Wednesday, August 5, 2026
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Court news: फिर Police Reform पर शीर्ष अदालत दिए फैसले पर करेगी गौर…कौन से राज्य नहीं दे रहे ध्यान

Court news: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पुलिस सुधारों पर अपने 2006 के फैसले को लागू करने की मांग करने वाली याचिकाओं पर मई में सुनवाई करेगा।

कानून व्यवस्था की जिम्मेदारियों को अलग करने जैसे कदमों की सिफारिश की गई

शीर्ष अदालत ने कहा, याचिका में जांच और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारियों को अलग करने जैसे कदमों की सिफारिश की गई थी। वर्ष 2006 के फैसले में शीर्ष अदालत ने कई निर्देश भी पारित किए थे। इसमें राज्य सरकारों द्वारा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर कोई तदर्थ या अंतरिम नियुक्ति नहीं करना शामिल था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि संघ लोक सेवा आयोग को राज्य सरकार और अन्य हितधारकों के परामर्श से तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सूची तैयार करनी होगी। राज्य उनमें से किसी एक को डीजीपी के रूप में नियुक्त कर सकता है।

वकील प्रशांत भूषण और वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने उठाए सवाल

शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार और केवी विश्वनाथन की पीठ को वकील प्रशांत भूषण और वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने बताया कि शीर्ष अदालत के दिशानिर्देशों का विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है। भूषण ने कहा, पुलिस प्रमुखों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है…। दवे ने आरोप लगाया, एक के बाद एक राज्य फैसले और निर्देशों का पालन करने से इनकार कर रहे हैं। यदि इन सुधारात्मक निर्देशों को लागू नहीं किया गया तो हम वह सब कुछ खो देंगे जिसके हम हकदार हैं। उन्होंने कहा कि बहुत गंभीर स्थिति विकसित हो रही है क्योंकि हर दूसरा राज्य डीजीपी की नियुक्ति पर कानून अपने हाथ में ले रहा है।

झारखंड सरकार को अवमानना ​​याचिका सौंपी जाए

पीठ ने निर्देश दिया कि झारखंड सरकार को अवमानना ​​याचिका सौंपी जाए और सभी याचिकाओं को 5 मई से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इससे पहले, भूषण ने प्रकाश सिंह मामले में 2006 के फैसले में उल्लिखित निर्देशों में से एक का हवाला दिया और कहा कि यह सिफारिश की गई थी कि जांच और कानून और व्यवस्था बनाए रखने के पुलिस कार्यों को अलग किया जाना चाहिए। भूषण ने कहा कि कानून और व्यवस्था एक कार्यकारी कार्य है और जांच आपराधिक न्याय वितरण प्रणाली का हिस्सा है।

2006 में दो पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह और एन के सिंह के दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम निर्देश

  • राज्य पुलिस प्रमुखों का दो साल का निश्चित कार्यकाल होगा।
  • डीजीपी और पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता आधारित और पारदर्शी होनी चाहिए।
  • डीजीपी और पुलिस अधीक्षकों जैसे अधिकारियों का न्यूनतम दो साल का निश्चित कार्यकाल होना चाहिए।
  • राज्य सुरक्षा आयोग के गठन हो, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकार पुलिस पर अनुचित प्रभाव न डाले।
  • डीएसपी और उससे नीचे के रैंक के पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण, नियुक्ति, पदोन्नति और अन्य सेवा-संबंधी मामलों पर निर्णय लेने और सिफारिशें करने के लिए पुलिस स्थापना बोर्ड का गठन हो।
  • पुलिस हिरासत में मृत्यु, गंभीर चोट या बलात्कार सहित गंभीर कदाचार के मामलों में एसपी और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए प्रत्येक राज्य में पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन हो।
  • केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों के चयन और नियुक्ति के लिए एक पैनल तैयार करने के लिए संघ स्तर पर एक राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के गठन की आवश्यकता है, जिसका कार्यकाल न्यूनतम दो वर्ष का हो।
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