अदालत की सख्त टिप्पणियाँ
- स्वस्थ आलोचना की सीमा पार:अदालत ने पेन ड्राइव में पेश वीडियो साक्ष्यों और जजमेंट राइटर के फोन पर लिंक की स्वतंत्र जांच करने के बाद कहा:“उक्त पेजों का एक राजनीतिक एजेंडा प्रतीत होता है जो स्वस्थ सार्वजनिक आलोचना की सीमा से परे है। बिना सत्यापित तथ्यों के जानबूझकर किसी व्यक्ति की छवि को धूमिल किया जा रहा है।”
- लोकतंत्र और सहमति निर्माण पर खतरा:अदालत ने एआई के अनियंत्रित दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा:“यह बहुत ही अनियंत्रित और लापरवाही भरे अंदाज में किया गया एक गंभीर कृत्य है, जो हमारे लोकतंत्र के स्वास्थ्य और जनता की सहमति बनाने की प्रक्रिया (Manufacturing of public consent) पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।”
चंडीगढ़: चुनावों और राजनीतिक अभियानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक (Deepfake) वीडियो के दुरुपयोग, बिना सहमति किसी व्यक्ति के चेहरे व छवि के डिजिटल हेरफेर (Digital Manipulation), स्वस्थ राजनीतिक आलोचना बनाम मानहानि की सीमा, तथा लोकतंत्र में निष्पक्ष जनमत निर्माण की रक्षा पर चंडीगढ़ की एक दीवानी अदालत ने अत्यंत कड़ा और ऐतिहासिक आदेश पारित किया है।
पंजाब कांग्रेस के नेता और सुप्रीम कोर्ट व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील अमनदीप कुमार का केस
सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कुलदीप सिंह ने पंजाब कांग्रेस के नेता और सुप्रीम कोर्ट व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील अमनदीप कुमार (जिन्हें अमनदीप जयंतीपुरा के नाम से भी जाना जाता है) द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे पर सुनवाई करते हुए 5 अक्टूबर 2026 को एकतरफा अंतरिम व्यादेश (Ex-parte Interim Injunction) पारित किया। अदालत ने तीन फेसबुक पेजों—‘थानेदार अंकल’ (Thanedar Uncle), ‘कच्ची लाण’ (Kachi Laan), और ‘बटाले दी राजनीति’ (Batale Di Rajneeti)—पर किसी भी प्रकार की एआई-जनरेटेड सामग्री अपलोड करने या साझा करने पर अंतरिम रोक लगा दी है और संबंधित प्लेटफॉर्म को इन पेजों को तत्काल निलंबित (Suspend) अथवा इनकी सार्वजनिक पहुंच बंद (Disable public access) करने का न्यायिक निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी है कि बिना जांचे-परखे तथ्यों के आधार पर किसी व्यक्ति की छवि को जानबूझकर धूमिल करने वाले एआई वीडियो हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को विषाक्त बना सकते हैं।
अदालत के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. ‘लोकतंत्र के स्वास्थ्य और जन-सहमति के निर्माण पर गंभीर प्रहार’
सिविल जज कुलदीप सिंह ने राजनीतिक विमर्श में डीपफेक तकनीक के बेलगाम इस्तेमाल पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अपने आदेश में दर्ज किया:“उक्त फेसबुक पेज एक ऐसा राजनीतिक एजेंडा (Political Agenda) चलाते हुए प्रतीत होते हैं जो एक स्वस्थ सार्वजनिक आलोचना (Healthy Public Criticism) की सीमाओं से परे है और जानबूझकर, बिना किसी सत्यापित तथ्यों के किसी व्यक्ति की छवि को धूमिल करता है। यह अत्यंत अनियंत्रित और लापरवाह तरीके से किया गया एक गंभीर कृत्य है, जो हमारे लोकतंत्र के स्वास्थ्य (Health of our democracy) और जन-सहमति के निर्माण की प्रक्रिया (Process of manufacturing of public consent) पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।”
2. स्वस्थ राजनीतिक आलोचना बनाम तकनीक का दुरुपयोग:
- अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि किसी सार्वजनिक हस्ती या राजनेता की नीतियों, भाषणों या कार्यों की स्वस्थ आलोचना करना लोकतंत्र का अभिन्न अंग है, परंतु किसी व्यक्ति के चेहरे को सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऐसे कृत्यों में लिप्त दिखाना जो उसने कभी किए ही नहीं, वैधानिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा नहीं हो सकता।
- जज ने अपने आदेश लेखक (Judgment Writer) के मोबाइल फोन के माध्यम से अदालत कक्ष में ही पेन ड्राइव में प्रस्तुत वीडियो और लिंक्स का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन किया।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: क्या थे विवादित AI वीडियो?
- वादी की पृष्ठभूमि और राजनीतिक स्थिति:
- वादी अमनदीप कुमार (जयंतीपुरा) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता हैं तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सक्रिय नेता हैं।
- उनके वकीलों ने दलील दी कि वह वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए बटाला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रमुख दावेदारों में से एक हैं।
- डीपफेक वीडियो और मानहानिकारक चित्रण:
- मुकदमे के अनुसार, तीनों फेसबुक पेजों पर ऐसे एआई-निर्मित वीडियो अपलोड किए गए जिनमें अमनदीप कुमार के चेहरे और शारीरिक बनावट में डिजिटल फेरबदल कर उन्हें उन परिस्थितियों में दिखाया गया जिनमें वे कभी शामिल नहीं हुए थे और न ही उन्होंने इसके लिए कोई सहमति दी थी।
- वीडियो में उन्हें कथित तौर पर:
- एक ड्रग डीलर (Drug Dealer) के रूप में,
- एक असामाजिक तत्व (Anti-social Element) के रूप में, और
- एक वीडियो में एक महिला के साथ आपत्तिजनक इशारे करते हुए डांसर के रूप में दर्शाया गया था।
- बलात्कार मामले में ‘दलाली’ का आपत्तिजनक दावा:
- अदालत ने रिकॉर्ड किया कि एक विशेष वीडियो में अमनदीप कुमार के एआई अवतार को बलात्कार के मामलों को निपटाने वाले एक “बिचौलिये” (Middleman for settling rape cases) के रूप में पेश किया गया था। वीडियो में कथित बातचीत दिखाई गई थी जिसमें वे ऐसे मामलों को रफा-दफा करने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा से संपर्क करने का सुझाव दे रहे थे।
- राजनीतिक पक्षपात और भारी रीच:
- याचिकाकर्ता ने बताया कि इन वीडियो को लगभग 1.80 लाख, 1.78 लाख और 47,800 से अधिक बार देखा गया था।
- यह भी आरोप लगाया गया कि ये पेज वादी को बदनाम करते हुए बटाला के वर्तमान आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमन शेर सिंह उर्फ ‘शैरी कलसी’ (Aman Sher Singh alias Sherry Kalsi) के पक्ष में सकारात्मक प्रचार सामग्री चला रहे थे।
दीवानी अदालत द्वारा पारित अंतरिम आदेश
- एआई सामग्री के प्रसार पर तत्काल रोक: तीनों पेजों के संचालकों और अपलोड करने वालों को निर्देश दिया जाता है कि वे अगली सुनवाई (22 अक्टूबर 2026) तक अमनदीप कुमार से संबंधित किसी भी एआई-जनरेटेड सामग्री को आगे प्रसारित, प्रकाशित या अपलोड करने से पूरी तरह दूर रहें।
- पेजों को सस्पेंड/डिसेबल करने का आदेश: संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (मेटा/फेसबुक) को निर्देश दिया जाता है कि वह इन तीनों पेजों—’थानेदार अंकल’, ‘कच्ची लाण’, और ‘बटाले दी राजनीति’—की सार्वजनिक पहुंच को तुरंत बंद (Disable public access) करे या इन्हें अगली सुनवाई तक निलंबित (Suspend) रखे।
- प्रतिवादियों को नोटिस: प्रतिवादियों को सामान्य विधिक प्रक्रिया के तहत समन और नोटिस जारी कर 22 अक्टूबर 2026 को अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया गया है।
विधिक एवं विधायी विश्लेषण: डिजिटल युग में मानहानि और एआई विनियमन
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) का आदेश XXXIX नियम 1 एवं 2:
- अंतरिम निषेधाज्ञा (Temporary Injunction) प्रदान करने के लिए अदालत ने तीन स्थापित कसौटियों की पुष्टि की:
- प्रथम दृष्टया मामला (Prima Facie Case): डीपफेक वीडियो से वादी की प्रतिष्ठा को प्रत्यक्ष चोट।
- सुविधा का संतुलन (Balance of Convenience): अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर असत्य डीपफेक फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
- अपूरणीय क्षति (Irreparable Loss): इंटरनेट पर झूठी मानहानिकारक सामग्री वायरल होने से होने वाली राजनीतिक व सामाजिक क्षति की भरपाई धन से नहीं की जा सकती।
- अंतरिम निषेधाज्ञा (Temporary Injunction) प्रदान करने के लिए अदालत ने तीन स्थापित कसौटियों की पुष्टि की:
- व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights) एवं निजता का अधिकार:
- किसी भी नागरिक के चेहरे, आवाज और छवि (Likeness) पर उसका अनन्य अधिकार है। किसी की छवि को एआई के जरिए बिना सहमति चुराना और मनगढ़ंत संदर्भ में पेश करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार और व्यक्तित्व अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021:
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ‘मध्यवर्ती’ (Intermediary) के रूप में यह विधिक दायित्व सौंपा गया है कि वे किसी व्यक्ति का रूप धारण करने वाली (Impersonation) या डीपफेक प्रकृति की गैर-कानूनी सामग्री की सूचना मिलने पर उसे तुरंत हटाएं।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: अमनदीप कुमार उर्फ अमनदीप जयंतीपुरा बनाम फेसबुक पेजों के संचालक व अन्य [दीवानी वाद (मानहानि एवं स्थायी निषेधाज्ञा) – सिविल कोर्ट, चंडीगढ़]
- न्यायालय: सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कुलदीप सिंह, चंडीगढ़
- आदेश की तिथि: 5 अक्टूबर 2026
- अगली सुनवाई: 22 अक्टूबर 2026
- वादी (कुमार) की ओर से विधिक प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता हरिंदर दीप सिंह बैंस, जसदीप सिंह ढिल्लों, हिम्मत सिंह बाजवा और अभय सिंह मान
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) का आदेश XXXIX नियम 1 व 2 (अस्थायी व्यादेश / Interim Injunction)
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 356 (आपराधिक मानहानि)
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) की धारा 66D (कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके प्रतिरूपण/धोखाधड़ी) एवं धारा 79 (सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सेफ हार्बर दायित्व)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 19(1)(a) सहपठित अनुच्छेद 19(2) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की युक्तियुक्त सीमाएं — मानहानि का अपवाद)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- अनिल कपूर बनाम सिंपली लाइफ इंडिया (2023, दिल्ली हाईकोर्ट) — ‘किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व, आवाज, चेहरे और छवि का व्यावसायिक या व्यक्तिगत शोषण बिना अनुमति एआई/डीपफेक से नहीं किया जा सकता।’
- जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017, संविधान पीठ, सुप्रीम कोर्ट) — ‘गरिमा, प्रतिष्ठा और निजता अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार हैं; डिजिटल मंचों पर नागरिकों की प्रतिष्ठा की रक्षा आवश्यक है।’
- वर्तमान स्थिति: चंडीगढ़ अदालत ने तीनों फेसबुक पेजों को ब्लॉक/सस्पेंड करने और एआई सामग्री के आगे प्रसार पर अंतरिम रोक लगाई; मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 को नियत।
Deepfake Case: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित न्यायालय | सिविल जज (जूनियर डिविजन) कुलदीप सिंह, चंडीगढ़ |
| वादी (Plaintiff) | अमनदीप कुमार / अमनदीप जैंतीपुरा (कांग्रेस नेता और पंजाब एवं हरियाणा HC/SC के वकील) |
| आरोपी फ़ेसबुक पेज | ‘थानेदार अंकल’ (Thanedar Uncle), ‘कच्ची लाण’ (Kachi Laan) और ‘बटाले दी राजनीति’ (Batale Di Rajneeti) |
| मुख्य विवाद | AI और डीपफेक तकनीक के ज़रिए फर्जी वीडियो बनाकर नेता को नशीले पदार्थों के कारोबारी और असामाजिक तत्व के रूप में चित्रित करना। |
| कोर्ट का आदेश | AI कंटेंट के प्रसार पर रोक, तीनों पेजों को ब्लॉक/सस्पेंड करने का निर्देश और अगली सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 तय। |

