केस अवलोकन टेबल (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय |
| पीठ | न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद |
| मुख्य विषय | याचिकाओं में फ़ॉन्ट (जैसे इटैलिक), लाइन स्पेसिंग, मार्जिन और प्रारूपण (Formatting Rules) के नियम |
| मूल कारण | याचिका के राहत खंड (Prayer Clause) को Italicised Font में लिखा जाना |
| आदेश | रजिस्ट्रार जनरल से प्रारूपण मानकों (Drafting Standards) पर रिपोर्ट तलब |
Drafting The Petition: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली याचिकाओं (Petitions) की टाइपिंग फ़ॉन्ट, लाइन स्पेसिंग, प्रतीकों (Signs) और मार्जिन को नियंत्रित करने वाले नियमों या दिशानिर्देशों का विवरण मांगा है।
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने एक रिट याचिका में राहत खंड (Relief Clause / Prayer) को इटैलिक फ़ॉन्ट (Italicised Font) में लिखे जाने पर प्रारंभिक आपत्ति जताते हुए यह निर्देश जारी किया।
मामले की पृष्ठभूमि और अदालती कार्यवाही
- स्टाम्प रिपोर्टर अनुभाग की खामी पर कोर्ट की नाराजगी
- 6 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने देखा कि याचिका के प्रेयर क्लॉज में इटैलिक फ़ॉन्ट का इस्तेमाल किया गया था, जो कोर्ट के नियमों और मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के आदेशों के तहत स्वीकार्य नहीं है।
- कोर्ट ने स्टाम्प रिपोर्टर की ओर से पेश हुए सहायक रजिस्ट्रार राम भवन को तलब किया और यह पूछा कि फ़ॉर्मेटिंग त्रुटि के बावजूद याचिका को पास करने के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की गई।
- अधिकारियों और समीक्षा अधिकारी (Review Officer) का स्पष्टीकरण
- सहायक रजिस्ट्रार ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) में बिना शर्त माफी मांगते हुए आश्वासन दिया कि ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।
- याचिका की जांच करने वाले समीक्षा अधिकारी (RO) ने लिखित स्पष्टीकरण में बताया कि:
- इटैलिक टाइपिंग को त्रुटि (Defect) के रूप में चिह्नित करने का कोई स्पष्ट निर्देश या नियम मौजूद नहीं था।
- टाइम्स न्यू रोमन (Times New Roman) के अलावा, याचिकाओं के प्रारूपण के लिए फ़ॉन्ट के उपयोग के संबंध में कोई स्पष्ट नियम या अभ्यास (Practice) निर्धारित नहीं है।
- नियमों में अस्पष्टता पर कोर्ट का रुख
- पीठ ने पाया कि याचिकाओं में हेडर, फुटर या बोल्ड अक्षरों (Bold Letters) के उपयोग से संबंधित भी कोई स्पष्ट लिखित आवश्यकता या नियम नहीं मिला।
रजिस्ट्रार जनरल को कोर्ट का निर्देश
इस स्थिति को देखते हुए, उच्च न्यायालय ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे 10 अगस्त को फुल बेंच (Full Bench) या मुख्य न्यायाधीश द्वारा जारी ऐसे सभी नियमों और दिशानिर्देशों (यदि कोई हों) की रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखें, जो याचिकाओं के प्रारूपण में फ़ॉन्ट, स्पेसिंग, साइन और मार्जिन को नियंत्रित करते हैं।

