Wednesday, November 4, 2026
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Court Live Streaming: मीडिया कोर्ट कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकता है…लेकिन ऑडियो/वीडियो क्लिप प्रसारित नहीं कर सकता, दिशानिर्देश जानें

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुसर्वोच्च न्यायालय का स्पष्टीकरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठCJI सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी. मोहना
मुख्य याचिकाहर्षिता ग्रोवर बनाम भारत संघ (अदालती क्लिप्स के नियमन हेतु)
मीडिया रिपोर्टिंग की स्थितिअनुमति है (पत्रकार अदालती कार्यवाही और फैसलों की रिपोर्टिंग कर सकते हैं)।
ऑडियो/वीडियो क्लिप्स की स्थितिप्रतिबंधित है (बिना रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के क्लिप्स का प्रसार/मॉनेटाइजेशन बैन)।
अगली सुनवाई की तारीख18 सितंबर 2026

Court Live Streaming: अदालती कार्यवाहियों के लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) और ऑडियो-वीडियो क्लिप्स के इंटरनेट पर दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया अंतरिम आदेश पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 24 जुलाई और 31 जुलाई के अपने अंतरिम आदेशों के पैराग्राफ 11 को लेकर बनी भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए यह आदेश पारित किया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि अदालती कार्यवाहियों के ऑडियो-वीडियो क्लिप्स के शेयरिंग और अपलोडिंग पर लगाई गई रोक का मतलब मीडिया रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध नहीं है। मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान (Recognised News Outlets) अदालती कार्यवाहियों, फैसलों और कानूनी घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं, लेकिन अपनी रिपोर्टिंग में अदालती कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो क्लिप्स का उपयोग नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण: क्या अनुमति है और क्या प्रतिबंधित?

शीर्ष अदालत ने कहा कि मीडिया की रिपोर्टिंग पर कोई पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) नहीं लगाया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय का आदेश: “उक्त आदेश का यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि मान्यता प्राप्त समाचार आउटलेट्स द्वारा अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे आउटलेट्स कार्यवाहियों की रिपोर्टिंग करना और आम जनता को कानूनी घटनाक्रमों व न्यायिक फैसलों की जानकारी देना जारी रख सकते हैं, बशर्ते कि इस रिपोर्टिंग के दौरान अदालती कार्यवाहियों के ऑडियो या वीडियो क्लिप का उपयोग न किया जाए।“

मुख्य प्रतिबंध: पैराग्राफ 10 के तहत क्या नियम हैं?

अदालत ने स्पष्ट किया कि मीडिया संस्थान रिपोर्टिंग करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन वे 24 जुलाई के आदेश के पैराग्राफ 10 में तय किए गए नियमों से बंधे रहेंगे। इस नियम के अनुसार:

  1. बिना अनुमति क्लिप्स शेयर करने पर रोक: सर्वोच्च न्यायालय या संबंधित उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल / महासचिव की पूर्व अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाहियों के ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को निकालना (Extraction), एडिट करना, सोशल मीडिया पर पोस्ट/रीपोस्ट करना, शेयर करना, अपलोड करना या उसका मुद्रीकरण (Monetization) करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
  2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नियम: एक्स (X), मेटा (Meta) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इन निर्देशों का पालन करना होगा ताकि अदालती बयानों को संदर्भ से बाहर (Out of Context) काटकर वायरल होने से रोका जा सके।

याचिका का बैकग्राउंड (Journalist Harshita Grover’s PIL)

  • याचिका: पत्रकार हर्षिता ग्रोवर द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश आया। याचिका में मांग की गई थी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अदालती कार्यवाहियों की वीडियो क्लिप्स को संदर्भ से काटकर पेश करने, मीम्स बनाने और उनसे कमाई करने पर रोक लगाई जाए।
  • अदालत की चिंता: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जजों और वकीलों के बीच की बातचीत को अधूरी या सनसनीखेज क्लिप्स के रूप में प्रसारित करने से अदालतों की गरिमा प्रभावित हो रही है और न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को ठेस पहुँच रही है।
  • केंद्र और हाई कोर्ट्स से जवाब तलब: कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों से ‘मॉडल लाइव-स्ट्रीमिंग नियमों’ को अपनाने और लगातार लाइव-स्ट्रीमिंग के प्रभावों पर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही केंद्र सरकार से इन नियमों को लागू करने वाले नोडल मंत्रालयों का प्रस्ताव माँगा है।
  • आरटीआई कार्यकर्ताओं की हस्तक्षेप याचिका: सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन RTI कार्यकर्ताओं को भी मामले में हस्तक्षेप करने (Intervenors) की अनुमति दी, जो क्लिप्स शेयरिंग पर पूरी तरह से बैन का विरोध कर रहे हैं।

अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और सभी हाई कोर्ट्स को अपने जवाब दाखिल करने का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 तय की है।

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