 के नियम 7A के तहत आपराधिक कार्यवाही शुरू करने से पहले अनिवार्य वैधानिक जांच (Mandatory Statutory Verification) नहीं की गई थी। इसलिए दर्ज FIR समय पूर्व (Premature) है।

कर्नाटक हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने याचिकाकर्ता के प्रक्रियात्मक खामियों के तर्कों को खारिज करते हुए बेहद कड़े सवाल पूछे।

“यह पूरी तरह से खुला और स्पष्ट मामला है (Open and Shut Case)

हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: “यह पूरी तरह से खुला और स्पष्ट मामला है। इसमें किसी जांच की आवश्यकता ही नहीं है। आप KPSC के इन सभी लोगों को कब तक धोखा देते रहेंगे? जब तथ्य स्पष्ट हैं तो अब किस जांच की जरूरत है? जांच की आवश्यकता केवल वहीं होती है जहां कोई अस्पष्टता हो।”

क्या आपने एक गरीब छात्र का हक नहीं छीना?

अदालत ने आरक्षण के गलत इस्तेमाल से वास्तविक हकदार अभ्यर्थियों पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई। कहा, उस व्यक्ति का क्या होना चाहिए जो वास्तव में इस लाभ का हकदार था? आपने एक गरीब छात्र का अवसर छीन लिया है। क्या आपने उस व्यक्ति से वह मौका नहीं चुराया? क्या पिता की ₹30 लाख आय के सामने ₹40,000 की घोषणा करना आँखों में धूल झोंकना नहीं है? क्या यह प्रथम दृष्टया दिन-दहाड़े की गई धोखाधड़ी नहीं है?

KPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल

अदालत ने KPSC की भर्तियों में बार-बार सामने आने वाले विवादों पर भी दुख व्यक्त किया। कहा, “KPSC के साथ यह आज की समस्या नहीं है। मुझे यह कहते हुए खेद हो रहा है कि उनकी हर भर्ती प्रक्रिया विवादों से घिरी होती है।”

मामले का परिणाम

  • याचिका वापस ली गई: हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज करने और कड़े आदेश पारित करने के स्पष्ट संकेत के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।
  • अदालत का आदेश: पीठ ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। हालांकि, कोर्ट ने छूट दी कि आपराधिक मामले में पुलिस द्वारा अंतिम जांच रिपोर्ट (Final Report) दाखिल किए जाने के बाद, यदि आवश्यक हो, तो वे पुनः अदालत का रुख कर सकती हैं।
  • राज्य सरकार का रुख: राज्य की ओर से विशेष सार्वजनिक अभियोजक (SPP) बी.एन. जगदीश ने अदालत को सूचित किया कि मामले में जांच जारी है और केवल भर्ती प्रक्रिया से नाम वापस लेने के आधार पर आरोपी को कानूनी कार्रवाई से छूट नहीं मिल सकती।

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