केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक श्रेणियां | राजस्थान उच्च न्यायालय का निर्णय (2026) |
| मामले का प्रकार | स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (Suo Motu PIL) |
| संबंधित अदालत | राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर पीठ) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं जस्टिस प्रवीर भटनागर |
| संबंधित पोर्टल/रिकॉर्ड | राजस्थान वक्फ गजट एवं उम्मीद पोर्टल (Umeed Portal) |
| मुख्य विवाद | जजों के बंगले, सरकारी स्कूल, कॉलेज व प्रसिद्ध मंदिरों का नाम वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज होना। |
| अदालत का अंतरिम आदेश | संपत्तियों की कानूनी और भौतिक स्थिति पर यथास्थिति (Status Quo); बिना इजाजत किसी भी बदलाव/निर्माण पर रोक। |
Judges’ Bungalows: जोधपुर में उच्च न्यायालय के जजों के आधिकारिक आवास, स्कूल, कॉलेज, मंदिर और अन्य सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को सरकारी अभिलेखों और पोर्टल पर ‘वक्फ संपत्ति’ (Waqf Property) के रूप में दर्ज किए जाने की खबरों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए विवादित संपत्तियों की यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने के कड़े आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लेते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दर्ज की है।
मामला क्या था? (Case Background)
- यह मामला दैनिक भास्कर की 27 जून 2026 की एक विशेष खोजी रिपोर्ट के आधार पर सामने आया है।
- विवादित खसरा नंबर: जोधपुर (ग्रामीण) के खसरा नंबर 482, 485 और 490 की जमीनें, जो राजस्व अभिलेखों (Revenue Records) में सरकारी या संबंधित संस्थाओं के नाम दर्ज थीं, उन्हें वक्फ गजट और राज्य सरकार के ऑनलाइन ‘उम्मीद पोर्टल’ (Umeed Portal) पर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्शाया गया।
- प्रमुख प्रभावित संपत्तियां: वक्फ रिकॉर्ड में जिन प्रमुख संपत्तियों के दर्ज होने का दावा किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- राजस्थान हाई कोर्ट के वर्तमान जस्टिस विनीत कुमार माथुर और झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश टाटिया का आधिकारिक बंग्ला।
- सोहनलाल मनिहार स्कूल, शाह गोवर्धनलाल काबरा कॉलेज, काबरा मातृश्री कला मंदिर।
- अग्रवाल बगीची, अग्रवाल महावीर मंदिर, गौड़ेश्वर महादेव मंदिर, मारू लोहार सिकलीगर मंदिर, सतगुरु कबीर आश्रम, दो न्याति भवन और गीता भवन।
- सैकड़ों अन्य रिहायशी और व्यावसायिक संपत्तियां।
हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: “बिना कानूनी प्रक्रिया के बदलाव असंवैधानिक”
पीठ ने राजस्व अभिलेखों के विपरीत वक्फ पोर्टल पर प्रविष्टियां करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और निम्नलिखित महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणियां कीं।
मनमानी और प्रक्रिया का उल्लंघन
अदालत ने स्पष्ट किया कि वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत निर्धारित उचित कानूनी प्रक्रिया और प्रभावित पक्षों को नोटिस दिए बिना एकतरफा तरीके से संपत्ति का कानूनी चरित्र नहीं बदला जा सकता।
“वक्फ अधिनियम के पालन के बिना और प्रभावित पक्षों को नोटिस दिए बिना संपत्ति के कानूनी चरित्र को प्रभावित करने वाली कोई भी एकतरफा प्रविष्टि, मनमानेपन और कानून की उचित प्रक्रिया के बिना संपत्ति से वंचित करने की गंभीर चिंता पैदा करती है।”
धार्मिक दावों पर संविधान का रुख (अनुच्छेद 25)
पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 25 का संदर्भ देते हुए कहा, संविधान का अनुच्छेद 25 अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म के स्वतंत्र रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की रक्षा करता है, लेकिन संवैधानिक ढांचा न तो राज्य को केवल धार्मिक दावे के आधार पर किसी संपत्ति को मालिकाना हक देने की अनुमति देता है, और न ही कानून के अनुसार किसी वैध बंदोबस्त को बाधित करने की इजाजत देता है।
उच्च न्यायालय के मुख्य निर्देश (Court Directives)
- यथास्थिति (Status Quo) का आदेश: 27 जुलाई को पारित अपने अंतरिम आदेश में हाई कोर्ट ने संबंधित सभी खसरा नंबरों और समाचार रिपोर्ट में उल्लिखित संपत्तियों के स्वामित्व और कानूनी स्थिति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
- अंतरण और निर्माण पर रोक: विवादित प्रविष्टियों के आधार पर किसी भी संपत्ति के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), हस्तांतरण, लीज, लाइसेंस, निर्माण या तोड़फोड़ पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
- रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन: जोधपुर के जिला कलेक्टर को सभी राजस्व रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और तस्वीरों व GPS डेटा के साथ जमीन का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने का निर्देश दिया गया है।
- वक्फ बोर्ड से मूल रिकॉर्ड तलब: राजस्थान मुस्लिम वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को वक्फ गजट और उम्मीद पोर्टल पर इन संपत्तियों को शामिल करने से जुड़े मूल रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया गया है।
- अदालत के सहयोगी (Amici Curiae): कोर्ट की सहायता के लिए अधिवक्ता मोती सिंह और अभिषेक मेहता को अमकस क्यूरी (Amici Curiae) नियुक्त किया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी।

