Baby Swapping: बिहार के बिहारशरीफ स्थित एक निजी अस्पताल में बच्चे की अदला-बदली (Baby Swapping) के सनसनीखेज मामले में पटना हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने अस्पताल रिकॉर्ड में गंभीर फर्जीवाड़ा पकड़ने के बाद नालंदा के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को अस्पताल का लाइसेंस तत्काल रद्द करने और पुलिस अधीक्षक (SP) को खुद पूरे मामले की जांच करने का आदेश दिया है। DNA रिपोर्ट से यह साबित हो गया है कि अस्पताल ने जिस बच्ची को मां के हवाले किया था, वह उसकी जैविक संतान (Biological Child) नहीं है।
मामले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- क्या था दावा: 25 मार्च 2023 को अविनाश कुमार की पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया था।
- लापरवाही/धोखाधड़ी: बेहतर इलाज के नाम पर ‘नवजीवन शिशु अस्पताल’ के NICU में भर्ती कराया गया, जहां से डिस्चार्ज के वक्त बेटे की जगह बेटी थमा दी गई।
- DNA टेस्ट से खुलासा: हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर कराए गए DNA टेस्ट ने माता-पिता के दावे पर मुहर लगा दी।
- सुरक्षा में भारी चूक: अस्पताल के NICU वार्ड में न तो कोई CCTV कैमरा था और न ही कोई सुरक्षा गार्ड तैनात था।
रजिस्टर में छेड़छाड़: ‘Male’ को स्याही बदलकर बनाया ‘Female’
सुनवाई के दौरान कोर्ट में अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की गई, जिसमें चौंकाने वाली हेराफेरी सामने आई।
- अस्पताल के एंट्री रजिस्टर में जहां पहले ‘Male’ (लड़का) दर्ज था, वहां बाद में अलग स्याही से ‘Fe’ जोड़कर उसे ‘Female’ (लड़की) बना दिया गया था।
- पूछताछ में डॉक्टर ने खुद रजिस्टर में यह बदलाव करने की बात स्वीकार की है।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
“नवजात की सुरक्षा और रिकॉर्ड में इस तरह की हेराफेरी कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।” कोर्ट ने पुलिस की शुरुआती जांच में ढिलाई पर भी भारी नाराजगी जताई।
आगे क्या होगा एक्शन?
- लाइसेंस कैंसिलेशन: नालंदा डीएम को ‘नवजीवन शिशु अस्पताल’ का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्देश।
- SP करेंगे जांच: नालंदा एसपी अब व्यक्तिगत रूप से इस बात की गहन जांच करेंगे कि असली बच्चा कहां गया और इस रैकेट/लापरवाही में कौन-कौन शामिल है।

