केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू एवं न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत (छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट) |
| पक्षकार | पत्नी (सरकारी नर्स) बनाम पति (निजी कर्मचारी) |
| संबंधित कानून | हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(ia) व (ib) (क्रूरता एवं परित्याग) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | शादी में मामूली नाखुशी/असंतोष मानसिक क्रूरता नहीं है। यदि एक पक्ष शादी बचाने के लिए प्रयासरत है, तो परित्याग (Desertion) का आधार नहीं बनता। |
| अदालत का निर्णय | फैमिली कोर्ट का तलाक का आदेश रद्द; पत्नी के पक्ष में फैसला। |
Dark Complexion: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक अदालत (Family Court) द्वारा पति के पक्ष में सुनाए गए तलाक के फैसले को निरस्त कर दिया है।
न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू और न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की खंडपीठ ने सरकारी नर्स पत्नी की अपील को स्वीकार करते हुए 6 अगस्त 2026 के अपने फैसले में यह राहत दी। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शादी में केवल असंतोष या नाखुशी (Mere Unhappiness) क्रूरता (Cruelty) का आधार नहीं बन सकती और न ही इसके आधार पर वैवाहिक संबंधों को खत्म किया जा सकता है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पति किसी न किसी बहाने से अपनी पत्नी से “पीछा छुड़ाने पर आमादा” (Hell-bent on getting rid of wife) था।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- ‘किसी भी बहाने पीछा छुड़ाने की कोशिश’:“रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट है कि उत्तरदाता-पति किसी न किसी बहाने से अपीलकर्ता-पत्नी से पीछा छुड़ाने पर आमादा था।”
- सांवले रंग और सरकारी नौकरी पर तंज का दावा खारिज: पति का दावा था कि उसकी पत्नी (सरकारी नर्स) उसके सांवले रंग (Dark Complexion) और प्राइवेट नौकरी को लेकर ताने मारती थी। अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा:“दोनों शादी से पहले एक-दूसरे को जानते थे। अगर पत्नी के मन में सचमुच ऐसी कोई भावना होती, तो वह शुरुआत में ही शादी करने से इनकार कर देती और मामला वहीं खत्म हो जाता।”
- असंतोष बनाम कानूनी क्रूरता (Cruelty Standards): अदालत ने कहा कि छोटी-मोटी अनबन या आपसी नाखुशी को कानूनी रूप से क्रूरता मानकर शादी को भंग नहीं किया जा सकता।
मामला क्या था? (Case Background)
- शादी और आरोप
- जोड़े का विवाह फरवरी 2019 में हुआ था। पति का आरोप था कि पत्नी उसके और उसके परिवार के साथ झगड़ा करती थी, सहवास से इनकार करती थी और उसके रंग व नौकरी का मजाक उड़ाती थी।
- पति ने दावा किया कि जनवरी 2020 में पत्नी बिना किसी ठोस कारण के ससुराल छोड़कर चली गई और बार-बार सुलह की कोशिशों के बावजूद वापस नहीं आई, जिससे क्रूरता और परित्याग (Desertion) सिद्ध होता है।
- पत्नी का पक्ष
- पत्नी (जो एक सरकारी नर्स है) ने कहा कि उसने कभी अपने वैवाहिक दायित्वों से इनकार नहीं किया। उसने आरोप लगाया कि पति और उसके ससुराल वाले 5 लाख रुपये नकद, उसकी सैलरी और एटीएम कार्ड की मांग को लेकर शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे।
- पत्नी ने कोर्ट में बताया कि वह हमेशा शादी बचाने की इच्छुक रही। उसने तो यहाँ तक प्रस्ताव दिया था कि जब तक उसका ट्रांसफर नहीं हो जाता, तब तक प्राइवेट जॉब करने वाला पति उसके पोस्टिंग वाले स्थान पर आकर रह सकता है।
- पारिवारिक अदालत का फैसला और अपील
- फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए क्रूरता और परित्याग के आधार पर विवाह विच्छेद (Divorce) का आदेश दे दिया था। इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।
हाई कोर्ट का अंतिम फैसला
हाई कोर्ट ने पाया कि पत्नी ने अपनी शादी बचाने के लिए कानूनी कदम उठाए और वह लगातार पति के साथ रहने को तैयार थी। इससे यह साबित होता है कि पत्नी का इरादा कभी भी शादी को स्थायी रूप से छोड़ने (Desertion) का नहीं था।
पति साक्ष्यों के माध्यम से क्रूरता या परित्याग को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। इसलिए, 6 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को पूरी तरह से रद्द (Set Aside) कर दिया।

