Sunday, November 1, 2026
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Blocking Rogue Websites: वेबसाइट ‘रोग (Rogue)’ है या नहीं, यह कॉपीराइट मालिक या ISP तय नहीं कर सकते…30 वेबसाइट समूहों का केस जानें

केस मैट्रिक्स: Delhi HC Ruling on Blocking Rogue Websites & Mirror Domains

पहलूविवरण
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस अनूप जयराम भंभानी (Single Bench)
केस का नामहोम बॉक्स ऑफिस इंक बनाम स्ट्रीमजी.टो व अन्य (HBO Inc v. Streamzy.to)
मुख्य विधिक प्रश्नक्या ISPs या कॉपीराइट मालिक बिना कोर्ट के आदेश के किसी वेबसाइट को ‘रोग वेबसाइट’ मानकर ब्लॉक कर सकते हैं?
अदालत का निष्कर्षनहीं। अंतिम निर्णय केवल अदालत का होगा। अस्थायी ब्लॉक के बाद न्यायिक समीक्षा (Judicial Scrutiny) अनिवार्य है।

Blocking Rogue Websites: इंटरनेट पर होने वाली डिजिटल पायरेसी (Digital Piracy) और ‘रोग वेबसाइटों’ (Rogue Websites) को ब्लॉक करने की प्रक्रिया को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण विधिक ढांचा और दिशानिर्देश निर्धारित किए हैं।

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने होम बॉक्स ऑफिस (HBO Inc) और अन्य निर्माताओं द्वारा 30 वेबसाइट समूहों के खिलाफ दायर कॉपीराइट उल्लंघन के मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि न तो कॉपीराइट मालिक और न ही इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISPs/DNRs) खुद यह अंतिम निर्णय ले सकते हैं कि कोई वेबसाइट कानून का उल्लंघन करने वाली ‘रोग वेबसाइट’ है या नहीं। यह विशेषाधिकार केवल अदालतों का है।

मामला क्या था?: पायरेसी वेबसाइटों को ब्लॉक करने का विवाद

  • मूल विवाद: HBO और अन्य फिल्म निर्माताओं ने शिकायत दर्ज कराई कि कुछ अज्ञात वेबसाइटें उनकी नई फिल्मों और टीवी शो को रिलीज के तुरंत बाद (और कभी-कभी रिलीज से पहले ही) अवैध रूप से ऑनलाइन स्ट्रीम कर रही हैं। इन वेबसाइटों के मालिकों ने अपनी पहचान छिपा रखी थी।
  • डोमेन नेम रजिस्ट्रार (DNRs) का रुख: रजिस्ट्रार ने पहचान की गई मुख्य वेबसाइटों को ब्लॉक करने पर सहमति जताई, लेकिन उन्होंने कंपनियों की इस मांग का विरोध किया जिसमें भविष्य में केवल हलफनामे (Affidavit) के आधार पर किसी भी नई वेबसाइट/डोमेन को सीधे ब्लॉक करने का अधिकार मांगा गया था।
  • अदालत का प्राथमिक निष्कर्ष: कोर्ट ने माना कि ये वेबसाइटें जानबूझकर बड़े पैमाने पर कॉपीराइट का उल्लंघन कर रही हैं और इनका मुख्य उद्देश्य अनधिकृत कंटेंट उपलब्ध कराना ही है।

दिल्ली हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं

मध्यस्थों (ISPs) का काम निष्पक्ष रहना है

अदालत ने कहा कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISPs) और डोमेन रजिस्ट्रार (DNRs) केवल एक न्यूट्रल जरिया हैं। दिल्ली हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: “एक ISP या DNR सामान्य तौर पर एक तटस्थ मध्यस्थ (Neutral Intermediary) होता है। यह तय करना किसी मध्यस्थ का काम नहीं है कि कोई विशेष वेबसाइट ‘रोग वेबसाइट’ है या नहीं। ऐसा निर्णय न तो वादियों के एकतरफा मूल्यांकन पर छोड़ा जा सकता है और न ही किसी मध्यस्थ की संतुष्टि पर।”

आईटी एक्ट की धारा 79 (Safe Harbour Protection)

अदालत ने स्पष्ट किया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की धारा 79 के तहत लीगल प्रोटेक्शन (Safe Harbour) बनाए रखने के लिए मध्यस्थों का तटस्थ बने रहना अनिवार्य है।

पायरेसी रोकने के लिए हाई कोर्ट द्वारा तय की गई नई प्रक्रिया (SOP)

पायरेसी वेबसाइटें अक्सर नया डोमेन या ‘मिरर वेबसाइट’ (Mirror/Redirect Websites) बनाकर दोबारा चालू हो जाती हैं। इससे निपटने के लिए हाई कोर्ट ने एक संतुलित प्रक्रिया बनाई है।

1. साक्ष्य के साथ सूचना ──> वादी (HBO) नया मिरर डोमेन मिलने पर ISP/DNR को सबूतों के साथ सूचित करेगा।
          │
2. तकनीकी सत्यापन ──────> ISP/DNR केवल तकनीकी जांच करेगा कि क्या यह डोमेन पहले बैन डोमेन का ही हिस्सा/मिरर है।
          │
3. अस्थायी ब्लॉक ────────> तकनीकी लिंक साबित होने पर ISP तुरंत नए डोमेन को अस्थायी रूप से ब्लॉक करेगा।
          │
4. न्यायिक समीक्षा ──────> वादी (HBO) को तुरंत कोर्ट में आवेदन करना होगा, जहाँ कोर्ट तय करेगा कि ब्लॉक जारी रहेगा या नहीं।

कोर्ट की चेतावनी: यदि कॉपीराइट मालिकों (HBO आदि) द्वारा कोई झूठा या द्वेषपूर्ण दावा किया जाता है, तो उनके खिलाफ उचित अदालती कार्रवाई की जाएगी।

हाई कोर्ट का अंतिम निर्णय

  1. अंतरिम रोक: हाई कोर्ट ने मामले में नामित सभी पायरेसी वेबसाइटों के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा (Interim Injunction) जारी करते हुए उन्हें ब्लॉक करने का आदेश दिया।
  2. न्यायिक स्क्रूटनी अनिवार्य: भविष्य की किसी भी मिरर वेबसाइट को ब्लॉक करने के लिए अदालत की अंतिम मंजूरी को अनिवार्य कर दिया गया।

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