Monday, November 9, 2026
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Copyright Royalty: होटल के कमरों में केबल टीवी पर बजने वाले गानों-संगीत के लिए लेना होगा कॉपीराइट लाइसेंस…सभी व्यवसायी ध्यान से खबर पढ़ें

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति देबांग्सु बसाक एवं न्यायमूर्ति मो. शब्बार रशीदी (कलकत्ता उच्च न्यायालय)
पक्षकारIPRS बनाम होटल अपोलो एंड टूर प्राइवेट लिमिटेड
संबंधित कानूनकॉपीराइट अधिनियम, 1957 (धारा 2(ff), धारा 52(1)(k)) एवं केबल टीवी अधिनियम
मुख्य कानूनी सिद्धांतहोटल के कमरों में टीवी प्रसारण ‘जनता तक संचार’ और व्यावसायिक उपयोग है; केवल केबल ऑपरेटर का लाइसेंस होटल को रॉयल्टी चुकाने से छूट नहीं देता।
अदालत का निर्णयIPRS की अपील स्वीकार; होटल पर बिना लाइसेंस गानों/टीवी प्रसारण करने पर रोक।

Copyright Royalty: कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्यवस्था दी है कि होटल के कमरों में मेहमानों के लिए केबल टेलीविजन (Cable TV) की सुविधा प्रदान करना व्यावसायिक शोषण (Commercial Exploitation) और कॉपीराइट अधिनियम के तहत “जनता तक संचार” (Communication to the Public) की श्रेणी में आता है।

न्यायमूर्ति देबांग्सु बसाक और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बार रशीदी की पीठ ने 4 अगस्त 2026 को यह निर्णय इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी लिमिटेड (IPRS) द्वारा ‘होटल अपोलो एंड टूर प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि होटल इस तर्क पर कॉपीराइट रॉयल्टी (Copyright Royalty) देने से नहीं बच सकते कि केबल ऑपरेटर ने पहले ही ब्रॉडकास्टर से लाइसेंस ले रखा है।

हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  1. व्यवसाय का मूल्य बढ़ाना (Commercial Value Addition)
    • पीठ की टिप्पणी:“प्रतिवादी (होटल) का यह कृत्य निश्चित रूप से अपीलकर्ता के सदस्यों के साहित्यिक और संगीतमय कार्यों के ‘व्यावसायिक शोषण’ के दायरे में आता है। हो सकता है कि होटल टीवी सेवा के लिए मेहमानों से अलग से शुल्क न ले रहा हो, लेकिन यह सुविधा निश्चित रूप से एक अतिरिक्त सेवा है जो होटल के व्यवसाय के व्यावसायिक मूल्य को बढ़ाती है।”
  2. होटल के मेहमान ‘सब्सक्राइबर’ नहीं
    • केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम की धारा 2(i) के तहत ‘सब्सक्राइबर’ वह व्यक्ति है जो किसी अन्य व्यक्ति को सिग्नल प्रसारित किए बिना टीवी सिग्नल प्राप्त करता है।
    • कोर्ट ने माना कि होटल कमरों में ठहरे मेहमानों को कानूनी रूप से ‘सब्सक्राइबर’ नहीं माना जा सकता क्योंकि वे केवल व्यावसायिक सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
  3. धारा 2(ff) का दायरा:
    • कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 2(ff) के तहत, केबल या उपग्रह के माध्यम से एक से अधिक घरों या व्यावसायिक परिसरों (जिसमें होटल और हॉस्टल के कमरे शामिल हैं) में किसी भी कृति का प्रसारण ‘जनता तक संचार’ माना जाता है।
    • इसके अलावा, अधिनियम की धारा 52(1)(k) के तहत आवासीय परिसरों में छूट दी गई है, लेकिन होटल जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को इस छूट से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।

मामला क्या था? (Case Background)

  1. IPRS का मुकदमा
    • IPRS (जो गीतकारों, संगीतकारों और प्रकाशकों के कॉपीराइट अधिकारों का प्रतिनिधित्व करता है) ने दार्जिलिंग के जिला न्यायाधीश की अदालत में मुकदमा दायर किया था।
    • IPRS का आरोप था कि होटल अपोलो बिना लाइसेंस लिए और रॉयल्टी चुकाए अपने कमरों में लगे टीवी सेटों के माध्यम से उसके सदस्यों के कॉपीराइट वाले गानों और साहित्यिक कृतियों का प्रसारण कर रहा है।
  2. निचली अदालत से हाई कोर्ट तक
    • सितंबर 2024 में जिला जज ने IPRS को अंतरिम राहत (Interim Relief) देने से इनकार कर दिया था।
    • इसके खिलाफ IPRS ने कलकत्ता हाई कोर्ट में अपील दायर की। होटल का तर्क था कि चूंकि उसने केबल ऑपरेटर को पहले से ही सब्सक्रिप्शन शुल्क दे दिया है, इसलिए उसे IPRS को अलग से भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। High Court ने होटल के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया।

अदालत का अंतिम आदेश

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सितंबर 2024 के जिला अदालत के आदेश को उलटते हुए होटल अपोलो पर अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Injunction) लागू कर दी।

अदालत ने होटल को बिना वैध लाइसेंस और निर्धारित वैधानिक रॉयल्टी (Royalty) चुकाए IPRS की सूची में शामिल किसी भी संगीतमय व साहित्यिक कृति का प्रसारण करने या जनता के सामने प्रस्तुत करने से रोक दिया।

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