Tuesday, September 29, 2026
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Definition Of Senior Citizen: 57 वर्ष की महिला कानूनन ‘वरिष्ठ नागरिक’ नहीं होती हैं; ₹6,000 भरण-पोषण का आदेश रद्द, पढ़िए फैसला

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय न्यायाधीशन्यायमूर्ति एम. धंदापाणि (Justice M. Dhandapani)
संबंधित कानूनमाता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007
मुख्य मुद्दाक्या 60 वर्ष से कम आयु का गैर-माता-पिता रिश्तेदार इस अधिनियम के तहत भरण-पोषण मांग सकता है?
कोर्ट का निर्णयनहीं। 60 वर्ष से कम आयु और माता/पिता न होने पर अथॉरिटी के पास सुनवाई का अधिकार नहीं है।
अंतिम आदेशजिला कलेक्टर का ₹6,000 मासिक भत्ता देने का आदेश रद्द; 60 वर्ष की आयु के बाद नई शिकायत की अनुमति।

Definition Of Senior Citizen: मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए एक आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक दंपति को 57 वर्षीय महिला को हर महीने ₹6,000 भरण-पोषण (मासिक गुजारा भत्ता) देने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति एम. धंदापाणि (Justice M. Dhandapani) की एकल पीठ ने 4 अगस्त 2026 के अपने आदेश में कहा कि चूंकि शिकायतकर्ता अधिनियम के मानदंडों को पूरा नहीं करती थी, इसलिए अधिकारियों के पास इस शिकायत पर सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) ही नहीं था। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायत दर्ज कराते समय महिला माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) के तहत न तो “वरिष्ठ नागरिक” थी और न ही याचिकाकर्ताओं की “माता/अभिभावक”।

हाई कोर्ट के प्रमुख बिंदु और टिप्पणियां

  1. अधिनियम के तहत योग्यता की शर्तें
    • वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत राहत पाने के लिए व्यक्ति का 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का होना अनिवार्य है, या फिर वह प्रतिवादी का माता/पिता (Parent) होना चाहिए।
    • शिकायत दर्ज करते समय महिला की आयु 57 वर्ष थी और वह याचिकाकर्ताओं की मां नहीं बल्कि रिश्तेदार (पत्नी की मौसेरी बहन) थी।
  2. अदालत की टिप्पणी:“शिकायत दर्ज करने की तिथि पर उत्तरदाता ने 60 वर्ष की आयु प्राप्त नहीं की थी, इसलिए वह 2007 अधिनियम के प्रावधानों के तहत ‘वरिष्ठ नागरिक’ की परिभाषा में नहीं आती है। वह याचिकाकर्ताओं की माता भी नहीं है। ऐसी स्थिति में, शिकायत स्वयं पोषणीय (Maintainable) नहीं है और अधिकारियों के पास इस पर सुनवाई का कोई क्षेत्राधिकार नहीं था।”
  3. भविष्य के लिए स्वतंत्रता (Liberty to File Fresh Plea)
    • अदालत ने जिला कलेक्टर, कन्याकुमारी द्वारा पारित 17 अप्रैल 2025 के आदेश को निरस्त (Set Aside) कर दिया।
    • हालांकि, अदालत ने महिला को यह छूट दी कि 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद यदि वह कानूनन पात्र होती है, तो सक्षम अथॉरिटी के समक्ष नई शिकायत दर्ज करा सकती है।

मामले का पृष्ठभूमि विवरण (Case Background)

  • संपत्ति का बंदोबस्त (Settlement Deed): महिला ने अपनी मां और मामा के साथ मिलकर अपनी कीमती संपत्ति एक रिश्तेदार (दंपति) के नाम सेटलमेंट डीड के जरिए स्थानांतरित की थी।
  • रद्दीकरण की मांग: बाद में महिला ने इस सेटलमेंट डीड को रद्द कराने के लिए राजस्व मंडल अधिकारी (RDO) के समक्ष आवेदन किया, जिसे RDO ने खारिज कर दिया।
  • कलेक्टर का आदेश: RDO के फैसले को जिला कलेक्टर (कन्याकुमारी) के समक्ष चुनौती दी गई। कलेक्टर ने डीड रद्द करने से तो इनकार कर दिया, लेकिन अपनी ओर से दंपति को निर्देश दिया कि वे महिला को ₹6,000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता दें।
  • हाई कोर्ट में चुनौती: इस आदेश के खिलाफ दंपति ने हाई कोर्ट का रुख किया और तर्क दिया कि 57 वर्ष की आयु में महिला वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत भरण-पोषण की हकदार नहीं है।

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