मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (Division Bench) |
| पीठ (Bench) | न्यायमूर्ति डी. के. सिंह एवं न्यायमूर्ति टी. एम. नदाफ |
| याचिकाकर्ता | भारतीय स्टेट बैंक (SBI) |
| प्रतिवादी/ग्राहक | प्रदोष कुमार बनर्जी (70 वर्ष, बेंगलुरु) |
| मुद्दा | अनधिकृत ऑनलाइन बैंकिंग लेनदेन में ‘शून्य दायित्व नियम’ (Zero Liability Policy) |
| अदालत का फैसला | SBI की याचिका खारिज; ग्राहक को ₹1.99 लाख वापस करने और मुआवजा देने का निर्देश। |
Online Transaction Fraud: कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने बैंकों को अपने ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम को अत्यधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए हैं ताकि साइबर जालसाजों (Fraudsters) के लिए उसमें सेंध लगाना या उस तक आसान पहुंच बनाना असंभव हो जाए।
न्यायमूर्ति डी. के. सिंह और न्यायमूर्ति टी. एम. नदाफ की खंडपीठ ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया। एसबीआई ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के 15 अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बैंक को एक 70 वर्षीय ग्राहक के खाते से हुई धोखाधड़ी की राशि लौटाने का निर्देश दिया गया था।
🏛️ कर्नाटक उच्च न्यायालय के प्रमुख निष्कर्ष एवं टिप्पणियां
- सार्वजनिक धन और अर्थव्यवस्था की सुरक्षा
- खंडपीठ ने कहा: “बैंकिंग क्षेत्र में शामिल पैसा जनता का पैसा (Public Money) है और बैंक जनता के प्रति जवाबदेह हैं। किसी भी विफलता से न केवल बैंक के विशेष ग्राहक पर असर पड़ेगा, बल्कि देश की पूरी अर्थव्यवस्था और बैंक पर लोगों के विश्वास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।”
- उपभोक्ता सुरक्षा अनिवार्य
- कोर्ट ने माना कि सुरक्षा प्रणाली में खामियों के कारण हुई अवैध निकासी के लिए बैंक को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, न कि ग्राहक को।
धोखाधड़ी का मामला और कानूनी प्रक्रिया (Case Background)
- अनधिकृत लेनदेन (Unauthorized Transactions)
- बेंगलुरु के सीवी रमन नगर स्थित एसबीआई शाखा के 70 वर्षीय ग्राहक प्रदोष कुमार बनर्जी के खाते से 19 जुलाई 2022 को धोखे से ₹1.99 लाख और ₹25,000 की दो अलग-अलग अनधिकृत कटौतियां (Debit) की गईं।
- ग्राहक ने घटना के 3 घंटे के भीतर बैंक को ईमेल के जरिए सूचित किया। बैंक ने ₹25,000 तुरंत क्रेडिट कर दिए, लेकिन शेष ₹1.99 लाख वापस करने से इनकार कर दिया।
- उपभोक्ता मंचों का रुख (Consumer Courts’ Journey)
- जिला उपभोक्ता मंच (DCDRC): बैंक की इस दलील को स्वीकार करते हुए शिकायत खारिज कर दी कि ग्राहक ने ओटीपी (OTP) शेयर किया होगा। हालांकि, ग्राहक ने लगातार कहा कि उसने कोई ओटीपी शेयर नहीं किया था।
- राज्य उपभोक्ता आयोग (KSCDRC): ग्राहक की अपील पर राज्य आयोग ने जिला मंच के फैसले को पलट दिया। राज्य आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सर्कुलर और ‘शून्य दायित्व नीति’ (Zero Liability Clause) का हवाला देते हुए बैंक में सेवा की कमी (Deficiency of Service) मानी।
- राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC): राज्य आयोग के फैसले को बरकरार रखते हुए बैंक को ग्राहक को राशि लौटाने का आदेश दिया।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ‘शून्य दायित्व’ नीति (Zero Liability Policy)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ‘शून्य दायित्व’ नीति (Zero Liability Policy) का उद्देश्य डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन (जैसे UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग) में होने वाली धोखाधड़ी (Fraud) से ग्राहकों के वित्तीय हितों की रक्षा करना है।
यह नीति बताती है कि अनधिकृत या धोखाधड़ी वाले लेनदेन के मामलों में ग्राहक की कोई वित्तीय देनदारी नहीं होगी, बशर्ते उन्होंने समय पर इसकी सूचना बैंक को दी हो।
अनधिकृत लेनदेन में ग्राहकों की देनदारी के नियम
धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहक की देनदारी इस बात पर निर्भर करती है कि गलती किसकी है और बैंक को इसकी सूचना कब दी गई।
| स्थिति / परिदृश्य | ग्राहक की दायित्व सीमा (Liability) |
| 1. बैंक की लापरवाही या सिस्टम की सुरक्षा में चूक | शून्य दायित्व (Zero Liability) — ग्राहक को कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा, चाहे उन्होंने सूचना किसी भी समय दी हो। |
| 2. तीसरे पक्ष (Third Party) की धोखाधड़ी (जहाँ न बैंक की गलती है, न ग्राहक की) | सूचना देने के आधार पर निर्धारित: |
| ➔ सूचना 3 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर दी गई | शून्य दायित्व (Zero Liability) — पूरा पैसा वापस मिलेगा। |
| ➔ सूचना 4 से 7 कार्य दिवसों के भीतर दी गई | सीमित दायित्व (Limited Liability) — ₹5,000 से ₹25,000 तक की अधिकतम सीमा (खाते/कार्ड के प्रकार के अनुसार)। बाकी राशि बैंक लौटाएगा। |
| ➔ सूचना 7 कार्य दिवसों के बाद दी गई | बैंक की अपनी बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीति के अनुसार तय होगा। |
| 3. ग्राहक की लापरवाही (जैसे OTP, PIN या पासवर्ड शेयर करना) | 100% ग्राहक का दायित्व — जब तक कि बैंक को सूचित करने के बाद कोई नया अनधिकृत लेनदेन न हो। सूचित करने के बाद के सभी लेनदेन पर शून्य दायित्व लागू होगा। |
धन वापसी (Shadow Credit) की प्रक्रिया और नियम
- 10 दिनों के भीतर रिफंड: सूचना मिलने की तारीख से 10 कार्य दिवसों (10 Working Days) के भीतर बैंक को अनधिकृत लेनदेन की राशि ग्राहक के खाते में जमा (Shadow Credit) करनी होती है।
- 90 दिनों में मामले का निपटारा: बैंक को ऐसी शिकायतों का निवारण सूचना मिलने की तारीख से 90 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है।
- ब्याज का नुकसान नहीं: यदि जमा की गई राशि सावधि जमा (FD) या बचत खाते से संबंधित है, तो ग्राहक को उस पर मिलने वाले ब्याज का कोई नुकसान नहीं होगा।
ग्राहकों के लिए ध्यान रखने योग्य बातें
- तत्काल रिपोर्टिंग: धोखाधड़ी का पता चलते ही तुरंत बैंक के टोल-फ्री नंबर, ईमेल या शाखा में जाकर शिकायत दर्ज कराएं और पावती/शिकायत नंबर (Ref Number) लें।
- गोपनीयता बनाए रखें: अपना OTP, यूपीआई पिन, कार्ड का सीवीवी या इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड किसी के साथ भी साझा न करें।
- एसएमएस और ईमेल अलर्ट: सुनिश्चित करें कि आपका सही मोबाइल नंबर और ईमेल बैंक में पंजीकृत है ताकि हर लेनदेन का अलर्ट तुरंत मिल सके।

