Saturday, October 31, 2026
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Law Colleges Student: कॉलेज का मोहरा बनकर न आएं…मुंबई यूनिवर्सिटी के लॉ सीटों में कटौती के फैसले को चुनौती, याचिकाकर्ता पर जुर्माना

केस मैट्रिक्स: Bombay High Court Verdict on Law Colleges Student Intake Cut

पहलूविवरण
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court)
माननीय पीठकार्यवाहक CJ रवींद्र वी. घुगे एवं जस्टिस गौतम अनखड़
याचिकाकर्तालॉयर्स फाउंडेशन (Lawyers’ Foundation)
संबंधित विषयसत्र 2026-27 के लिए 45 लॉ कॉलेजों में 50% LLB सीटों की कटौती
मुख्य निष्कर्षछद्म याचिका (Proxy PIL); शैक्षणिक/नियामक मामलों में जनहित याचिका का दुरुपयोग
दंडात्मक कार्रवाईPIL निरस्त + याचिकाकर्ता पर ₹1,00000 (एक लाख रुपये) का जुर्माना

Law Colleges Student: मुंबई विश्वविद्यालय (Mumbai University) द्वारा संबद्ध लगभग 45 लॉ कॉलेजों में 3-वर्षीय और 5-वर्षीय एलएलबी (LLB) पाठ्यक्रमों की 50% सीटें घटाने के फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

अदालत ने याचिकाकर्ता संस्था ‘लॉयर्स फाउंडेशन’ (Lawyers’ Foundation) पर एक विशिष्ट लॉ कॉलेज के हित में छद्म याचिका (Proxy Litigation) दायर करने के लिए ₹1 लाख का भारी जुर्माना लगाया है।

यह फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे (Acting Chief Justice Ravindra V. Ghuge) और जस्टिस गौतम अनखड़ (Justice Gautam Ankhad) की खंडपीठ ने सुनाया।

बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि यूनिवर्सिटी ने बिना प्रस्तावों पर ध्यान दिए सीटें आधी कर दी हैं, तो पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई।

बॉम्बे हाई कोर्ट का तीखा रुख: *”शैक्षणिक मामलों पर सवाल उठाने वाले आप कौन होते हैं? यह पूरी तरह से विश्वविद्यालय और शैक्षणिक निकायों का क्षेत्र है। आपकी वकीलों की संस्था को एक शैक्षणिक संस्थान द्वारा मोहरा बनाकर आगे खड़ा किया गया है।

हमें आश्चर्य है कि विश्वविद्यालय ने ऐसे कॉलेजों के खिलाफ इतना नरम रुख अपनाया है। उन्हें तो सख्त कदम उठाने चाहिए थे। बिना किसी मान्यता प्राप्त शिक्षक या प्रिंसिपल के एक लॉ कॉलेज चलाया जा रहा है? गैर-मान्यता प्राप्त लोग कॉलेज में पढ़ा रहे हैं? हम तो उस शैक्षणिक संस्थान को नोटिस जारी करने जा रहे हैं कि उसे पूरी तरह बंद क्यों न कर दिया जाए।”*

मामला क्या था?: रिजवी लॉ कॉलेज और 45 कॉलेजों की सीटों में कटौती

  1. विश्वविद्यालय का फैसला: मुंबई यूनिवर्सिटी ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की कमी के आधार पर लगभग 45 लॉ कॉलेजों में सीटों की संख्या 50% तक कम कर दी थी।
  2. रिजवी लॉ कॉलेज (Rizvi Law College) का सच: सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि रिजवी लॉ कॉलेज में न तो कोई अनुमोदित प्रिंसिपल/प्रभारी प्रिंसिपल था और न ही कोई सिंगल अप्रूव्ड फैकल्टी सदस्य मौजूद था।
  3. गोपनीय जानकारी का लीक होना: कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि उन्हें किसी विशिष्ट कॉलेज के गोपनीय प्रशासनिक दस्तावेज और अंदरूनी जानकारी कैसे मिली? कोर्ट ने पाया कि यह याचिका वास्तव में रिजवी लॉ कॉलेज की ओर से यूनिवर्सिटी के फैसले को अप्रत्यक्ष रूप से चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थी।

BCI के अधिकार क्षेत्र का जिक्र और जुर्माना

  • Bar Council of India (BCI) का क्षेत्राधिकार: अदालत ने स्पष्ट किया कि लॉ कॉलेजों के मानकों और फैकल्टी/इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी करना बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि वकीलों की किसी प्राइवेट संस्था का इसमें कोई हस्तक्षेप होना चाहिए।
  • ₹1 लाख का जुर्माना: कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए ‘लॉयर्स फाउंडेशन’ को 30 दिनों के भीतर ₹1 लाख की जुर्माना राशि हाई कोर्ट में जमा कराने का आदेश दिया।

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