Monday, July 27, 2026
HomeLaworder HindiContempt Notice to UP Home Secretary: कस्टोडियल डेथ में मुआवजे की नीति...

Contempt Notice to UP Home Secretary: कस्टोडियल डेथ में मुआवजे की नीति क्यों नहीं बनी?…गृह सचिव को अवमानना में तलब किया

केस मैट्रिक्स: Allahabad High Court Contempt Notice to UP Home Secretary

पहलूविवरण
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
माननीय पीठजस्टिस सौरभ लवानिया (Single Bench)
प्रतिवादी अधिकारीसंजय प्रसाद, अपर मुख्य सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश
संबंधित कानूनContempt of Courts Act, 1971 (Section 12)
मूल विषयकस्टोडियल डेथ के मामलों में मुआवजा नीति/गाइडलाइंस न बनाना एवं ₹10 लाख मुआवजे का गैर-भुगतान
अंतिम निर्णय31 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत उपस्थिति और आरोप तय करने का निर्देश।

Contempt Notice to UP Home Secretary: कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के मामलों में मुआवजा तय करने के लिए गाइडलाइंस/नीति बनाने के न्यायिक आदेश का पालन न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।

जस्टिस सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि आदेश का अनुपालन न होने के कारण संबंधित अधिकारी अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) की धारा 12 के तहत सजा के पात्र हैं और उन पर आरोप तय (Framing of Charges) करने सहित आगे की कार्यवाही के लिए उपस्थिति अनिवार्य है। अदालत ने राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद (Sanjay Prasad) के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए उन्हें 31 जुलाई 2026 को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

मामला क्या था?: नाबालिग की जेल में मौत और मुआवजे का बकाया

  • घटनाक्रम: याचिकाकर्ता महिला का नाबालिग बेटा 2016 के एक मामले (IPC और पॉक्सो अधिनियम के तहत) में आरोपी था। लगभग 3 साल 10 महीने जेल में रहने के बाद उसे फरवरी 2022 में जमानत मिली थी।
  • गिरफ्तारी और कस्टोडियल डेथ: ट्रायल कोर्ट में अनुपस्थित रहने के कारण उसे 7 फरवरी 2024 को दोबारा गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 20 फरवरी 2024 को जिला जेल के भीतर ही उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
  • आरोप और सरकार का रुख: परिजनों ने आरोप लगाया कि अवैध रूप से प्रतिमाह ₹4,500 की मांग पूरी न होने पर जेल में उसे पुलिस और जेल अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किया गया। वहीं, राज्य सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उसकी मौत में अधिकारियों की कोई भूमिका नहीं थी।
  • मूल आदेश (20 फरवरी): खंडपीठ (Division Bench) ने 20 फरवरी को अपने ऐतिहासिक फैसले में माना कि जेल के भीतर अप्राकृतिक मौत के लिए राज्य सरकार पूरी तरह से उत्तरदायी (Strictly Liable) है। कोर्ट ने पीड़िता को ₹10 लाख का मुआवजा देने और भविष्य के कस्टोडियल डेथ मामलों में मुआवजा भुगतान के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं

अवमानना कार्यवाही और अधिकारी की व्यक्तिगत पेशी

हाई कोर्ट ने 24 जुलाई 2026 को पारित अपने आदेश में कहा कि समय सीमा बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा गाइडलाइंस तैयार करने के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: “उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए, नामित अधिकारी (अपर मुख्य सचिव, गृह) को निर्देश दिया जाता है कि वे 31 जुलाई 2026 को इस अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें, ताकि अवमानना अधिनियम की धारा 12 के तहत आरोप तय करने और आगे की कार्यवाही की जा सके।”

जेल में अप्राकृतिक मौत पर राज्य की पूर्ण जवाबदेही

मूल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गहरा आश्चर्य व्यक्त किया था कि भारतीय कानूनों में गैर-कानूनी हिरासत या कस्टोडियल डेथ के लिए मुआवजे के भुगतान का कोई स्पष्ट वैधानिक जनादेश (Express Mandate) नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जब कोई व्यक्ति राज्य की हिरासत में होता है, तो उसकी जान-माल की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है।

हाई कोर्ट का अंतिम निर्णय

  1. समन जारी: उत्तर प्रदेश के गृह सचिव को अवमानना मामले में 31 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत पेशी का आदेश।
  2. सजा और आरोप: कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि संतोषजनक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है, तो अधिकारी के खिलाफ अवमानना के तहत औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएंगे।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
35.9 ° C
35.9 °
35.9 °
44 %
3.5kmh
96 %
Mon
35 °
Tue
38 °
Wed
35 °
Thu
36 °
Fri
35 °