FOLLOW US FOR MORE LEGAL UPDATES ON WhatsApp
मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?
- गलत दस्तावेजों पर विवाह पंजीकरण:यह मामला तब हाईकोर्ट के समक्ष आया जब विवाह पंजीकरण प्राधिकारी (Marriage Registering Authority) ने केवल एक स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और आधार कार्ड के आधार पर एक जोड़े का विवाह पंजीकृत कर दिया।
- जांच में खुली पोल:अदालत की जांच में पाया गया कि जमा किया गया ट्रांसफर सर्टिफिकेट निर्धारित नियमों के अनुसार सत्यापित ही नहीं किया गया था। पीठ ने पाया कि पंजीकरण अधिकारी के पास विवाह पंजीकृत करने से पहले आयु का कोई सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं था, जो कि उसके वैधानिक कर्तव्यों की सीधी अवहेलना है।
- कानूनी उम्र की शर्त:अदालत ने दोहराया कि विवाह पंजीकरण के आवेदन की तिथि पर दूल्हे की आयु अनिवार्य रूप से 21 वर्ष और दुल्हन की आयु 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए।
हाईकोर्ट के मुख्य विधिक निष्कर्ष और राज्यव्यापी निर्देश
1. “आधार कार्ड और टीसी आयु का सबूत नहीं”:
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड आयु का प्रमाण नहीं है और केवल एक स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015’ (JJ Act, 2015) की धारा 94(2)(i) के तहत उल्लिखित किसी भी श्रेणी के प्रामाणिक दस्तावेजों की शर्तों को पूरा नहीं करता है।
2. सर्वोच्च न्यायालय के ‘सीमा बनाम अश्विनी कुमार’ फैसले का हवाला:
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का संदर्भ देते हुए पीठ ने कहा कि अनिवार्य विवाह पंजीकरण का मूल उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर लगाम लगाना है, इसलिए पंजीकरण प्रक्रिया में आयु के सत्यापन का मजबूत तंत्र होना अनिवार्य है।
3. उत्तर प्रदेश सरकार के लिए 4 प्रमुख निर्देश:
- सत्यापन स्रोत का रिकॉर्ड: उत्तर प्रदेश का ऑनलाइन विवाह पंजीकरण पोर्टल आयु सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए गए मूल स्रोत को अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड करेगा।
- उम्र में विसंगति का फ्लैग: यदि दस्तावेजों में आयु को लेकर कोई भी असमानता दिखती है, तो सिस्टम को उसे रेड फ्लैग (Red Flag) करना होगा।
- ऑटो-सर्टिफिकेट जेनरेशन पर रोक: जब तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी न हो जाए, तब तक डिजिटल विवाह प्रमाण पत्र का स्वचालित जेनरेशन (Automatic Generation) रोका जाएगा।
- मामले का रेफरल: यदि प्रस्तुत दस्तावेज संदेह पैदा करते हैं या किसी पक्ष के नाबालिग होने का संकेत देते हैं, तो आवेदन को तुरंत संबंधित बाल विवाह निषेध अधिकारी (Child Marriage Prohibition Officer) और जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) को भेजा जाएगा।
प्रयागराज (इलाहाबाद): बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act, 2006) की धारा 2(a) (वयस्क विवाह आयु—वर हेतु 21 वर्ष एवं वधू हेतु 18 वर्ष), किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act, 2015) की धारा 94(2) (उम्र निर्धारण के वैधानिक साक्ष्य), उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली, तथा विवाहों के अनिवार्य पंजीकरण पर सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय सीमा बनाम अश्वनी कुमार [(2006) 2 SCC 578] के विधिक मानकों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सुधारपरक फैसला सुनाया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी (Justice Tej Pratap Tiwari) की एकल पीठ ने दीपक पाल (Deepak Pal) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को राज्यव्यापी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने दो-टूक व्यवस्था दी कि विवाह पंजीकरण के दौरान वर और वधू की उम्र के सत्यापन के लिए ‘आधार कार्ड’ (Aadhaar Card) और बिना सत्यापन का स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट (Transfer Certificate – TC) किसी भी सूरत में उम्र का कानूनी और वैध प्रमाण नहीं माने जा सकते। अदालत ने राज्य के ऑनलाइन मैरिज पोर्टल में संरचनात्मक तकनीकी सुधार करने, सत्यापन स्रोत दर्ज करने, और उम्र की विसंगति होने पर ऑटो-सर्टिफिकेट जारी होने पर रोक लगाने का अनिवार्य निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को नियत की गई है।
उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं विधिक टिप्पणियां
1. ‘आधार कार्ड उम्र साबित नहीं कर सकता और टीसी धारा 94 जेजे एक्ट की श्रेणी में नहीं आती’
न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने विवाह पंजीयक द्वारा आधार और साधारण टीसी पर भरोसा करके बाल विवाह का पंजीकरण करने पर सख्त आपत्ति जताते हुए अपने आदेश में स्पष्ट किया: “आधार कार्ड उम्र का प्रमाण साबित नहीं कर सकता (An Aadhaar card cannot prove age), और एक साधारण स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 94(2)(i) में उल्लिखित किसी भी वर्ग के प्रामाणिक दस्तावेजों के विवरण को पूरा नहीं करता। पंजीकरण प्राधिकारी के समक्ष विवाह पंजीकृत करते समय उम्र का कोई सत्यापित और विधिक प्रमाण मौजूद नहीं था, और इस प्रकार पंजीयक ने अपने सांविधिक दायित्वों का निर्वहन करने में घोर विफलता प्रदर्शित की है। अतः ऐसा विवाह पंजीकरण कानूनन कायम नहीं रखा जा सकता।”
2. ‘पंजीकरण केवल रस्म नहीं, इसका ढांचा बाल विवाह रोकने के उद्देश्य को पूरा करे’:
- अदालत ने सीमा बनाम अश्वनी कुमार मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के निर्देशों का हवाला देते हुए टिप्पणी की:“मुद्दा केवल यह नहीं है कि विवाह रजिस्टर में जन्म तिथि दर्ज की गई है या नहीं; बल्कि वास्तविक मुद्दा यह है कि क्या विवाह पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया इस प्रकार संरचित (Structured) है कि वह उम्र का सार्थक और त्रुटिहीन सत्यापन कर सके।पंजीकरण प्रक्रिया का उद्देश्य केवल एक औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि उसी मूल उद्देश्य की पूर्ति करना है जिसके लिए अनिवार्य विवाह पंजीकरण की व्यवस्था की गई है—अर्थात बाल विवाह को हर स्तर पर रोकना।”
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को जारी राज्यव्यापी दिशा-निर्देश
अदालत ने राज्य भर में बाल विवाह के फर्जी पंजीकरण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के विवाह पंजीकरण ऑनलाइन पोर्टल और प्रशासनिक मशीनरी के लिए निम्नलिखित अनिवार्य शर्तें लागू करने का निर्देश दिया:
- आवेदन की तिथि पर वैधानिक आयु की अनिवार्य पुष्टि:
- विवाह पंजीकरण प्राधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे कि विवाह पंजीकरण आवेदन की तिथि पर वर ने 21 वर्ष और वधू ने 18 वर्ष की वैधानिक आयु पूर्ण कर ली है।
- ऑनलाइन मैरिज पोर्टल में तकनीकी सुरक्षा उपाय (Technical Safeguards):
- उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक विवाह पोर्टल पर ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जो सत्यापन के स्रोत (Verification Source) को अनिवार्य रूप से दर्ज करे।
- पोर्टल को उम्र की किसी भी विसंगति (Age Discrepancies) को तकनीकी रूप से ‘फ्लैग’ (चिह्नित) करना चाहिए।
- जब तक दस्तावेजों का निर्धारित विधि से पूर्ण सत्यापन न हो जाए, तब तक विवाह प्रमाण पत्र के स्वतः सृजन (Automatic Generation of Certificate) पर पूर्ण रोक होनी चाहिए।
- कम उम्र या संदेहास्पद दस्तावेजों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई:
- यदि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज किसी पक्षकार के कम उम्र (नाबालिग) होने का संकेत देते हैं या दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर रत्ती भर भी संदेह उत्पन्न होता है, तो पंजीकरण प्राधिकारी उस आवेदन को तुरंत बाल विवाह निषेध अधिकारी (Child Marriage Prohibition Officer – CMPO) और संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate – DM) को आवश्यक दंडात्मक व निरोधात्मक कार्रवाई हेतु अग्रेषित करेंगे।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक विवरण
| विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं विधिक संदर्भ |
| मामले का शीर्षक | दीपक पाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य [इलाहाबाद उच्च न्यायालय] |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी (एकल पीठ) |
| आदेश की तिथि | 27 अक्टूबर 2026 (निर्णय खुला: 28 अक्टूबर 2026) |
| आगामी निर्णायक सुनवाई | 27 नवंबर 2026 (राज्य सरकार द्वारा पोर्टल सुधार व अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा) |
| विवाद का मूल स्रोत | एक विवाह पंजीकरण प्राधिकारी द्वारा बिना किसी सक्षम जांच के केवल एक गैर-सत्यापित स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और आधार कार्ड के आधार पर विवाह को पंजीकृत कर दिया गया था। |
| अदालत द्वारा पाई गई खामी | ट्रांसफर सर्टिफिकेट को नियमों के तहत स्कूल या शिक्षा विभाग के मूल अभिलेखों से सत्यापित नहीं किया गया था; आधार कार्ड जन्म तिथि का कानूनी प्रमाण नहीं है; इसके बावजूद नाबालिग का विवाह दर्ज कर लिया गया। |
| अदालती निर्देश का दायरा | यह आदेश केवल वर्तमान याचिका तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण उत्तर प्रदेश राज्य के सभी विवाह पंजीयकों और ऑनलाइन मैरिज पोर्टल पर समान रूप से लागू होगा। |
विधिक विश्लेषण: ‘उम्र निर्धारण में आधार कार्ड और स्कूल दस्तावेजों की सांविधिक स्थिति’
- आधार कार्ड जन्म तिथि का साक्ष्य क्यों नहीं है?
- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने स्पष्ट परिपत्र जारी कर रखा है कि आधार कार्ड नागरिक की पहचान (Identity) और पते (Address) का प्रमाण है, यह जन्म तिथि का अकाट्य प्रमाण नहीं है क्योंकि आधार बनाते समय जन्म तिथि अक्सर स्व-घोषणा या बिना प्राथमिक रिकॉर्ड के दर्ज कर ली जाती है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने सरोज बनाम सीआईडी (2024) और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने विभिन्न फैसलों में दोहराया है कि जहां आयु का विवाद हो, वहां आधार को उम्र का प्राथमिक साक्ष्य नहीं माना जा सकता।
- किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 94 का क्रम:
- धारा 94(2) के अनुसार किसी व्यक्ति की आयु निर्धारित करने के लिए केवल निम्नलिखित दस्तावेज ही कानूनी रूप से स्वीकार्य हैं:
- नगर निगम, नगर पालिका या जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार द्वारा जारी मूल जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate);
- मान्यता प्राप्त स्कूल/बोर्ड द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन या समकक्ष शैक्षणिक प्रमाण पत्र (Matriculation Certificate);
- यदि उपरोक्त दोनों उपलब्ध न हों, तभी सक्षम मेडिकल बोर्ड द्वारा किया गया ऑसिफिकेशन टेस्ट (Ossification Test)।
- एक साधारण स्कूल टीसी (Transfer Certificate), जिसका कोई आधिकारिक बोर्ड सत्यापन न हो, इस वैधानिक कसौटी पर खरी नहीं उतरती।
- धारा 94(2) के अनुसार किसी व्यक्ति की आयु निर्धारित करने के लिए केवल निम्नलिखित दस्तावेज ही कानूनी रूप से स्वीकार्य हैं:
विधिक विवरण एवं संबद्ध प्रावधान
- न्यायालय: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (मूल रिट क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: दीपक पाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य [इलाहाबाद हाईकोर्ट]
- पीठासीन न्यायाधीश: न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी (एकल पीठ)
- आदेश की तिथि: 27 अक्टूबर 2026
- आगामी सुनवाई: 27 नवंबर 2026
प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act, 2006) — धारा 2(a) (वयस्क विवाह आयु: वर 21 वर्ष, वधू 18 वर्ष), धारा 9 व 10 (बाल विवाह कराने व बढ़ावा देने पर कठोर कारावास), एवं धारा 16 (बाल विवाह निषेध अधिकारी / CMPO के कर्तव्य)
- किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 — धारा 94(2) (उम्र निर्धारण के कानूनी साक्ष्य का क्रम)
- उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली — विवाह का अनिवार्य ऑनलाइन पंजीकरण एवं दस्तावेजों का सत्यापन
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन, स्वास्थ्य व बाल शोषण से मुक्ति का अधिकार) एवं अनुच्छेद 226
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- बाल विवाह रोकथाम और विवाह पंजीकरण का विधिक मानक: ‘विवाह पंजीकरण प्राधिकारियों का यह संवैधानिक और वैधानिक दायित्व है कि वे विवाह का पंजीकरण करने से पूर्व पक्षकारों की वैधानिक आयु (21/18 वर्ष) की निष्पक्ष और ठोस पड़ताल करें; आधार कार्ड और असत्यापित स्कूल टीसी उम्र का विधिक साक्ष्य नहीं हैं; जब तक प्राथमिक जन्म प्रमाण पत्र या बोर्ड अंकतालिका से आयु की पुष्टि न हो, तब तक ऑनलाइन पोर्टल द्वारा विवाह प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाना चाहिए; किसी भी संदेहास्पद मामले को तत्काल बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट को भेजा जाना अनिवार्य है।’
- वर्तमान स्थिति व अनुपालन निर्देश: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्यव्यापी मैरिज पोर्टल में तकनीकी बदलाव करने और दिशानिर्देशों को सभी जिलों के विवाह पंजीयकों तक लागू करने का निर्देश दिया है; 27 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में राज्य सरकार को इस संबंध में की गई प्रशासनिक व तकनीकी कार्यवाही की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करनी होगी।
Child Marriage: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court), प्रयागराज |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी (Justice Tej Pratap Tiwari) |
| मामला/साइटेशन | दीपक पाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य (Deepak Pal v. State of UP & Ors.) |
| मूल विवाद | असत्यापित ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और आधार कार्ड के आधार पर नाबालिगों का विवाह पंजीकृत कर देना। |
| अदालत का मुख्य निष्कर्ष | 1. आधार आयु का प्रमाण नहीं: आधार कार्ड और असत्यापित टीसी JJ एक्ट की धारा 94 के तहत वैध आयु प्रमाण पत्र नहीं हैं। 2. राज्यव्यापी निर्देश: यूपी ऑनलाइन मैरिज पोर्टल में तकनीकी और प्रक्रियात्मक बदलाव के कड़े निर्देश। 3. बाल विवाह अधिकारी को संदर्भ: संदिग्ध या नाबालिग मामलों को सीधे डीएम (DM) और बाल विवाह निषेध अधिकारी को भेजने का आदेश। |
| अगली सुनवाई | 27 नवंबर 2026 |

