केस एवं विधिक सारांश (Overview Matrix)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (August 2026 High Court Order) |
| माननीय न्यायाधीश | न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी (दिल्ली उच्च न्यायालय) |
| मामला | Mohit Kumar v. John Doe / Ashok Kumar & Others |
| मुख्य मुद्दा | मेटा राइट्स मैनेजर टूल का दुरुपयोग और फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक |
| कोर्ट का प्रमुख निर्देश | मेटा ‘Rights Manager’ टूल के आवंटन की नीति और अस्वीकृति के कारणों को कोर्ट के समक्ष रखे। |
| अगली सुनवाई | 24 सितंबर 2026 |
Fake Copyright Strikes: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा (Meta) को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा है कि असली कंटेंट क्रिएटर्स (Content Creators) को मेटा के ‘राइट्स मैनेजर’ (Rights Manager) टूल का एक्सेस क्यों नहीं दिया जा रहा है, जबकि स्कैमर्स (Scammers) इसका इस्तेमाल करके असली क्रिएटर्स के खिलाफ ही फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक (Fake Copyright Strikes) भेज रहे हैं।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने मोहित कुमार (ब्रांड नाम: Rise With Mohit) द्वारा दायर याचिका (Mohit Kumar v. John Doe/Ashok Kumar and Others) पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मेटा की नीति पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की: यह तो वही बात हो गई कि आपने घर की चाबी चोर को दे दी और घर के असली मालिक को बाहर रख दिया। यदि यह सुरक्षा उपकरण है, तो यह हर किसी (असली क्रिएटर) के पास क्यों उपलब्ध नहीं है?
क्या है पूरा विवाद? (Case Background)
- फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक और चैनल को नुकसान
- याचिकाकर्ता मोहित कुमार, जो एक एआई और ई-कॉमर्स कोच हैं, ने आरोप लगाया कि स्कैमर्स ने उनके मूल वीडियो डाउनलोड किए और उन्हें मेटा के ‘राइट्स मैनेजर’ टूल में अपने नाम से पंजीकृत (Register) करवा लिया।
- इसके बाद स्कैमर्स ने इसी टूल का इस्तेमाल करके मोहित कुमार के आधिकारिक खातों पर ही कॉपीराइट स्ट्राइक भेजनी शुरू कर दी।
- 3 बार आवेदन के बावजूद एक्सेस से इनकार
- याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि मोहित कुमार ने मेटा के ‘राइट्स मैनेजर’ टूल के लिए 3 बार आवेदन किया, लेकिन बिना कोई स्पष्ट कारण बताए उनका आवेदन खारिज कर दिया गया।
- वकील ने तर्क दिया कि केवल कुछ सौ फॉलोअर्स वाले संदिग्ध खातों को यह एक्सेस मिला हुआ है, जबकि लाखों फॉलोअर्स और बड़े ब्रांड कोलेबोरेटर्स वाले स्थापित क्रिएटर्स को इससे वंचित रखा जा रहा है।
- फर्जी स्ट्राइक के कारण किसी भी क्रिएटर का अकाउंट रातों-रात गायब हो सकता है, जिससे उसकी वर्षों की मेहनत, ब्रांड स्पॉन्सरशिप और कमाई पूरी तरह ठप हो सकती है।
🏛️ दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश और टिप्पणियां
- पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) हलफनामे पर दाखिल करने का आदेश
- कोर्ट ने मेटा को अपने ‘राइट्स मैनेजर’ टूल की पूरी नीति और पात्रता मानदंड (Policy & Eligibility Criteria) रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।
- इसके साथ ही मेटा को यह भी स्पष्ट करना होगा कि किस आधार पर असली क्रिएटर्स के आवेदनों को खारिज किया जाता है।
- सिस्टम की खामियों पर नजर (Chinks in the Armour)
- न्यायमूर्ति भंभानी ने कहा कि सोशल मीडिया पर कॉपीराइट हथियाने और फर्जी स्ट्राइक का यह मुद्दा कई क्रिएटर्स के मामलों में सामने आ रहा है और इससे मुकदमों की संख्या बढ़ रही है।
- कोर्ट ने कहा: “कवच में कुछ दरारें (Chinks in the armour) और खामियां हैं जिन्हें हमने देखा है। बेहतर होगा कि हम इसे मिलकर सुलझा लें।”
- सामग्री बहाली (Content Restoration) का निर्देश
- कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि मोहित कुमार आवश्यक सबूत पेश करते हैं कि सामग्री उनकी है, तो फर्जी स्ट्राइक के कारण हटाए गए सभी वीडियो और पोस्ट तुरंत बहाल (Restore) किए जाएं।
⚖️ कोर्ट में मेटा (Meta) का पक्ष
- मेटा के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आई फर्जी स्ट्राइक को हटा दिया गया है और हटाया गया कंटेंट बहाल कर दिया गया है।
- कंपनी ने आश्वासन दिया कि तकनीकी सत्यापन के बाद याचिकाकर्ता के अकाउंट को इन विवादित स्ट्राइक के आधार पर निलंबित या हटाया नहीं जाएगा।
- मेटा ने कोर्ट के सामने ‘राइट्स मैनेजर’ टूल की पूरी पॉलिसी रखने और याचिकाकर्ता के आवेदन की समीक्षा करने की बात स्वीकार की।

