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मामले की पृष्ठभूमि और विवाद का घटनाक्रम
- बॉम्बे हाईकोर्ट का सुझाव और BMC का अभियान:बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले बीएमसी (BMC) को निर्देश दिया था कि वह मुंबई में दिवाली के दौरान बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए मशहूर हस्तियों (Celebrities) को जोड़कर जन जागरूकता अभियान चलाए। इसी के तहत अभिनेत्री दीया मिर्जा सहित कई हस्तियों ने बिना कोई शुल्क (Pro Bono) लिए नागरिकों से दीयों से दिवाली मनाने और शोर/पटाखों से बचने की अपील करते हुए वीडियो संदेश रिकॉर्ड किए थे।
- राजनीतिक नेताओं का विरोध और वीडियो डिलीट होना:सोशल मीडिया पर वीडियो जारी होने के बाद कुछ राजनीतिक नेताओं ने दीया मिर्जा के वीडियो पर आपत्ति जताते हुए अभियान को “हिंदू विरोधी” का टैग दे दिया। राजनीतिक pushback के दबाव में आकर BMC ने अन्य हस्तियों के वीडियो बरकरार रखे, लेकिन दीया मिर्जा का वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से हटा (Delete) दिया।
- सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक अवलोकनों का हवाला:बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का स्मरण कराया जिसमें दिवाली को एक राष्ट्रीय त्योहार (National Festival) बताया गया था, जिसे जाति, धर्म या समुदाय से परे हटकर सभी नागरिक मनाते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियां की जाती हैं तो देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को ठेस पहुंचती है।
मुख्य विधिक निष्कर्ष
1. पर्यावरण कानून किसी धर्म या वर्ग तक सीमित नहीं (Year-round Protection):
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत के प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आदेश पूरे साल के 365 दिनों के लिए लागू रहते हैं। स्वच्छ हवा में सांस लेना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, इसलिए इस मुद्दे को किसी विशेष त्यौहार या धर्म से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
2. सार्वजनिक सड़कों पर पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध:
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने पूर्ववर्ती निर्देशों को दोहराते हुए कहा कि मुंबई में सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। केवल निर्धारित समय-सीमा के भीतर निजी परिसरों (Private Premises) में ही CSIR-NEERI द्वारा स्वीकृत हरित पटाखे फोड़ने की अनुमति होगी।
मुंबई: भारत का संविधान के अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण व स्वास्थ्य का मौलिक अधिकार), अनुच्छेद 51A(g) (पर्यावरण और वनों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य), धर्मनिरपेक्षता (Secular Spirit of the Constitution), वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में नागरिक भागीदारी के विधिक संरक्षण पर बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत साहसिक और कड़ा फैसला सुनाया है।
बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी (Justice Girish Kulkarni) और न्यायमूर्ति नीला गोखले (Justice Neela Gokhale) की खंडपीठ ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा पर्यावरण-अनुकूल दिवाली अभियान के तहत अभिनेत्री दीया मिर्ज़ा (Dia Mirza) के जन-जागरूकता वीडियो को राजनीतिक विरोध के दबाव में हटाने (Deleting/Pulling Down) पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
अदालत ने राजनीतिक नेताओं की संकीर्ण मानसिकता (Petty-mindedness) की तीखी भर्त्सना करते हुए बीएमसी को निर्देशित किया कि वह हटाए गए वीडियो को तुरंत सोशल मीडिया पर पुनः अपलोड (Re-upload) करे ताकि समाज और संविधान में आम जनता का विश्वास बहाल हो सके। खंडपीठ ने दो-टूक कहा कि प्रदूषण नियंत्रण का मुद्दा विशुद्ध रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण का विषय है, जिसे कोई भी सांप्रदायिक या राजनीतिक रंग देकर हाईजैक नहीं किया जा सकता।
उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. ‘पर्यावरण के मुद्दे को दूसरा रंग देकर हाईजैक नहीं किया जा सकता; हर कोई एक ही हवा में सांस लेता है’:
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने राजनीतिक ध्रुवीकरण पर प्रहार करते हुए अपने 3 नवंबर के आदेश में दर्ज किया: *”हमारा आदेश केवल दिवाली के लिए नहीं, बल्कि वर्ष के सभी 365 दिनों (Throughout all 365 days) के लिए प्रभावी है। पर्यावरण के इस मुद्दे को कोई अन्य रंग देकर हाईजैक (Hijacked) नहीं किया जाना चाहिए। यह विशुद्ध रूप से एक पर्यावरणीय मुद्दा (Purely an environment issue) है। इस शहर या इस देश में रहने वाला जो कोई भी व्यक्ति सांस लेता है, वह एक ही हवा में सांस ले रहा है (Breathing the same air)। प्रदूषण का जहर किसी की जाति, धर्म या समुदाय को देखकर असर नहीं करता।”*
2. ‘कोई स्वेच्छा से सामाजिक कार्य के लिए आगे आ रहा है और आप उसे प्रताड़ित कर रहे हैं? यह संकीर्ण मानसिकता है’:
- अदालत ने दीया मिर्ज़ा के विरुद्ध शुरू किए गए राजनीतिक अभियान और ट्रोलिंग की कड़ी निंदा की:*”जब हमने जन-जागरूकता फैलाने का आदेश दिया था, तो क्या उसमें कोई ऐसी शर्त (Qualification) थी कि अमुक व्यक्ति अभियान में भाग लेने के लिए पात्र नहीं होगा?यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से (Voluntarily) और बिना किसी पारिश्रमिक के (Pro Bono) आगे आ रहा है, जो हमेशा सामाजिक कार्यों से जुड़ा रहा है, तो क्या आप उस व्यक्ति को प्रताड़ित (Reprimand) करेंगे?इस प्रकार की संकीर्ण मानसिकता (Petty-mindedness) को यह अदालत कभी स्वीकार या अनुमोदित नहीं कर सकती। किसी भी व्यक्ति द्वारा की गई बेतुकी टिप्पणियों से समाज का संतुलन और संविधान में जनता का भरोसा नहीं डगमगाना चाहिए।”*
3. ‘दिवाली राष्ट्रीय पर्व है; क्या हम एक धर्मनिरपेक्ष देश नहीं हैं?’:
- खंडपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए सेक्युलर ताने-बाने की याद दिलाई:“सदियों से दिवाली ने एक राष्ट्रीय पर्व का स्वरूप ग्रहण किया है। यह त्योहार हर जाति, समुदाय और धर्म के लोग मनाते हैं। जब इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियां की जाती हैं, तो सर्वोच्च न्यायालय की सुस्थापित टिप्पणियों को पूरी तरह भुला दिया जाता है। क्या हम एक धर्मनिरपेक्ष देश (Secular Country) नहीं हैं? यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2026)
| संदर्भ / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| फोरम / न्यायालय | बॉम्बे उच्च न्यायालय, मुख्य पीठ मुंबई (स्वतः संज्ञान जनहित याचिका क्षेत्राधिकार) |
| पीठ | न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी (Justice Girish Kulkarni) एवं न्यायमूर्ति नीला गोखले (Justice Neela Gokhale) |
| केस संदर्भ | स्वतः संज्ञान याचिका — इन री: ध्वनि एवं पर्यावरण प्रदूषण [In re: Noise and Environmental Pollution] |
| आदेश की तिथि | 3 नवंबर 2026 |
| अभियान की पृष्ठभूमि | मुंबई में तेजी से बिगड़ती वायु गुणवत्ता (Air Quality) और ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए उच्च न्यायालय ने बीएमसी को निर्देश दिया था कि वह नागरिकों को जागरूक करने हेतु जानी-मानी सामाजिक व फिल्मी हस्तियों की मदद ले। |
| दीया मिर्ज़ा का संदेश (Pro Bono) | संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की गुडविल एंबेसडर और अभिनेत्री दीया मिर्ज़ा ने बिना कोई शुल्क लिए (Pro Bono) बीएमसी के लिए एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया, जिसमें नागरिकों से सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे न फोड़ने और दिवाली को पटाखों के शोर के बजाय रोशनी व दीपों के साथ पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाने की अपील की गई थी। |
| राजनीतिक विवाद और बीएमसी का कदम | कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं और सोशल मीडिया हैंडल्स ने दीया मिर्ज़ा की भागीदारी पर तीखा हमला बोला और इसे “हिंदू-विरोधी अभियान” का ठप्पा लगाने का प्रयास किया। राजनीतिक दबाव और विवाद के आगे झुकते हुए बीएमसी प्रशासन ने चुपचाप केवल दीया मिर्ज़ा का वीडियो अपने सभी आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स से डिलीट कर दिया, जबकि अन्य हस्तियों के वीडियो बरकरार रखे। |
| अभिनेत्री का स्पष्टीकरण | दीया मिर्ज़ा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस जनहित अभियान के लिए नगर निगम से कोई पैसा नहीं लिया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्वच्छ हवा और स्वास्थ्य सभी का अधिकार है, किंतु आज के दौर में भलाई का कोई मोल नहीं रह गया है। |
| हाईकोर्ट का अंतिम निर्देश | बीएमसी के इस कदम को असंवैधानिक और घुटने टेकने वाला मानते हुए अदालत ने वीडियो को तुरंत रिस्टोर (Re-upload) करने का आदेश दिया। |
पटाखों और वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त विधिक आदेश
खंडपीठ ने इस विवाद के बीच मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए अपने पूर्व-निर्धारित विधिक प्रतिबंधों को पुनः स्पष्ट और दोहराया:
- सार्वजनिक सड़कों पर पूर्ण प्रतिबंध: सार्वजनिक सड़कों, चौराहों और गलियों (Public Roads and Streets) पर किसी भी प्रकार के पटाखे फोड़ने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध (Strictly Barred) रहेगा।
- केवल निजी परिसरों में ग्रीन क्रैकर्स: केवल CSIR-NEERI द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखों (Green Crackers) का उपयोग ही अनुमत है, और वह भी केवल निजी परिसरों (Private Premises) के भीतर।
- निर्धारित समय-सीमा: आतिशबाजी केवल अदालत द्वारा निर्धारित विशिष्ट समय-सीमा (जैसे रात्रि 8 बजे से 10 बजे) के भीतर ही की जा सकेगी।
- वर्षभर का प्रभाव: अदालत ने साफ किया कि वायु गुणवत्ता और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उसके आदेश केवल दिवाली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह विधिक निर्देश वर्ष के सभी 365 दिनों पर लागू होते हैं।
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: ‘पर्यावरण संरक्षण, धर्मनिरपेक्षता और प्रशासनिक रीढ़’
- सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) का गैर-सांप्रदायिक चरित्र:
- सर्वोच्च न्यायालय ने सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य [(1991) 1 SCC 598] और एम.सी. मेहता मामलों में स्थापित किया है कि प्रदूषण-मुक्त जल और वायु का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का मूल आधार है।
- बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस सार्वभौमिक सत्य को रेखांकित किया कि फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाला धुआं और पीएम 2.5 कण किसी व्यक्ति का धर्म पूछकर नुकसान नहीं पहुंचाते। अतः पर्यावरण अभियानों को किसी विशिष्ट धर्म के विरुद्ध षड्यंत्र बताना वैज्ञानिक और संवैधानिक रूप से असंगत है।
- प्रशासनिक संस्थाओं की स्वायत्तता और विधिक रीढ़:
- बीएमसी जैसी देश की सबसे बड़ी और समृद्ध नगर निगम द्वारा कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स और राजनीतिक बयानों से डरकर अपने ही जागरूकता वीडियो को डिलीट कर देना प्रशासनिक दुर्बलता को दर्शाता है।
- अदालत ने नगर निगम को याद दिलाया कि वह एक स्वायत्त वैधानिक निकाय है जिसे अदालत के निर्देशों के तहत जनस्वास्थ्य की रक्षा करनी है, न कि राजनीतिक दबाव में संकीर्णता का शिकार होना है।
- नागरिक कर्तव्य और वॉलंटियरिंग की सुरक्षा (Article 51A(g)):
- संविधान का अनुच्छेद 51A(g) प्रत्येक नागरिक पर यह दायित्व डालता है कि वह पर्यावरण की रक्षा और सुधार करे।
- जब कोई नागरिक या प्रख्यात हस्ती निस्वार्थ भाव से समाज को शिक्षित करने के लिए आगे आती है, तो उसे संरक्षण देना राज्य और न्यायपालिका का संवैधानिक कर्तव्य बन जाता है। यदि सार्वजनिक कारणों से जुड़े नागरिकों को ऐसे ही राजनीतिक हमलों के सामने अकेला छोड़ दिया जाएगा, तो कोई भी बुद्धिजीवी या कलाकार सामाजिक सुधार अभियानों में भाग लेने का साहस नहीं जुटा सकेगा।
विधिक विवरण एवं संदर्भ
- न्यायालय: बॉम्बे उच्च न्यायालय, मुख्य पीठ मुंबई (स्वतः संज्ञान जनहित याचिका क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: स्वतः संज्ञान जनहित याचिका — ध्वनि एवं पर्यावरण प्रदूषण संदर्भ [Suo Motu PIL — In re: Noise and Environmental Pollution / 2026]
- पीठ: न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी (Justice Girish Kulkarni) एवं न्यायमूर्ति नीला गोखले (Justice Neela Gokhale) (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 3 नवंबर 2026
- कार्यवाही का परिणाम: बीएमसी को डिलीट किया गया वीडियो तुरंत पुनः अपलोड करने का निर्देश; सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध का सख्त प्रवर्तन सुनिश्चित करने का आदेश।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार), अनुच्छेद 51A(g) (पर्यावरण संरक्षण का मूल कर्तव्य), तथा प्रस्तावना (पंथनिरपेक्षता / Secularism)
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 सहपठित ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000
- वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981
- मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 (MMC Act, 1888) — सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और न्यूसेंस की रोकथाम के वैधानिक कर्तव्य
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- पर्यावरणीय जन-जागरूकता और धर्मनिरपेक्षता का विधिक मानक: ‘पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य का संरक्षण एक शुद्ध संवैधानिक और वैज्ञानिक विषय है; इसे किसी भी प्रकार का राजनीतिक, सांप्रदायिक या धार्मिक रंग देकर हाईजैक करने की अनुमति नहीं दी जा सकती; समाज में प्रत्येक नागरिक समान हवा में सांस लेता है और प्रदूषण सभी के स्वास्थ्य पर समान रूप से प्रहार करता है; जन-जागरूकता अभियानों में स्वेच्छा से भाग लेने वाले नागरिकों और कलाकारों को राजनीतिक विद्वेष का शिकार नहीं बनाया जा सकता; नगर निगमों का कर्तव्य है कि वे राजनीतिक दबाव में घुटने टेकने के बजाय संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और अदालती आदेशों के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण अभियानों को पूरी दृढ़ता से संचालित करें।’
- वर्तमान स्थिति व अनुपालन निर्देश: बॉम्बे हाईकोर्ट के इस आदेश के तुरंत बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के जनसंपर्क विभाग और आईटी सेल को अभिनेत्री दीया मिर्ज़ा के आधिकारिक वीडियो संदेश को अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक हैंडल्स पर पुनः लाइव (Re-upload) करने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी है; साथ ही, मुंबई पुलिस आयुक्त और बीएमसी वार्ड अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने वालों के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
Actress Row: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court), मुंबई |
| पीठ | न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी एवं न्यायमूर्ति नीला गोखले |
| मामला/विषय | वायु व ध्वनि प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान याचिका (In re: Noise and Environmental Pollution) |
| मूल विवाद | BMC के ‘पटाखा-मुक्त दिवाली’ अभियान में अभिनेत्री दीया मिर्जा का वीडियो जारी होना, जिसके बाद कुछ नेताओं द्वारा इसे “एंटी-हिंदू” बताकर आपत्ति जताना और BMC द्वारा वीडियो को सोशल मीडिया से डिलीट करना। |
| अदालत का फैसला | BMC को सख्त निर्देश: दीया मिर्जा के हटाए गए वीडियो को तुरंत दोबारा अपलोड (Re-upload) किया जाए; पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर कोई राजनीतिक/सांप्रदायिक रंग स्वीकार्य नहीं होगा। |
| पटाखों पर रोक | सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे; केवल निजी परिसरों में निर्धारित घंटों के दौरान हरित पटाखे (Green Crackers) फोड़े जा सकते हैं। |

